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संराष्ट्र में सुधार अनिवार्य है: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 70 साल पुराने संयुक्त राष्ट्र और उसकी महत्त्वपूर्ण इकाई सुरक्षा परिषद में सुधार की जोरदार वकालत करते हुए इस वैश्विक संस्थान..

Author संयुक्त राष्ट्र/न्यूयॉर्क | September 26, 2015 3:54 PM
इसके साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित देशों से कहा कि विकास और जलवायु परिवर्तन की अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को वे पूरा करें।(फोटो-एपी)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 70 साल पुराने संयुक्त राष्ट्र और उसकी महत्त्वपूर्ण इकाई सुरक्षा परिषद में सुधार की जोरदार वकालत करते हुए इस वैश्विक संस्थान के मंच से कहा कि इसकी विश्वसनीयता और औचित्य बनाए रखने के लिए ऐसा करना अनिवार्य है। साथ ही उन्होंने विकसित देशों से कहा कि विकास और जलवायु परिवर्तन की अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को वे पूरा करें।

मोदी ने शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास सम्मेलन 2015 को संबोधित करते हुए कहा, सुरक्षा परिषद समेत संयुक्त राष्ट्र में सुधार अनिवार्य है ताकि इसकी विश्वसनीयता और औचित्य बना रहे सके। साथ ही हम ऐसे विश्व का निर्माण कर सकें जहां प्रत्येक जीव मात्र सुरक्षित महसूस कर सके, सभी को अवसर और सम्मान मिले।

जलवायु परिवर्तन के विषय को महत्त्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा, मुझे विश्वास है कि विकसित देश विकास और जलवायु परिवर्तन के विषयों पर अलग-अलग मदों में अपनी वित्तीय प्रतिबद्धताओं को पूरा करेंगे।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण की शुरुआत राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के इस विचार से शुरू की, ‘आधुनिक महामानव महात्मा गांधी ने कहा था कि हम सब उस भावी विश्व के लिए भी चिंता करें जिसे हम अभी देख नहीं पाए।’ साथ ही उन्होंने जनसंघ के चिंतक और भाजपा की विचारधारा के जनक माने जाने वाले पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जिक्र करते हुए कहा कि उनके विचारों में अंत्योदय यानी पंक्ति में खडेÞ अंतिम व्यक्ति की चिंता का भाव था और संयुक्त राष्ट्र के एजंडे का भाव भी यही है।

प्रधानमंत्री ने कहा, आज 70 वर्ष की आयु वाले संयुक्त राष्ट्र में हम सबसे अपेक्षा है कि हम अपने विवेक, अनुभव, उदारता, सहृदयता, कौशल और तकनीक के माध्यम से सभी चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर सकें। उन्होंने कहा कि 70 साल पहले जब एक भयानक विश्व युद्ध का अंत हुआ था तब इस संगठन के रूप में नई आशा ने जन्म लिया था। आज हम फिर मानवता की नई दिशा तय करने के लिए यहां एकत्रित हुए हैं। मैं इस महत्त्वपूर्ण शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए महासचिव को हृदय से बधाई देता हूं।

मोदी ने कहा कि आज भी जैसा कि हम देख रहे हैं कि दूरी के कारण चुनौतियों से छुटकारा नहीं है। सुदूर देशों में चल रहे संघर्ष और अभाव की छाया से भी वह उठ खड़ी हो सकती है। समूचा विश्व एक दूसरे से जुड़ा है, एक दूसरे पर निर्भर है और एक दूसरे से संबंधित है। इसलिए हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को भी पूरी मानवता के कल्याण को अपने केंद्र में रखना होगा।

उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि हम सब गरीबी से मुक्त विश्व का सपना देख रहे हैं। हमारे निर्धारित लक्ष्यों में गरीबी उन्मूलन सबसे उपर है क्योंकि आज दुनिया में 1.3 अरब लोग गरीबी की दयनीय जिंदगी जीने के लिए मजबूर हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि हमारे सामने प्रश्न केवल यह नहीं है कि गरीबों को आवश्यकताओं को कैसे पूरा किया जाए , और न ही यह केवल गरीबों के अस्तित्व और सम्मान तक ही सीमित प्रश्न है। साथ ही यह हमारी नैतिक जिम्मेदारी मात्र है, ऐसा मानने का भी सवाल नहीं है । अगर हम सबका साझा संकल्प है कि विश्व शांतिपूर्ण हो, व्यवस्था न्यायपूर्ण हो और विकास सतत हो, तो गरीबी के रहते यह कभी भी संभव नहीं होगा। इसलिए गरीबी को मिटाना यह हम सबका परम दायित्व है।

खुले हैं भारत में कारोबार के रास्ते: इससे पहले न्यूयॉर्क में गुरुवार को अमेरिका में कारोबारी प्रमुखों ने होटल वाल्डोर्फ एस्टोरियो में दिन भर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मोदी ने उन्हें आश्वस्त किया भारत में कारोबार को लेकर जताई जा रही उनकी चिंता का खयाल रखा जाएगा। साथ ही भारत के व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम की ओर बढ़ते कदमों के बीच मोदी ने अमेरिकी रक्षा क्षेत्र के कारपोरेट दिग्गजों को भारत में निर्माण के लिए आमंत्रित किया है।

