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श्रीलंकाः हार के बाद PM का इस्तीफा, नए राष्ट्रपति ने आगे बढ़ाया भाई का नाम, अब महिंद्रा राजपक्षे होंगे प्रधानमंत्री

‘कोलंबो गजट’ अखबार के मुताबिक, विशेष बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने मंगलवार को राष्ट्रपति राजपक्षे से मुलाकात की और श्रीलंका की संसद के भविष्य पर चर्चा की।

Author  कोलंबो | Updated: November 20, 2019 7:09 PM
Prime Minister of Sri Lanka, Sri Lanka pm, Sri Lanka prime minister, colombo, Gotabaya Rajapaksa, Lankan tamils, LTTE, Mahinda Rajapaksa, Ranil Wickeremesinghe, sinhala, sri lankaश्रीलंका के प्रधानमंत्री ने दिया पद से इस्तीफा

श्रीलंका के प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे ने बुधवार को इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफे के कुछ दिन पहले राष्ट्रपति चुनाव में गोटबाया राजपक्षे ने सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार को हरा दिया था। ‘कोलंबो गजट’ अखबार के मुताबिक, विशेष बयान में प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने मंगलवार को राष्ट्रपति राजपक्षे से मुलाकात की और श्रीलंका की संसद के भविष्य पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि संसद में उनकी सरकार को अभी भी बहुमत है लेकिन उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में राजपक्षे को मिले जनादेश का सम्मान करने और पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है।

राष्ट्रपति चुनाव में राजपक्षे की जीत के बाद विपक्षी खेमे से उनके इस्तीफे को लेकर दबाव बनाया जा रहा था। राजपक्षे ने राष्ट्रपति चुनाव में सजित प्रेमदास को हराया। सूत्रों ने कहा है कि राष्ट्रपति राजपक्षे अपने बड़े भाई और वर्तमान में विपक्ष के प्रमुख नेता महिंदा राजपक्षे को अगला प्रधानमंत्री नियुक्त करेंगे।

गौरतलब है कि 26 अक्टूबर 2018 को तत्कालीन राष्ट्रपति मैत्रीपाल सिरिसेना ने विवादास्पद कदम के तहत महिंदा को प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। इस कदम के बाद देश में असाधारण संवैधानिक संकट पैदा हो गया था। उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद दिसंबर में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। महिदा 2005 में चुनाव जीते थे और दक्षिण एशिया में सबसे लंबे समय तक पद पर रहने वाले नेता बन गए थे। महिंदा 24 साल की उम्र में 1970 में देश के सबसे युवा सांसद बन गए थे।

यूनाइटेड नेशनल पार्टी के नेता रानिल विक्रमसिंघे ने (16 दिसंबर, 2018) को श्रीलंका के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। इसके साथ ही देश में 51 दिन लंबा सत्ता संघर्ष खत्म हो गया था। उनसे पहले सिरिसेना ने विवादास्पद कदम उठाते हुए 26 अक्टूबर को विक्रमसिंघे को बर्खास्त कर दिया था और उनके स्थान पर महिंदा राजपक्षे को नियुक्त किया था जिससे इस द्वीपीय देश में संवैधानिक संकट पैदा हो गया था। यूएनपी नेता ने अपनी बर्खास्तगी को गैरकानूनी बताया था।

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