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राजेश अग्रवाल : दूसरी बार लंदन के उप महापौर बने इंदौर के निवासी

राजेश अग्रवाल ऐसे समय में लंदन के उप महापौर बने, जब ब्रिटेन आर्थिक संकट से जूझ रहा है। उसकी अर्थव्यवस्था हिचकोले खा रही है और हजारों नौकरियों पर संकट है। विकास की रफ्तार थमी हुई है। लंदन में कारोबारी जगत की आशंकाओं को दूर करना राजेश के सामने सबसे कठिन काम है।

लंदन | May 18, 2021 1:00 AM
भारत के राजेश अग्रवाल लंदन के उप महापौर निर्वाचित हुए हैं। वह इंदौर (एमपी) के रहने वाले हैं।

इंदौर के राजेश अग्रवाल। वर्ष 2000 में बीबीए पास करने के बाद नौकरी की तलाश में जुटे थे। इंजीनियर पिता और शिक्षिका मां ने अपने बेटे से काफी उम्मीदें पाल रखी थीं। कुछ समय बाद चंडीगढ़ में नौकरी मिली। वेतन महीने के पांच हजार रुपए। नौकरी के साथ साथ पढ़ाई करते रहे, एमबीए कर लिया। 20 साल के बाद उस नौजवान ने विश्व स्तर पर कीर्तिमान कायम किया। वे दूसरी बार लंदन के उप महापौर बने हैं। लंदन पहुंचने के बाद कड़ी मेहनत से आज की तारीख में दो बड़ी कंपनियां खड़ी कर लीं। उनकी एक कंपनी तो लंदन की 100 बड़ी कंपनियों में शुमार है। नौ करोड़ पौंड के राजस्व मूल्यांकन वाली उनकी कंपनी को संडे टाइम्स की सूची में जगह मिल चुकी है।

राजेश अग्रवाल ऐसे समय में लंदन के उप महापौर बने, जब ब्रिटेन आर्थिक संकट से जूझ रहा है। उसकी अर्थव्यवस्था हिचकोले खा रही है और हजारों नौकरियों पर संकट है। विकास की रफ्तार थमी हुई है। लंदन में कारोबारी जगत की आशंकाओं को दूर करना राजेश अग्रवाल के सामने सबसे कठिन काम है। लंदन का कारोबारी खासकर भारतीय समुदाय अपने वित्तीय हितों को लेकर काफी चिंतित हैं और राजेश अग्रवाल से तमाम उम्मीद लगाए बैठा है। लंदन के प्राचीन और बेहद खूबसूरत शहर की विविधता को बनाए रखने की चुनौती भी उनके सामने है। लंदन में नस्ली हिंसा भी होती है।

राजेश अग्रवाल के लिए चुनौतियां अपार हैं तो मौका उससे कहीं बड़ा और उन्हें कहीं आगे ले जाने वाला। दूसरी बार उप महापौर बनने के बाद राजेश अग्रवाल ने कहा, 100 फीसद क्षमता के साथ काम करूंगा। राजेश अग्रवाल का कार्यकाल तीन साल का होगा। वे उप महापौर के पद पर 2024 तक बने रहेंगे। इससे पहले वे जुलाई 2016 में उप महापौर बने थे। जून 1977 को इंदौर में जन्मे राजेश ने सेंट पॉल स्कूल से शिक्षा हासिल की।

वे वर्ष 2001 में ब्रिटेन गए थे। वे जब पहली बार उप महापौर बने, तो उनका पूरा कार्यकाल ब्रेग्जिट और कोविड जैसी चुनौतियों के बीच भरा रहा। लेकिन उनकी उपलब्धियां कम नहीं हुई और अब लगातार दूसरी बार इस पद को संभालने जा रहे हैं। राजेश कहते हैं कि दूसरी बार अवसर मिलना बहुत बड़ी बात है। लंदन ने मुझे बहुत कुछ दिया है, मैं इस कार्यकाल में भी अपनी 100 फीसद क्षमता से लंदन के लोगों के लिए काम करूंगा। उनके बड़े भाई योगेश अग्रवाल को शुरू से छोटे भाई राजेश की प्रतिभा और योग्यता का अहसास था। वे कहते हैं कि राजेश ने अपने कदम हमेशा जमीन पर जमाए रखे।

धन-दौलत, मान-सम्मान को कभी राजेश ने घमंड नहीं बनने दिया। मां से मिले संस्कारों को राजेश अपनी धरोहर मानते हैं। सीधे-सादे राजेश का लक्ष्य हमेशा बड़ा रहा। इंदौर आने पर वे अपने दोस्तों से मिलते हैं। ऑटो रिक्शा से घूमते हैं। देखकर आप यकीन नहीं करेंगे कि ये अरबों पौंड की कंपनी का मालिक है।

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