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उ.कोरिया की धमकी से निपटने के लिए डोनाल्ड ट्रंप ने की चीन को कारोबारी समझौतों की पेशकश की

अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ फ्लोरिडा के मार-ए-लागो रिसार्ट में दो दिन गुजारे और एक दिन पहले उनसे फोन पर भी बात की है।
Author April 13, 2017 10:33 am
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (फाइल फोटो)

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनके और चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच ‘बहुत अच्छे समीकरण’ हैं। साथ ही उन्होंने उत्तर कोरिया की धमकी से निपटने में चीन द्वारा मदद करने की स्थिति में उसे अच्छे कारोबारी समझौते करने की पेशकश की और आश्वासन दिया कि अमेरिका चीन को ‘जानबूझकर अपनी मुद्रा विनिमय दर बढ़ाने वाले देश’ का दर्जा नहीं देगा। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में कल नाटो के महासचिव जेंस स्टोल्टनबर्ग के साथ साझा संवाददाता सम्मेलन में बताया, ‘‘राष्ट्रपति शी अच्छी चीजें करना चाहते हैं। हमारे बीच बहुत बढ़िया संबंध हैं। मुझे लगता है कि हमारे बीच अच्छे समीकरण है। मुझे लगता है कि उत्तर कोरिया के मामले में वह हमारी मदद करना चाहते हैं। हमने कारोबार के संबंध में बातें कीं। हमने बहुत सी चीजों के बारे में बात की।’’

अमेरिकी राष्ट्रपति ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ फ्लोरिडा के मार-ए-लागो रिसार्ट में दो दिन गुजारे और एक दिन पहले उनसे फोन पर भी बात की है। ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति के साथ हाल ही में फोन पर हुई बातचीत का हवाला देते हुये कहा, ‘‘मैंने कहा, जिस तरह से आप एक अच्छा कारोबारी समझौता करने जा रहे हैं, वह उत्तर कोरिया के मामले में हमारी सहायता करेगा। …अन्यथा हम इसे सिर्फ अकेले ही करने जा रहे हैं।’’

उन्होंने चीन को आगाह करते हुये कहा कि यह भी ठीक रहेगा, लेकिन यदि चीन बाद में उत्तर कोरिया के मामले में मदद नहीं करने का निर्णय करता है तो इसे अकेले करने का मतलब इसे अन्य देशों के साथ मिलकर करना है।’’ उल्लेखनीय है कि उत्तर कोरिया ने अमेरिका को परमाणु युद्ध की धमकी दी है।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह शी से ‘बहुत प्रभावित’ हैं। ट्रंप ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि वह अच्छी तरह से समझ गये हैं और मुझे लगता है कि वह मदद करना चाहते हैं। हमें देखना है कि वह ऐसा करते हैं या नहीं।’’ अमेरिकी राष्ट्रपति ने ‘द वाल स्ट्रीट जर्नल’ को दिए साक्षात्कार में कहा था कि अमेरिका को सभी देशों से ‘जबरदस्त व्यापार घाटा’ हुआ है, लेकिन सबसे ज्यादा व्यापारिक घाटा चीन के साथ हुआ।

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