भारत में बैन खालिस्तान समर्थक SFJ ने UN को दिया चंदा, किसानों से ‘बदसलूकी’ की जांच के लिए कमेटी बनवाने की भी कर रहा कोशिश

बता दें कि यूएन की कमीशन ऑफ इंक्वायरी का गठन आमतौर पर उन स्थितियों में होता है, जहां मानवाधिकारों का गंभीर हनन हो रहा हो।

Author Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली/जेनेवा | Updated: March 14, 2021 11:06 AM
UNHRC, SFJ, Farmers Protestखालिस्तान समर्थक संगठन एसएफजे ने यूएन के मानवाधिकार आयोग से की कमीशन ऑफ इंक्वायरी बनाने की मांग। (प्रतीकात्मक फोटो)

भारत में कृषि कानूनों के खिलाफ चल रहे किसान आंदोलन पर देशविरोधी ताकतों की भी नजर है। खबर है कि खालिस्तान समर्थक संगठन- सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन में शामिल किसानों के साथ हुए कथित दुर्व्यव्हार की जांच के लिए यूएन में लॉबिंग की। इसके लिए संगठन ने संयुक्त राष्ट्र को 10 हजार डॉलर (करीब 7 लाख रुपए) का चंदा भी दिया। बता दें कि एसएफजे भारत में बैन है।

द टाइम्स ऑफ इंडिया अखबार के मुताबिक, जेनेवा में यूनाइटेड नेशंस हाई कमिश्नर फॉर ह्यूमन राइट्स (OHCHR) के दफ्तर के एक प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि ऑनलाइन डोनेशन प्रोग्राम के जरिए एक मार्च को एसएफजे के प्रतिनिधियों की तरफ से यूएन को 10 हजार डॉलर का दान मिला है। यूएन के मुताबिक, उसे मिलने वाला कोई भी चंदा तब तक लेने से इनकार नहीं किया जाता, जब तक उसे यूएन की प्रतिबंधित लिस्ट में शामिल संगठन या व्यक्ति ने दिया हो।

बता दें कि इस पूरे मामले में अमेरिका में रहने वाले सिख फॉर जस्टिस के प्रमुख गुरपतवंत सिंह पन्नूं का नाम सामने आ रहा है। भारत की ओर से आतंकी घोषित किए जा चुके पन्नूं ने हाल ही में कहा था कि भारत में प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही हिंसा और राजद्रोह के केसों की जांच यूएन कमीशन ऑफ इंक्वायरी (CoI) के जरिए होनी चाहिए। पन्नूं ने इस कमीशन की स्थापना के लिए सिख समुदाय की ओर से 13 लाख डॉलर (करीब 9.5 करोड़ रुपए) दान देने की बात भी कही थी।

पन्नूं ने कहा था कि अब तक यूएन ने कोई कमीशन स्थापित नहीं की है। लेकिन हम इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार मामलों के उच्चायुक्त के दफ्तर के जरिए उठाने की कोशिश करेंगे। बता दें कि यूएन की कमीशन ऑफ इंक्वायरी का गठन आमतौर पर उन स्थितियों में होता है, जहां मानवाधिकारों का गंभीर हनन हो रहा हो। मौजूदा समय में सीरिया के लिए यूएन ने एक कमीशन ऑफ इंक्वायरी का गठन किया है।

OHCHR के प्रवक्ता ने साफ किया कि अभी यूएन की तरफ से भारत में किसी कमीशन ऑफ इंक्वायरी बिठाने की योजना नहीं है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर CoI संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 47 सदस्यों के मतों के बाद स्थापित की जाती हैं। इसके लिए यूएन की तरफ से बजट भी तय होता है। लेकिन किसी समूह या व्यक्तिगत दान से यूएन मानवाधिकार संगठन खास गतिविधि के लिए तैयार नहीं होता।

प्रवक्ता ने बताया कि हमने सिख फॉर जस्टिस की मांगों के मुताबिक कोई कमीशन ऑफ इंक्वायरी नहीं गठित की जा रही और अगर एसएफजे को इसे लेकर कोई झूठी समझ थी, तो यूएन इस रकम को लौटा भी सकता है। OHCHR प्रवक्ता ने कहा कि हम किसी भी तरह के कदम से पहले देश की सरकार के अधिकारियों से भी बात करते हैं। हमें भारत के किसान आंदोलन पर भी काफी आवेदन मिले हैं। लेकिन किसी भी मुद्दे पर मिली जानकारी को जांचने के लिए हमारी कड़ी प्रक्रिया है।

Next Stories
1 बुर्के पर बैन लगाना चाहता है श्रीलंका, मंत्री बोले- मदरसे भी बंद होंगे, कट्टरपंथ का हैं प्रतीक
2 प्रेमी को प्रपोज करने का वीडियो हुआ वायरल, यूनिवर्सिटी से निकाल दिए गए दो छात्र
3 पाकिस्तानी सीनेट में मिले ‘जासूसी वाले कैमरा’, तो हंगामा! दीवार के भीतर छिपे मिले; इमरान के मंत्री ने शेयर किया फोटो
यह पढ़ा क्या?
X