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बिलावल भुट्टो जरदारी सामने लाए पाकिस्तान का असली खौफ, बोले- नरेंद्र मोदी ने JK छीना, अब मुजफ्फराबाद बचाने का डर

सबसे खास बात है कि इमरान खान की भारत को किनारे करने की लाख कोशिश के बाद भी वह इसमें नाकाम हुआ। ऐसा इसलिए, क्योंकि सोमवार को वह कश्मीर के मसले पर वैश्विक मंच जी 7 सम्मेलन के दौरान एक बैठक में अलग-थलग पड़ गया।

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भारत और पाकिस्तान के तल्ख रिश्तों के बीच मंगलवार (27 अगस्त, 2019) को पाकिस्तानी पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी अपने देश के वजीर-ए-आजम इमरान खान पर ही जमकर बरसे। पीएम पर जुबानी हमले के साथ वह अपने मुल्क का असली खौफ भी सामने ले आए।

जेल में बंद पिता और पूर्व राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मिलकर आने के बाद उन्होंने कहा कि आप (पीएम) सोते रहे और नरेंद्र मोदी जम्मू व कश्मीर छीन ले गए। कश्मीर पर पहले इस्लामाबाद (पाक) की नीति होती थी कि हम भारत से श्रीनगर कैसे लें, पर अब हमें यह सोचना पड़ रहा है कि आखिर मुजफ्फराबाद को भारत से कैसे बचाया जाए। इमरान खान की नाकाम सरकार इस सब के लिए जिम्मेदार है।

पत्रकारों को उन्होंने आगे बताया- आपने लोकतंत्र के साथ जो किया, हमने उसे झेला। आपने अर्थव्यवस्था तबाह कर डाली, हमने उसे भी सहा। आप सोते रहे और बीच में एक बार जगे भी तो विपक्षियों को गिरफ्तार करने में जुट गए। आप सोते रहे और मोदी (भारतीय पीएम) कश्मीर छीन ले गए।

बकौल जरदारी, “पहले हमारी कश्मीर नीति थी कि आखिर कैसे श्रीनगर को हासिल किया जाए, पर पीएम इमरान खान के नेतृत्व/शासन में उनके लालच और नाकामी के चलते हमारी नीति बदल गई। अब हमारी पॉलिसी यह है कि आखिर हम मुजफ्फराबाद (पाक अधिकृत कश्मीर की राजधानी) को कैसे बचाएं।” इतना ही नहीं, भुट्टो ने इमरान खान को ‘सेलेक्टेड पीएम’ बताया। कहा कि देश की जनता अब ‘सेलेक्टेड’ और ‘सेलेक्टर्स’ से जवाब मांग रही है।

सबसे खास बात है कि इमरान खान की भारत को किनारे करने की लाख कोशिश के बाद भी वह इसमें नाकाम हुआ। ऐसा इसलिए, क्योंकि सोमवार को वह कश्मीर के मसले पर वैश्विक मंच जी 7 सम्मेलन के दौरान एक बैठक में अलग-थलग पड़ गया।

हुआ यूं कि उस दौरान मुख्य कार्यक्रम से इतर मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मिले थे, तभी ट्रंप अपने उस पुराने ऑफर पर पलटी मार गए जिसमें उन्होंने कश्मीर मुद्दे पर भारत-पाक के बीच मध्यस्थता की पेशकश की थी। हालांकि, हालिया मुलाकात में मोदी ने भी साफ कर दिया था कि यह मामला द्विपक्षीय है। भारत-पाकिस्ता इसे निपटा लेंगे, कोई तीसरा देश इसके लिए कष्ट न करे।

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