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नॉर्थ कोरिया में महिला सैनिकों की आपबीती: रेप होना आम बात, असमय ठहर जाते हैं पीरियड्स

ली मर्जी से सेना में शामिल हुई थीं। लेकिन 2015 मे यहां सभी महिलाओं के लिए 18 साल के बाद न्यूनतम सात साल तक की मिलिट्री सेवा करना अनिवार्य हो गया।

Author Updated: November 22, 2017 2:25 PM
महिला सैनिकों ने अपने दर्द बयां करते हुए कहा कि वे यहां पर पुरुषों के मुकाबले इतना मजबूत नहीं है। (संकेतात्मक तस्वीर)

नॉर्थ कोरिया में रहना जितना आम नागरिकों के लिए कठिन है, उतना ही सैनिकों के लिए मुश्किल है। दुनिया की चौथी सबसे बड़ी सेना में महिलाओं की जिंदगी इतनी कठिन है कि यहां उनका रेप होना मामूली बात है। हालात के चलते असमय उनके पीरियड्स ठहर जाते हैं। ये बातें ली सो यियोन (41) नाम की पूर्व सैनिक ने बताई हैं। उनके घर से कई लोग सेना में थे, जिसके बाद 1990 में वह भी इसमें शामिल हुईं। तब उन्हें रोजाना एक वक्त का खाना देने का वादा किया गया था। वह 10 साल तक ऐसे कमरे में रहीं, जहां उन्हें दो दर्जन महिलाओं के साथ कमरा साझा करना पड़ा। हर किसी को सामान रखने के लिए दराज दी जाती थी, जिसके ऊपर वे वहां के नेता किम-II संग और उनके बेटे किम जोंग इल की तस्वीरें रखी रहती थीं। सेना छोड़े दशक भर से अधिक वक्त हो गया, मगर कड़वी यादें आज भी उन्हें झकझोर देती हैं।

वह बताती हैं कि सोने के लिए चावल के छिलके की दरी/गद्दा मिलता था। हर जगह उसी की दुर्गंध आती थी। ऊपर से यहां ठीक से नहाने की व्यवस्था भी नहीं थी। गर्म पानी नहीं मिलता है। नल की लाइन पहाड़ियों से आने वाले पानी से जुड़ी होती थी, जिससे कभी-कभार मेंढक और सांप भी आ जाते थे। ‘नॉर्थ कोरियाज हिडेन रेवोल्यूशन’ के लेखक जियून बेक ने बताया कि सेना में शामिल हुई महिलाओं में से बहुत से श्रमिक वर्ग के तौर पर काम लिया गया। जबकि अन्य को दुराचार, शोषण और सेक्सुअल हिंसा का शिकार होना पड़ा।

17 साल की उम्र के दौरान ली सेना की जिंदगी का आनंद ले रही थीं। रोज के कामों में तब उन्हें और बाकी महिला सैनिकों को खाना पकाना और सफाई जैसे काम भी करने पड़ते थे। जबकि पुरुषों इन कामों से छूट पा जाते थे। ‘नॉर्थ कोरिया इन 100 क्योस्चंस’ की लेखिका जूलिएट मोरिलट का कहना है कि यहां का समाज पुरुषवादी मानसिकता का जोर रहा है। महिलाएं को यहां रसोई तक सीमित कर दिया जाता है। यही नहीं, महिला सैनिकों को राशन की बोरियां भी ढोनी पड़ती हैं।

ली के मुताबिक, कुपोषण और तनावपूर्ण माहौल के कारण उन्हें और बाकी महिला साथियों को नौकरी के छह महीने से साल भर के बाद असमय पीरियड्स ठहर जाते थे। महिला सैनिक इस हाल को अच्छा ही समझती थीं। उनका मानना था कि अगर उन्हें समय पर पीरियड्स होते, तो स्थितियां और विकराल हो सकती थीं। मजबूरी में कई बार ली और उनकी साथियों को कई बार इस्तेमाल किए हुए सैनिट्री पैड्स का प्रयोग करना पड़ा। ली को एक 20 साल की लड़की ने बताया था कि उसे इतनी ट्रेनिंग कराई गई कि दो साल तक उसे पीरियड्स ही नहीं हुए।

ली मर्जी से सेना में शामिल हुई थीं। लेकिन 2015 मे यहां सभी महिलाओं के लिए 18 साल के बाद न्यूनतम सात साल तक की मिलिट्री सेवा करना अनिवार्य हो गया। किताबों के लेखकों का मानना है कि यहां सेक्सुअल हैरसमैंट भी बुरी तरह फैला है। मोरिलोट ने जब इस मसले पर महिला सैनिकों से पूछा तो उन्होंने दूसरों के साथ वैसा होने की बात कही। कंपनी कमांडर घंटों तक महिलाओं के कमरे में रहते और उनके साथ जबरस्ती करते।

उधर, सेना का कहना है कि वह ऐसे मामलों को गंभीरता से लेती है। दोषी पाए जाने पर सात साल तक की जेल की सजा सुनाई जाती है। लेकिन बहुत सारे मामलों में पुरुष बच जाते हैं। ली साउथ कोरिया के बॉर्डर पर बतौर सार्जेंट तैनात थीं। 28 साल की उम्र में उन्होंने सेना छोड़ दी। 2008 में उन्होंने वहां से भागने का फैसला किया। पहली कोशिश में वह चीन से सटे बॉर्डर के पास पकड़ी गईं, जिसके बाद उन्हें एक साल की जेल हुई। दूसरी कोशिश में उन्होंने जेल से भागकर ट्यूमेन नदी पार की और चीन पहुंचीं। वहां वह एक शख्स से मिली थीं, जिसने उन्हें साउथ कोरिया वाया चीन से निकालने का बंदोबस्त किया था।

मिलिट्री परेड में हिस्सा लेतीं उत्तर कोरिया की महिला सैनिक। (फोटोः रॉयटर/दमीर सगोई)

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