PM Modi Indonesia Visit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को घोषणा की कि वे इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो के साथ मिलकर योग्याकार्ता में 1000 साल पुराने प्रम्बानन मंदिर के संरक्षण प्रोजेक्ट की शुरुआत करेंगे। आइए अब जानते हैं कि इस मंदिर की क्या खासियत है।

प्रम्बानन मंदिर 9वीं सदी में लगभग 850 ईस्वी में बनाया गया था। इसे संजया राजवंश (एक हिंदू राजवंश) के राजा राकाई पिकाटन ने बनवाया था, जिन्होंने प्राचीन मतारम साम्राज्य पर शासन किया था। इसका मूल संस्कृत नाम ‘शिवगृह’ है यानी इसका मतलब है शिव का घर। यह मंदिर हिंदू धर्म के तीन मुख्य देवताओं की पूजा की जगह है। शिव मंदिर (बीच में, सबसे ऊंचा), विष्णु मंदिर (दक्षिण में) और ब्रह्मा मंदिर (उत्तर में)।

हिंदुओं के लिए आध्यात्मिक केंद्र

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे ऊंचे मंदिर (47 मीटर) में मुख्य देवता के रूप में शिव की स्थापना के साथ प्रम्बानन प्राचीन मतारम साम्राज्य में हिंदुओं के लिए आध्यात्मिक केंद्र बन गया। पूरे साम्राज्य से पुजारी, कुलीन और आम लोग यहां शिवरात्रि समारोह और अन्य धार्मिक त्योहारों जैसे बड़े धार्मिक आयोजन करने आते थे।

इस बात की पुष्टि 856 ईस्वी के ‘शिवगृह शिलालेख’ से होती है, जिसमें शिव मंदिर के निर्माण का उल्लेख है। इस द्वीप समूह में हिंदू धर्म के केंद्र के रूप में प्रम्बानन मंदिर प्राचीन मतारम साम्राज्य (9वीं से 10वीं शताब्दी ईस्वी) के दौरान हिंदू धार्मिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक गतिविधियों के केंद्र के तौर पर अपनी अहम भूमिका को दर्शाता है।

माउंट मेरू की तर्ज पर डिजाइन किया गया

प्रम्बानन मंदिर परिसर को माउंट मेरू की तर्ज पर डिजाइन किया गया था। आज, प्रम्बानन मंदिर इंडोनेशिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है। इसके निर्माण का उद्देश्य बौद्ध प्रभुत्व के दौर के बाद मध्य जावा में हिंदू धर्म को एक प्रमुख शक्ति के रूप में फिर से स्थापित करना था। यह राजा की शक्ति, एकता और वैधता का प्रतीक बन गया, जिन्हें देवताओं का अवतार माना जाता था। इसलिए, प्रम्बानन साम्राज्य की धार्मिक-राजनीतिक शक्ति का मुख्य केंद्र बन गया।

प्रम्बानन मंदिर की रेलिंग पर उकेरी गई नक्काशी

प्रम्बानन मंदिर की रेलिंग पर उकेरी गई नक्काशी केवल सजावट के लिए नहीं थी, बल्कि शिक्षा और हिंदू शिक्षाओं के प्रसार का एक माध्यम भी थी। ये नक्काशीदार चित्र दो महान हिंदू महाकाव्यों रामायण और महाभारत की कहानियां बताते हैं।

कलाकारों, कवियों और पुजारियों ने इन नक्काशीदार चित्रों का इस्तेमाल ज्यादातर अनपढ़ लोगों को धर्म के मूल्यों और आदर्श जीवन शैली के बारे में सिखाने के लिए किया। दूसरे शब्दों में, प्रम्बानन पत्थर की लाइब्रेरी और धार्मिक शिक्षा के केंद्र, दोनों के तौर पर काम करता था।

इसकी ऊंची बनावट और रामायण की कहानी बताने वाली नक्काशीदार कलाकृतियां इसे प्राचीन वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना बनाती हैं। हर रात, मंदिर परिसर में रामायण बैले का मंचन किया जाता है। प्रम्बानन मंदिर की ऊंची और पतली बनावट ने बाद में बनने वाले हिंदू मंदिरों के लिए एक मॉडल या मानक का काम किया।

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