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11 साल की विदेशी बच्ची ने भारत आने के लिए मांगी पीएम मोदी से मदद, बोली- आप सबसे ताकतवर शख्स हो

भारत वापस आने की गुहार लगा रही बच्ची फिलहाल कंबोडिया में है। बच्ची की मां मार्टा कोटलारस्का को भारत में वीजा में निर्धारित समयसीमा से ज्यादा ठहरने पर सरकार द्वादार ब्लैकलिस्ट किया गया है।

वीजा में निर्धारित समय से ज्यादा रहने पर हुए ब्लैकलिस्ट। फोटो: ट्विटर/Marta Kotlarska

पोलैंड की 11 साल की बच्ची अलिस्जा वानाटको ने भारत मे रहने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नवनिर्वाचित विदेश मंत्री एस जयशंकर से मदद की गुहार लगाई है। वानाटको ने पीएम मोदी के नाम एक पत्र लिखा है। पत्र में बच्ची ने वीजा से संबंधित समस्या को जिक्र किया है।

वानाटको ने अपने हाथ से लिखे पत्र में कहा है कि ‘हिंदुस्तान में उनके सभी दोस्त, जानवर, स्कूल और सारी खुशियां बसती हैं। मैं गोवा को बहुत मिस कर रही हूं और विशेशकर मेरी गायों को।’

भारत वापस आने की गुहार लगा रही बच्ची फिलहाल कंबोडिया में है। बच्ची की मां मार्टा कोटलारस्का को भारत में वीजा में निर्धारित समयसीमा से ज्यादा ठहरने पर सरकार द्वादार ब्लैकलिस्ट किया गया है। मार्टा जो कि पेशे से एक फोटोग्राफर हैं बी-2 बिजनेस वीजा पर भारत में रह रही थीं। लेकिन जब वह 24 मार्च को बेंगलूरू केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पर पहुंची तो उन्हें भारत में दाखिल होने से रोक दिया गया था। वह श्रींलका से वीजा को रिन्यू करवाकर भारत वापस लौट रही थीं।

मां और अपने ऊपर बीत रही इसी समस्या का किया जिक्र करते हुए बच्ची कहता है ‘मेरी मां एक छोटी सी यात्रा करके भारत वापस लौट रही थीं लेकिन कहते हुए एंट्री देने से मना कर दिया कि हम लोगों को ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है।’ मैं गोवा में अपने स्कूल को बहुत प्यार करती हूं। मुझे वहां पशु बचाव केंद्र में अपनी स्वयंसेवा याद आ रही है जहां मैं गायों की देखभाल करने में मदद कर रही थी। मैं गोवा में गायों की देखभाल भी करती थी। मुझे गोवा की प्रकृति से प्यार है।’

बच्ची ने इस पत्र में हिंदी भाषा, केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगोत्री के पवित्र मंदिरों की यात्रा का भी जिक्र किया है। कहा कि मैं भग्वान शिव और नंदादेवी से प्रार्थना करती हूं कि वह मेरी मदद करें। इसके साथ ही मैंने आपको पत्र लिखने का भी निर्णय लिया क्योंकि आप सबसे ताकतवर शख्स हो जो मेरी मां और मुझे वापस मेरे घर भारत में वापल ला सकते हैं।’

बता दें कि बच्ची की मां ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के कार्यकाल के दौरान कई बार विदेश मंत्रालय को ई-मेल के जरिए गुहार लगाई है। लेकिन इसपर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।

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