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UN में पाकिस्तान को फिर झटका, J&K मुद्दे पर चर्चा की मांग खारिज, चीन छोड़ किसी ने न दिया साथ

भारत ने भी पाकिस्तान के इस कदम को खारिज कर दिया। नई दिल्ली ने इसके साथ ही कहा कि इस्लामाबाद को दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने के लिए आतंकवादियों को शरण देने जैसे मुद्दों पर पहले ध्यान केंद्रित करना होगा।

Author नई दिल्ली | Updated: January 16, 2020 8:27 AM
तस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

पाकिस्तान ने बुधवार (15 जनवरी, 2020) को एक बार फिर चीन की मदद से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में कश्मीर मुद्दा उठाने की कोशिश की, मगर उसकी यह कोशिश इस बार भी नाकाम रही। क्योंकि चीन के अलावा परिषद के सभी सदस्यों ने पाकिस्तान की मांग का विरोध किया। भारत ने भी पाकिस्तान के इस कदम को खारिज कर दिया। नई दिल्ली ने इसके साथ ही कहा कि इस्लामाबाद को दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने के लिए आतंकवादियों को शरण देने जैसे मुद्दों पर पहले ध्यान केंद्रित करना होगा।

फ्रांसीसी कूटनीतिक सूत्रों ने बताया कि फ्रांस ने इस शक्तिशाली संस्था में एक बार फिर कश्मीर मुद्दा उठाने का विरोध किया, जैसा कि उसने पहले के एक मौके पर किया था। दरअसल अफ्रीकी देशों से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के लिए सुरक्षा परिषद की बंद कमरे में बैठक बुलाई गई। चीन ने ‘कोई अन्य कामकाज बिंदु’ के तहत कश्मीर मुद्दे पर चर्चा का अनुरोध किया। सूत्रों ने बताया कि फ्रांस का रुख नहीं बदला है और यह बहुत स्पष्ट है कि–कश्मीर मुद्दे का हल अवश्य ही द्विपक्षीय तरीके से किया जाए। यह बात कई मौकों पर कही गई है और संरा सुरक्षा परिषद् में साझेदारों से इसे दोहराता रहेगा।

गौरतलब है कि पिछले महीने फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन और रूस ने यूएनएससी की बंद कमरे में हुई एक बैठक में कश्मीर मुद्दा पर चर्चा कराने की चीन की कोशिश नाकाम कर दी थी। जम्मू कश्मीर का भारत द्वारा पुनर्गठन किया जाना चीन को नागवार गुजरा है।

इसी बीच रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (यूएनएससी) में भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का भी पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि नई दिल्ली वैश्विक प्रभाव रखने वाले नये केंद्रों में शामिल है। रूसी विदेश मंत्री ने अमेरिका की आलोचना भी की। इसके पीछे उन्होंने यह तर्क दिया कि वह अपने स्व हित में नियम आधारित वैश्विक व्यवस्था के बारे में चुनिंदा तरीके से बात करते हुए वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का असम्मान कर रहा।

लावरोव ने अमेरिका सर्मिथत हिंद-प्रशांत रणनीति का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मौजूदा ढांचे को नया आकार देने और क्षेत्र में आसियान केंद्रित आमराय से दूर जाने की कोशिश है। लावरोव ने कहा, ‘‘हिंद-प्रशांत रणनीति के नाम से एक नई अवधारणा बनाई गई, जिसे अमेरिका, आस्ट्रेलिया, जापान ने पहले पहल शुरू किया…जब हम इसकी पहल करने वालों से यह पूछते हैं कि हिंद-प्रशांत रणनीतियों और आसियान केंद्रित क्षेत्रीय सहयोग के बीच क्या अंतर है, वे कहते हैं कि हिंद-प्रशांत कहीं अधिक खुला, अधिक लोकतांत्रिक है।’’ (भाषा इनपुट)

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