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पाक ने किया आतंकवाद से जंग का एलान

एक स्कूल पर यहां तालिबान के आत्मघाती हमले में 148 से अधिक लोगों के मारे जाने के बाद गहरे शोक में डूबे पाकिस्तान में बुधवार को तीन दिन का राष्ट्रीय शोक शुरू हुआ और हादसे में मरने वालों को सामूहिक रूप से दफनाया गया। दुनिया को झकझोर देने वाली इस घटना के कारण अशांत खैबर […]

Author December 18, 2014 9:00 AM

एक स्कूल पर यहां तालिबान के आत्मघाती हमले में 148 से अधिक लोगों के मारे जाने के बाद गहरे शोक में डूबे पाकिस्तान में बुधवार को तीन दिन का राष्ट्रीय शोक शुरू हुआ और हादसे में मरने वालों को सामूहिक रूप से दफनाया गया। दुनिया को झकझोर देने वाली इस घटना के कारण अशांत खैबर पख्तूनख्वा में सभी शैक्षिक संस्थान बंद रहे। पेशावर इसी प्रांत की राजधानी है। वहीं हमले से हिले पाकिस्तान ने आतंकवाद से निपटने के लिए हफ्ते भर के भीतर एक राष्ट्रीय योजना घोषित करने की प्रतिबद्धता जताई। इसके साथ ही पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कहा कि इस पूरे क्षेत्र को आतंकवाद मुक्त किया जाना चाहिए। शरीफ ने आतंकवाद के खिलाफ जेहाद छेड़ने की अपील की।

प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के घोषित तीन दिन के राष्ट्रीय शोक की वजह से पाकिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहा। शेष देश में ज्यादातर स्कूल खुले जहां सुबह की सभा में मौन रखकर मृतकों को याद किया गया। इस्लामाबाद और रावलपिंडी सहित विभिन्न शहरों में लोगों ने हमले की निंदा करने और पीड़ित परिजनों के प्रति एकजुटता व्यक्त करने के लिए मोमबत्ती जुलूस निकाला।

सभी तबकों के लोगों ने हमले की निंदा की और राजनीतिक नेताओं ने भी आतंकवाद के खिलाफ खड़े होने के लिए एकजुटता दिखाई। नमाज-ए-जनाजा में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। तालिबान ने कहा कि यह हमला अफगानिस्तान की सीमा से सटे उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में उनके ठिकानों पर सैन्य अभियान का बदला है। हमले की जिम्मेदारी लेने वाले तहरीक ए तालिबान के करीबी सहयोगियों ने भी इस कृत्य की निंदा की है। अफगान तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने एक बयान में कहा कि उनके संगठन की पीड़ितों के प्रति सहानुभूति है। इन आतंकवादियों ने पाकिस्तान में हमलों पर इसके पहले कभी-कभार ही बयान जारी किया है। मुल्ला फजलुल्ला के नेतृत्व वाले पाकिस्तान तालिबान के आतंकवादी अफगान तालिबान के प्रमुख मुल्ला उमर को अपना सर्वोच्च नेता मानते हैं।

Pakistan in Shock तालिबान के आत्मघाती हमले में 148 से अधिक लोगों के मारे जाने के बाद गहरे शोक में डूबा पाकिस्तान (फोटो: एपी)

 

पेशावर में मंगलवार को एक सैनिक स्कूल पर आतंकवादियों के बर्बर हमले में 132 छात्रों सहित कम से कम 140 लोग मारे गए थे। इस बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल राहील शरीफ तालिबान नेता मुल्ला फजलुल्लाह के प्रत्यर्पण की मांग को लेकर बुधवार को अफगानिस्तान पहुंचे। फजलुल्लाह के समूह ने ही पेशावर में सैनिक स्कूल पर हुए भीषण हमले की जिम्मेदारी ली है।

पाकिस्तान के इतिहास के सबसे भीषण आतंकवादी हमले में मारे गए लोगों की याद में तीन दिन का राष्ट्रीय शोक शुरू होने के बीच शरीफ और अन्य दलों के नेताओं ने अपने कड़वे मतभेद दरकिनार करते हुए स्थिति पर चर्चा करने के लिए यहां मुलाकात की। इसके बाद शरीफ ने कहा कि सभी राजनीतिक दलों ने आतंकवादियों के खिलाफ एक राष्ट्रीय कार्ययोजना तैयार करने और उस पर तत्काल अमल करने का फैसला किया है।

उन्होंने कहा-हम घोषणा करते हैं कि ‘अच्छे’ और ‘खराब’ तालिबान के बीच कोई अंतर नहीं किया जाएगा और हमने संकल्प लिया है कि आखिरी आतंकवादी का खात्मा होने तक आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी। आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई हमारी लड़ाई है और आतंकवाद से मुकाबले के लिए एक समग्र रूपरेखा की जरूरत है।

