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गैस उत्सर्जन की कटौती पर विकसित देशों की होगी परीक्षा: प्रकाश जावड़ेकर

पर्यावरण मंत्री प्रकाश जाड़ेकर ने कहा, ‘‘विकसित दुनिया की इसको लेकर परीक्षा होगी कि वे कैसे अपने खुद के देशों में सतत खपत को अपनाते हैं

Author संयुक्त राष्ट्र | Published on: April 22, 2016 7:43 PM
संयुक्त राष्ट्र में प्रकाश जावड़ेकर। (पीटीआई फोटो)

संयुक्त राष्ट्र में ऐतिहासिक पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए दुनिया के अधिकांश देशों के साथ आने की पृष्ठभूमि में भारत ने कहा है कि आगे बढ़ने से विकसित और विकासशील देशों की इसको लेकर ‘परीक्षा’ होगी कि वे गैस उत्सर्जन में कटौती और गरीबी उन्मूलन में किस तरह से उनकी कथनी और करनी एक जैसी रहती है। पर्यावरण मंत्री प्रकाश जाड़ेकर ने यहां सतत विकास विषय पर आयोजित सत्र में कहा, ‘‘विकसित दुनिया की इसको लेकर परीक्षा होगी कि वे कैसे अपने खुद के देशों में सतत खपत को अपनाते हैं और विकासशील देशों को क्रियान्वयन के माध्यम उपलब्ध कराते हैं या नहीं।’’

उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों का हासिल करने और विकसित विश्व की ओर से मुहैया कराए गए धन के उपयोग के लिए समग्र रूप से योजना बनाने को लेकर विकासशील देशों की भी परीक्षा होगा। जावड़ेकर ने कहा, ‘‘दोनों समूहों की इस बात के लिए परीक्षा होगी कि वे कैसे रअपनी कथनी और करनी को एक जैसा रखते हैं और गरीबी को दूर करते हैं।’’

मंत्री ने कहा कि 2030 के एजेंडे में दिए गए प्रावधानों के अनुसार समझौते को लेकर आगे कदम उठाने की प्रक्रिया और समीक्षा स्वैच्छिक, संबंधित देश के नेतृत्व वाली रहनी चाहिए और परस्पर समझ एवं बेहतरीन चलन का आदान-प्रदान होना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून की मेजबानी में आयोजित समारोह में 165 से अधिक देश जलवायु परिवर्तन समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। दुनिया की सभी बड़ी अर्थयवस्थाओं और ग्रीन हाउस का सर्वाधिक उत्सर्जन करने वाले देशों ने संकेत दिया है कि वे शुक्रवार को इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।

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