इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने सेक्स एजुकेशन को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। अब इटली के स्कूलों में सेक्स एजुकेशन से जुड़े पाठ्यक्रम पढ़ाने से पहले छात्रों के माता-पिता की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
इटली के शिक्षा मंत्री ज्यूसेप्पे वाल्दितारा के इस प्रस्तावित बिल को संसद से अंतिम मंजूरी मिल गई है। हालांकि, इस फैसले के बाद इटली की राजनीति गरमा गई है। विपक्षी दलों का आरोप है कि इस तरह के फैसले छात्रों को जरूरी जानकारी से वंचित कर सकते हैं।
विपक्ष क्यों भड़का हुआ है?
विपक्षी नेता एंजेलो बोनेली ने एक बयान में कहा कि सेक्स एजुकेशन पढ़ाने के लिए माता-पिता की अनुमति लेना ऐसा है, जैसे स्कूल में साहित्य या इतिहास पढ़ाने से पहले परिवारों से इजाजत मांगी जाए। उनके मुताबिक, यह सरकारी स्कूलों की शिक्षा देने की मूल जिम्मेदारी के खिलाफ है।
हालांकि, शिक्षा मंत्री ज्यूसेप्पे वाल्दितारा अपने फैसले पर कायम हैं। उनके मुताबिक, इस कदम से बच्चों को “जेंडर प्रोपेगेंडा” से पैदा होने वाले भ्रम से बचाया जा सकेगा। साथ ही, यह सिद्धांत भी मजबूत होगा कि बच्चों की शिक्षा में माता-पिता की महत्वपूर्ण भूमिका और जिम्मेदारी होती है।
इटली सरकार का नया फैसला
इटली सरकार के नए फैसले के तहत यदि कोई स्कूल सेक्स एजुकेशन से जुड़ा कोई कार्यक्रम या पाठ्यक्रम छात्रों को पढ़ाना चाहता है, तो उसे कम से कम सात दिन पहले परिवारों को इसकी जानकारी देनी होगी।
जानकारी के लिए बता दें कि इटली में स्कूलों में सेक्स एजुकेशन अनिवार्य नहीं है, जबकि अधिकांश यूरोपीय देशों में यह शिक्षा व्यवस्था का नियमित हिस्सा है। एक सर्वे के मुताबिक, इटली में केवल 47 प्रतिशत किशोरों को ही स्कूलों में सेक्स एजुकेशन की पढ़ाई मिल पाती है।
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