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नरेंद्र मोदी इजरायल यात्रा: हैफा कब्रिस्तान भी जाएंगे पीएम, भारतीय जवानों से जुड़ी इस जगह का क्या है खास महत्व, जानिए

इस जंग में तुर्क, मशीन गनों और आर्टिलरी जैसे बड़े हथियारों से लैस थे, जबकि कैवलरी ब्रिगेड के जवानों ने महज भाले और तलवारों के दम पर उन्हें शिकस्त दी थी।

ब्रिटिश भारत कैवलरी ब्रिगेड के जवान हैफा में फतेह हासिल करने के बाद। (Source: Wikimedia Commons)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (4 जुलाई) को अपनी इजरायल यात्रा के लिए रवाना होंगे। विदेश यात्रा से दोनों मुल्कों के बीच राजनयिक संबंध मजबूत होने की उम्मीद है। नरेंद्र मोदी देश के पहले प्रधानमंत्री होंगे जो इजरायल जाएंगे। वहीं यात्रा के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी हैफा के भारतीय कब्रिस्ता पर जाकर शहीद भारतीय जवानों को श्रद्धांजलि भी देंगे। हैफा के भारतीय कब्रिस्तान का इतिहास काफी खास है। दरअसल यह कब्रिस्तान प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान शहीद हुए भारतीय घुड़सवार दस्ते के जवानों को श्रद्धांजलि देने और उनके योगदान को याद रखने का एक अहम स्मारक है। 1918 में हैफा को आजादी दिलाने में भारतीय घुड़सवार दस्ते (कैवलरी ब्रिगेड) के जवानों का अहम योगदान रहा था। हैफा का भारतीय कब्रिस्तान उन्हीं की याद से जुड़ा एक अहम स्मारक है।

हर साल 23 सितंबर को कैवलरी ब्रिगेड के जवानों की शहादत की याद में भारतीय सेना “हैफा डे” मनाती है। 1922 में दिल्ली में तीन मूर्ति स्मारक भी उन्हीं कैवलरी ब्रिगेड के जवानों के योगदान को याद रखने के लिए बनाया गया था। हैफा की आजादी की लड़ाई में जोधपुर, हैदराबाद और मैसूर रियासत की कैवलरी ब्रिगेड के जवानों ने अपना पराक्रम दिखाया था। 23 सितंबर, 1918 को ब्रिटिश भारत की कैवलरी ब्रिगेड ने शहर पर कब्जा जमाए हुए ओटोमन तुर्कों पर हमला कर दिया था। इस लड़ाई में तुर्की की सेना मशीन गनों और आर्टिलरी जैसे बड़े हथियारों से लैस थी, जबकि कैवलरी ब्रिगेड के जवानों ने महज भाले और तलवारों के दम पर उन्हें शिकस्त दी थी। जवानों ने बड़ी बंदूकों का सामना अपनी तलवार और भालों से ही किया था और फतेह हासिल की थी।

वीडियो (Source: DD News/YouTube)

जंग में कैवलरी ब्रिगेड के 8 जवान शहीद हुए थे और 34 घायल हुए थे। हैफा के कब्रिस्तान में प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान शहीद हुए 49 राष्ट्रमंडलों के जवानों की कब्र हैं। ब्रिगेड के जवानों के योगदान के बारे में ऑफिशियल हिस्ट्री ऑफ द वार (जंग के दस्तावेज से संबंधित एक सीरीज) में लिखा गया है, “घुड़सवार सेना ने असाधारण पराक्रम दिखाते हुए यह जंग लड़ी। मशीन गनों की गोलियां भी घुड़सवार दस्ते को रोकने में नाकाम रही।”

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