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विवेकानंद ने की थी ”वन एशिया” की कल्पनाः पीएम मोदी

मोदी ने यहां स्वामी विवेकानंद की एक प्रतिमा का अनावरण करने के बाद कहा कि स्वामी विवेकानंद ने 100 साल से भी पहले ‘वन एशिया’ की अवधारणा प्रस्तुत की थी, जिस पर आज जोर-शोर से चर्चा हो रही है।

Author कुआलालांपुर | November 23, 2015 2:15 AM
(Photo-PTI)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि इन दिनों ‘वन एशिया’ अवधारणा को स्वामी विवेकानंद ने आज से 100 साल पहले ही पेश कर दिया था। मोदी ने यहां स्वामी विवेकानंद की एक प्रतिमा का अनावरण करने के बाद कहा कि स्वामी विवेकानंद ने 100 साल से भी पहले ‘वन एशिया’ की अवधारणा प्रस्तुत की थी, जिस पर आज जोर-शोर से चर्चा हो रही है।

उन्होंने कहा कि आज वन एशिया की चर्चा आर्थिक और राजनीतिक कारणों से हो रही है, जबकि 100 वर्ष पहले आध्यात्मिक संयोग के आधार पर विवेकानंद ने इसे आगे बढ़ाया था। एशिया की समस्याओं का समाधान विवेकानंद के संदेशों में निहित है। मोदी ने कहा कि अगर हम विवेकानंदजी की एक बात पर भी अमल करते हैं तो आने वाली शताब्दी के लिए कुछ न कुछ देकर ही जाएंगे। उन्होंने कहा कि आज आतंकवाद, जलवायु संकट, ग्लोबल वार्मिंग की चर्चा हो रही है। लेकिन हमारी ही धरती से महात्मा बुद्ध ने शांति, अहिंसा का संदेश दिया था।

मोदी ने कहा कि जब आतंकवाद की बात आती है तब बुद्ध, विवेकानंद के संदेशों में इसका समाधान भी है। इसमें कहीं भी संघर्ष की बात नहीं है और जब संघर्ष की बात न हो तब हिंसा और आतंक हो ही नहीं सकता है। उन्होंने कहा कि आज ग्लोबल वार्मिंग की बात हो रही है, लेकिन हम उस धरती से हैं जहां पौधे में भी परमात्मा को देखा गया है। हम प्रकृति के शोषण के कभी पक्षकार नहीं रहे हैं। हम प्रकृति के साथ सामंजस्य बना कर चलने वाले लोग हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि विवेकानंद हमारे मन और हमारी आत्मा में बसे हैं जिन्होंने जनसेवा को प्रभु सेवा बताया था। वेद से विवेकानंद तक सब हमारी सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक हैं। सत्य की खोज में विवेकानंद और रामकृष्ण परमहंस ने हाथ मिलाया।

भारत की आत्मा की पहचान बताते हुए मोदी ने कहा कि विवेकानंद की शिक्षाओं से भारत को अपनी विकास यात्रा आगे बढ़ाने में मदद मिली। उपनिषद से उपग्रह हमारी विकास यात्रा के प्रतीक है। मोदी ने यहां स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण किया। और उन पर एक पुस्तक का लोर्कापण किया।
योग का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आज विश्व योग के प्रति आकर्षित हुआ है, लोग तनाव मुक्त जीवन जीने को उन्मुख हुए हैं। इसका रास्ता योग में नजर आता है।
संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को योग दिवस घोषित किए जाने के संदर्भ में उन्होंने कहा कि अब हमारे सामने चुनौती इस बात की नहीं है कि हम दुनिया को योग के बारे में बताये, बल्कि आज दुनिया को अच्छे योग शिक्षक उपलब्ध कराने की एक बड़ी चुनौती है ताकि सही अर्थो में योग की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

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