प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति बाइडेन के सामने उठाया एच-1बी वीजा का मुद्दा

उस द्वारा जारी एक तथ्य पत्र में बाद में कहा गया कि अमेरिका को 2021 में अब तक भारतीय छात्रों को रेकॉर्ड 62,000 वीजा जारी करने पर गर्व है। अमेरिका में लगभग 2,00,000 भारतीय छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सालाना 7.7 अरब अमेरिकी डालर का योगदान करते हैं।

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वाशिंगटन में राष्ट्रपति जो बाइडेन से मिलते पीएम नरेंद्र मोदी। (File Photo/Source: Twitter/@narendramodi)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ पहली आमने-सामने की बैठक में अमेरिका में भारतीय समुदाय से जुड़े कई मुद्दों को उठाया, जिसमें भारतीय पेशेवरों की अमेरिका में पहुंच और एच -1 बी वीजा का मुद्दा शामिल है। यह जानकारी विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने दी।

प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ ओवल कार्यालय में अपनी पहली द्विपक्षीय बैठक को शानदार बताया, जिन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध ‘मजबूत, करीबी और घनिष्ठ’ होने के लिए नियत हैं। इस बैठक को लेकर शृंगला ने कहा, ‘उन्होंने (मोदी) अमेरिका में भारतीय पेशेवरों के लिए पहुंच प्राप्त करने के मुद्दे पर बात की। उस संदर्भ में उन्होंने एच-1बी वीजा का जिक्र किया।’

सबसे अधिक मांग वाला एच-1बी वीजा एक गैर-प्रवासी वीजा है, जो अमेरिकी कंपनियों को सैद्धांतिक या तकनीकी विशेषज्ञता की आवश्यकता वाले विशेष व्यवसायों में विदेशी श्रमिकों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। प्रौद्योगिकी कंपनियां भारत और चीन जैसे देशों से हर साल हजारों कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए इस पर निर्भर हैं।

शृंगला ने कहा, ‘उन्होंने इस तथ्य के बारे में भी बात की कि यहां काम करने वाले कई भारतीय पेशेवर सामाजिक सुरक्षा में योगदान करते हैं। अमेरिका में उन योगदानों का लाभ कुछ ऐसा है जो भारतीय श्रमिकों की संख्या को प्रभावित करता है।’

वाइट हाउस द्वारा जारी एक तथ्य पत्र में बाद में कहा गया कि अमेरिका को 2021 में अब तक भारतीय छात्रों को रेकॉर्ड 62,000 वीजा जारी करने पर गर्व है। अमेरिका में लगभग 2,00,000 भारतीय छात्र अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सालाना 7.7 अरब अमेरिकी डालर का योगदान करते हैं। दुनिया भर में फुलब्राइट कार्यक्रम की 75वीं वर्षगांठ मनाया जा रहा है, यह कार्यक्रम भारत में शुरू होने के बाद से 71 वर्षों से अमेरिकियों और भारतीयों को एकसाथ ला रहा है।

वाइट हाउस ने कहा, ‘2008 में, हमने अमेरिका के साथ इन फेलोशिप को संयुक्त रूप से निधि देने के भारत के निर्णय का स्वागत किया और कार्यक्रम का नाम बदलकर फुलब्राइट-नेहरू फेलोशिप प्रोग्राम कर दिया। इस कार्यक्रम के तहत 20,000 से अधिक फेलोशिप और अनुदान प्रदान किए गए हैं और अमेरिका इन सफलताओं के निर्माण के लिए तत्पर है।’

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