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ब्रिटेन की संसद में भी उठा किसान आंदोलन का मुद्दा, बोरिस जॉनसन समझे भारत-पाकिस्तान विवाद, अब आई सफाई

किसान आंदोलन पर किए गए सवाल पर जॉनसन ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच जो कुछ हो रहा है हम उसे लेकर चिंतित हैं, पर किसी भी विवाद का हल द्विपक्षीय बातचीत से हो सकता है।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र लंदन | Updated: December 10, 2020 1:51 PM
लेबर पार्टी से सांसद तनमनजीत सिंह धेसी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन।

भारत में कृषि कानूनों को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन का मुद्दा ब्रिटेन की संसद में भी उठा है। यहां हाउस ऑफ कॉमन्स में लेबर पार्टी के सिख सांसद तनमनजीत सिंह धेसी ने किसान आंदोलन पर ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन से शिकायत की और मांग की कि वे भारतीय पीएम से किसानों के खिलाफ इस्तेमाल किए गए बल पर बात करें। हालांकि, जॉनसन उनकी मांग को भारत-पाकिस्तान से जुड़ा मुद्दा समझे और बोले कि दो देशों के बीच कोई भी विवाद उनका आपसी मुद्दा है। जॉनसन की इस प्रतिक्रिया के बाद धेसी पूरी तरह से असंतुष्ट दिखाई दिए।

क्या कहा था लेबर पार्टी सांसद ने?: दरसअल, धेसी ने भारत में किसानों का मुद्दा उठाते हुए संसद में कहा कि कुछ फुटेज सामने आईं, जिनमें शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे किसानों पर आंसू गैस के गोले और पानी की बौछारे करते दिखाई दीं। उन्होंने पूछा कि क्या जॉनसन, ब्रिटेन में रहने वाले सिख समुदाय की चिंताओं से भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अवगत कराएंगे। धेसी ने जॉनसन से पूछा कि क्या वे ये मानते हैं कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने का अधिकार सभी का है?

जॉनसन का क्या रहा जवाब?: ब्रिटिश पीएम इस सवाल पर भ्रमित हो गए। जॉनसन ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच जो कुछ हो रहा है हम उसे लेकर चिंतित हैं। पर किसी भी विवाद का हल द्विपक्षीय बातचीत से हो सकता है और यह वहां की सरकारें ही कर सकती हैं और मुझे लगता है कि सांसद इस बात का सम्मान करेंगे।

ब्रिटिश पीएम के किसान आंदोलन और भारत-पाकिस्तान के मुद्दे में फर्क न कर पाने पर बाद में तनमनजीत सिंह धेसी ने गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने ट्विटर पर कहा कि हर किसी को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है। उन्होंने आश्चर्य प्रकट किया कि प्रधानमंत्री जॉनसन को यह नहीं पता कि वह किस विषय पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। बाद में प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के जवाब पर ब्रिटेन सरकार की सफाई आई है। ब्रिटेन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री सवालों को ठीक से सुन नहीं पाए। ब्रिटेन की सरकार भारत में किसानों के विरोध के महल पर नज़र बनाए हुए है।

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