पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के बयान को लेकर जवाबी हमला किया है। फैसल मुमताज राठौर ने कहा जम्मू कश्मीर के लोगों को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ या किसी और से अपनी पहचान की पुष्टि की जरूरत नहीं है।
ख्वाजा आसिफ ने हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू में कहा था कि प्रदर्शनों से प्रभावित रावलकोट कश्मीरी नहीं हैं और वे वहां के लोगों को कश्मीरी नहीं मानते। उन्होंने यह कहा कि रावलकोट और मीरपुर के लोग पोटोहारी भाषा बोलते हैं, इसलिए उन्हें असली कश्मीरी नहीं मानते।
ख्वाजा आसिफ या किसी और से अपनी पहचान की जरूरत नहीं- फैसल
पीओके के पीएम फैसल मुमताज राठौर ने कहा, “जम्मू और कश्मीर के लोगों को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ या किसी और से अपनी पहचान की पुष्टि की जरूरत नहीं है, उनके जैसे रूढ़िवादी लोग और उनकी हरकतें लोगों को करीब लाने के बजाय दूरी पैदा कर रही हैं।”
ख्वाजा आसिफ ने यह बयान पीओके में चल रहे विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आसिफ ने अपने पक्ष का बचाव करते हुए पीओके में कथित शासन विफलताओं पर भी इशारा किया था।
अपने अधिकारियों से पूछिए- फैसल
आगे फैसल मुमताज राठौर ने कहा, “अपनी गलती पर हुई आलोचना के बाद, अब वह आजाद जम्मू-कश्मीर के कामकाज में कमियां निकालकर मामले को संभालने की कोशिश कर रहे हैं। सर, अपने सीनियर अधिकारियों से पूछिए, वे आपको बता देंगे कि हमने कितना अच्छा काम किया है। हमारे कामकाज को दोष देने के बजाय, असल मुद्दे पर बात करना और अपनी पिछली टिप्पणी के लिए माफी मांगना ज्यादा सम्मानजनक काम होगा।”
संसद में उठ चुके हैं सवाल
इससे पहले पाकिस्तान के संसद में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के रजा अशरफ ने कहा कि इतने सीनियर मंत्री की ओर से ऐसा सामान्य बयान नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बयान से कई लोगों की भावनाएं आहत हुईं हैं। अशरफ ने ख्वाजा आसिफ की ओर रावकोट के लोगों से माफी मांगने पर जोर दिया और कहा कि इस समय कश्मीर में आग पर पानी डालने की जरूरत है न कि नई आग लगाने की।
इस मुद्दे पर बिलावल भुट्टो ने हमला करते हुए पाकिस्तानी संसद में सवाल किया था, एक रक्षा मंत्री की ओर से रावलकोट के लोगों को कश्मीरी न मानने वाले बयान को कैसे बर्दाश्त किया जा सकता है? वह अभी तक माफी भी नहीं मांगे और कैबिनेट में बने हुए हैं।
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पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (POK) में पाकिस्तानी सरकार की कार्रवाई से खूब खून-खराबा हुआ। इस गैरकानूनी तरीके से कब्ज़े वाले इलाके का एक पहलू जांच के दायरे में आ गया है। पाक के गैर-कानूनी कंट्रोल में होने के बावजूद POK में प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, असेंबली और झंडा क्यों है? इन संस्थाओं का होना कुछ लोगों को हैरान कर सकता है। हालांकि ये सब दिखावा है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
