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इमरान के शासन में चरम पर पहुंची आर्थिक मंदी, एक डॉलर की कीमत पाकिस्तानी 150 रुपए के पार

पीएम बनने से पहले इमरान खान ने मुल्क की जनता से वादा भी किया था कि वह मर जाएंगे मगर आईएमएफ से मदद मांगने नहीं जाएंगे।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान।

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) प्रमुख इमरान खान के पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनने के बाद से मुल्क लगातार आर्थिक मंदी के दलदल में फंसता जा रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत लगातार निचले स्तर पर पहुंच रही है। शुक्रवार (17 मई, 2019) के दिन पाकिस्तानी रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर चला गया। न्यूज वेबसाइड द डॉन में छपी खबर के मुताबिक यहां एक डॉलर की कीमत 150 रुपए के पार पहुंच गई। शेयर बाजार में भी भारी गिरावट देखने को मिली है। खबर है कि शेयर बाजार में रिकॉर्ड गिरावट उस वक्त देखने को मिली जब केंद्र सरकार ने माना कि अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 6 अरब रुपए का लोन लेने पर सहमति बनी है। बता दें कि गुरुवार को पाकिस्तानी रुपया 3.6 फीसदी की गिरावट के साथ एक डॉलर के मुकाबले 146.2 रुपए पर बंद हुआ। रुपए में शुक्रवार को और गिरावट आई। डिलरों ने कहा, ‘डॉलर में इंटरबैंक बाजार में 149.50 रुपए और खुले बाजार में 150 रुपए के पार बिक्री की।’

कराची स्थित टॉप लाइन सिक्योरिटी में रिसर्च डायरेक्टर और मुख्य अर्थशास्त्री साद हाशमी ने बताया, ‘यह गिरावट बाजार आधारित विनिमय दर के लिए आईएमएफ की स्थिति को दर्शाती है, जो अब केंद्रीय बैंक द्वारा सीमित हस्तक्षेप देखेंगे।’ शुक्रवार को शेयर बाजार में भी खासी गिरावट रही। सुबह 11:15 बजे बेंचमार्क केएसई 2.4 फीसदी के साथ 100 अंक नीचे आ गया। हालांकि लोन को लेकर सरकार और आईएमएफ के बीच क्या सौदा हुआ इसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से अभी किसी को नहीं मालूम। वहीं रुपए में कमजोरी पर गुरुवार को स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) ने एक बयान जारी कर कहा कि भारी गिरावट विदेशी मुद्रा बाजार में मांग और आपूर्ति की स्थिति को दर्शाती है और बाजार के असंतुलन को सही करने में मदद करेगी।

बता दें कि रुपए में कमजोरी सरकार के लिए एक राजनीतिक समस्या प्रस्तुत करता है, जो पिछले साल एक नई सामाजिक कल्याण प्रणाली बनाने का वादा करके सत्ता में आई थी। पीएम बनने से पहले इमरान खान ने मुल्क की जनता से वादा भी किया था कि वह मर जाएंगे मगर आईएमएफ से मदद मांगने नहीं जाएंगे। गौरतलब है कि पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था मंदी में डूबी पड़ी है, जो तेजी से बढ़ती जा रही है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि सरकार अपने बजटीय घाटे को कम करने के लिए टैक्स की दरों को बढ़ाएगी या खर्च में भारी कटौती करेगी।

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