मोदी से मुलाकात के दौरान कारोबारी प्रमुखों ने भारत में लालफीताशाही, कारधान कानून, और ढांचागत विकास की मंद गति को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। प्रधानमंत्री ने फार्च्यून 500 कंपनियों के 50 से अधिक मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ रात्रिभोज किया और यह बात दोहराई कि भारत में कारोबार के रास्ते खुले हैं। इस रात्रिभोज का आयोजन प्रतिष्ठित फॉर्च्यून पत्रिका ने किया था और इसमें करीब 47 शीर्ष अमेरिकी मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल हुए।

प्रख्यात शेफ विकास खन्ना ने इस अवसर के लिए खास तौर पर ऑर्गेनिक भोजन तैयार किया था। भोज के दौरान मोदी ने लगातार इस बात पर जोर दिया कि भारत में कारोबार के रास्ते खुले हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दोनों हाथों से उनका (मुख्य कार्यकारी अधिकारियों का) स्वागत करने के लिए तैयार है और दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में आने और वहां निवेश करने के लिए यह सही समय है। फॉर्च्यून के संपादक एलेन मरे ने भी चर्चा में हिस्सा लिया। इस मौके पर मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को चंदन और केसर का शरबत, पनीर रवियोली, ठंडाई चिकन, मिजोरम ब्लैक राइस खिचड़ी, केसर शीरमल, आम-अदरक का सूप और कोकोनट राइस क्रीम ब्रूली आदि व्यंजन पेश किए गए।

रात्रि भोज में उपस्थित फॉर्च्यून कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों में लॉकहीड मार्टिन के अध्यक्ष और सीईओ मर्लिन ह्यूसन, फोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ मार्क फील्ड्स, आइबीएम के अध्यक्ष गिनी रोमेटी, पेप्सी की प्रमुख इंदिरा नूयी और डाव केमिकल के अध्यक्ष एंड्रयू लिवेरिस शामिल थे।

सिटीग्रुप के अध्यक्ष माइकल ओ’नील, मास्टरकार्ड के सीईओ अजय बांगा, बोइंग इंटरनेशनल के अध्यक्ष मार्क एलेन, गोल्डमैन सैशे के अध्यक्ष गैरी कॉन, ब्लैकस्टोन के अध्यक्ष हैमिल्टन जेम्स, सैनडिस्क के सह संस्थापक संजय मेहरोत्रा, हरमन इंटरनेशनल के अध्यक्ष दिनेश पैलातल और टाइम्स इंक के सीईओ जोए रिप भी इस मौके पर उपस्थित थे।

रात्रि भोज के आरंभ में विकास स्वरूप ने ट्वीट किया कि न्यूयॉर्क में मोदी का पहला आधिकारिक दिन शुरू हुआ और कारोबारी मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ खत्म हुआ। मुख्य कार्यकारी अधिकारियों ने रात्रिभोज से पहले मोदी के साथ सामूहिक तस्वीर खिंचवाई।

एक प्रवक्ता ने बताया कि मोदी ने कंपनियों के सीईओ से कहा कि मूल रूप से वे विभिन्न नियंत्रणों को खत्म करने में विश्वास रखते हैं। सरकार को निजी क्षेत्र को विकसित होने का मौका देना चाहिए और वह विश्वसनीय, पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन के पक्ष में हैं।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि मुख्य कार्यकारियों ने प्रधानमंत्री की विकास की अवधारणा और पिछले 15 साल में हुई प्रगति की प्रशंसा की। इसमें कहा गया, प्रधानमंत्री ने विश्वसनीय, पारदर्शिता और जवाबदेह संचालन के प्रति प्रतिबद्धता जताई। मुख्य कार्यकारियों ने मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया और स्मार्ट सिटीज की पहलों के लिए समर्थन जाहिर किया।

एक प्रवक्ता के अनुसार, मुख्य कार्यकारियों को लगा कि पिछले साल भर में काफी प्रगति हुई है। लेकिन इसका गलत तरीके से आकलन और प्रचार किया गया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक रुझान के परिप्रेक्ष्य में भारत निश्चित तौर पर नए अवसर प्रदान करने के दौर में है जिसमें भारत की अपनी विकास संबंधी जरूरतों और प्राथमिकताओं से जुड़े मौके भी शामिल हैं।

रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ का दिया न्योता : भारत के व्यापक रक्षा आधुनिकीकरण कार्यक्रम की ओर बढ़ते कदमों के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिकी रक्षा क्षेत्र के कॉरपोरेट दिग्गजों को भारत में निर्माण के लिए आमंत्रित किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, रक्षा क्षेत्र में प्रधानमंत्री शुरू से ही कह रहे हैं कि हमारी शीर्ष प्राथमिकता है कि रक्षा निर्माण भारत में होना चाहिए। प्रधानमंत्री के इस संदेश से लोकहिड मार्टिन की अध्यक्ष मार्लिन हेवसन और अन्य कॉरपोरेट प्रमुखों को अवगत कराया गया, जब उन सबसे विभिन्न अवसरों पर मुलाकात हुई।

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