इससे पहले शरीफ ने कहा कि ना केवल पाकिस्तान और अफगानिस्तान बल्कि इस पूरे क्षेत्र को आतंकवाद मुक्त किया जाना चाहिए। शरीफ का यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन्हें फोन किए जाने के बाद आया है। इस बातचीत के दौरान मोदी ने उनसे कहा था कि आतंकवाद को व्यापक रूप से हराने के लिए भारत और पाकिस्तान को हाथ मिलाना चाहिए।

Pakistan School Attack Students तीन दिन का राष्ट्रीय शोक शुरू हुआ और हादसे में मरने वालों को सामूहिक रूप से दफनाया गया (फोटो: एपी)

 

आर्मी पब्लिक स्कूल में हुए जनसंहार के मद्देनजर सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता करने वाले शरीफ ने कहा-आज की बैठक में आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई की योजना तैयार करने और उस पर तत्काल अमल करने का फैसला किया गया। नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता खुर्शीद शाह और पाकिस्तान तहरीके इंसाफ अध्यक्ष इमरान खान के साथ मीडिया को संबोधित करते हुए शरीफ ने हमले की निंदा की और उसे पाकिस्तान के इतिहास में सबसे दर्दनाक हमला करार दिया। उन्होंने कहा-यह नृशंस घटना बर्बरता का एक उदाहरण है, जिसका उदाहरण इतिहास में नहीं मिल सकता।

हमले के बाद यहां पहुंचे शरीफ ने कहा-हमने सर्वसम्मति से फैसला किया है कि गृह मंत्री चौधरी निसार के नेतृत्व में सभी दलों के सांसदों वाली एक कमेटी एक कार्ययोजना तैयार करेगी जिसे सात दिन के भीतर राष्ट्रीय नेतृत्व को सौंपा जाएगा। इस कमेटी में सशस्त्र बलों, गुप्तचर और राजनीतिक दलों के सदस्य शामिल होंगे। उत्तरी वजीरिस्तान में आतंकवादियों के खिलाफ जारी सैन्य अभियान पर शरीफ ने कहा कि आपरेशन जर्ब-ए-अज्ब सफलतापूर्वक जारी है लेकिन हमने बुधवार को जो फैसला किया है वह इसे लेकर है कि पूरे देश में आतंकवाद से कैसे निपटा जाए। आतंकवादी मामलों में मौत की सजा पर प्रतिबंध हटाने के संबंध में शरीफ ने कहा-हमने प्रस्तावित किया है कि मामलों की सुनवाई में तेजी लाई जानी चाहिए।

शरीफ ने सवाल किया-अगर आतंकवादियों को सजा नहीं होगी तो किसे होगी? न्याय प्रणाली में खामियों को दूर करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण कानूनी कदम उठाए जाएंगे ताकि आतंकवादी उनका इस्तेमाल करके सजा से ना बच निकलें। आतंकवाद को हराने के लिए हमें एक होना होगा। हमारे सशस्त्र बलों ने आतंकवाद को हराने और उनके ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए कई बलिदान दिए हैं। मुझमें विश्वास जताने के लिए मैं राष्ट्रीय नेतृत्व का आभारी हूं। इससे पहले संसदीय नेताओं की बैठक को संबोधित करते हुए शरीफ ने कहा कि देश आतंकवाद के खिलाफ जेहाद शुरू कर रहा है और इस अभियान को अधूरा नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार ने आतंकवादियों के साथ बातचीत सभी दलों से आम सहमति बनाने के बाद शुरू की थी।

उन्होंने कहा कि आतंकवादियों के हठ के कारण सरकार के पास उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचा था। शरीफ ने कहा कि हाल में अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी की पाकिस्तान यात्रा से आतंकवाद को हराने में संयुक्त प्रयासों का एक नया युग शुरू हुआ है।

वहीं, आतंकी हमले में घायल सात और लोगों ने बुधवार को दम तोड़ दिया जिससे इस हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 148 हो गई। इस घटना में अब तक मरने वालों में ज्यादातर बच्चे हैं। सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल असीम सलीम बाजवा ने कहा कि कुछ वयस्कों की अस्पताल में मौत हो गई, जिससे मरने वालों की कुल संख्या 148 हो गई। सेना ने बुधवार को मीडियाकर्मियों को उस सभागार सहित स्कूल परिसर का दौरा कराया जहां छात्रों को प्राथमिक व मेडिकल आपातकालीन सेवाओं के बारे में प्रशिक्षण दिया जा रहा था। सुनसान पड़ी पूरी इमारत के फर्श पर हर तरफ मासूमों के खून के धब्बे फैले थे जो दर्दनाक हमले की कहानी बयां कर रहे थे। मीडियाकर्मियों को स्कूल बैग, जूते, हैंड बैग, मोबाइल फोन और पीड़ितों का अन्य सामान दिखाया गया। बाजवा ने कहा कि आतंकवादियों ने सभागार में करीब सौ छात्रों की हत्या की।

 

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