मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के युद्ध के बीच खबर आ रही है कि 24 घंटे के भीतर अमेरिका और ईरान पीस डील (शांति समझौता) साइन कर सकते हैं। यह जानकारी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दी है। पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने शनिवार को कहा कि अमेरिका और ईरान, पश्चिम एशिया में महीनों से चल रहे टकराव को खत्म करने के मकसद से सहमत हो गए हैं और अगले 24 घंटों के भीतर इस समझौते पर डिजिटल रूप से साइन होने की उम्मीद है।
अब इस पर ईरान ने इस दावे को लेकर कहा कि समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। इधर अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पाकिस्तानी पीएम के पोस्ट को अपने सोशल मीडियो ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया है।
अगर इस डील पर दोनों देशों की सहमति बन जाती है, तो यह फरवरी में शुरू हुए टकराव के बाद सबसे बड़ी कूटनीतिक कामयाबी हो सकती है। इससे दुनिया भर में तेल सप्लाई के लिए अहम होर्मुज जलमार्ग फिर से खुल सकता है और उस बड़े क्षेत्रीय युद्ध का डर कम हो सकता है, जिसने तेल बाजारों को हिला दिया है और शिपिंग में रुकावट डाली है।
पाकिस्तान ने किया बड़ी कामयाबी का दावा
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान अब समझौते पर हस्ताक्षर करवाने की प्रक्रिया की तैयारी कर रहा है। इसके बाद, अगले सप्ताह तकनीकी स्तर पर बातचीत शुरू होगी, जिसमें समझौते की बारीकियों और ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर चर्चा की जाएगी।
शनिवार को शहबाद शरीफ ने कहा कि शुरुआती समझौते के लिए अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम मसौदे पर सहमति बन गई है। उन्होंने कहा, “अगले 24 घंटों में डिजिटल हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।” साथ ही उन्होंने कहा कि पाकिस्तान दोनों पक्षों के बीच बातचीत को आसान बनाने की कोशिशों में लगा हुआ है।
पाकिस्तानी पीएम ने एक्स पर लिखा, “हम शांति समझौते के पहले से कहीं ज़्यादा करीब हैं। अगले 24 घंटों में इसके फाइनल होने की उम्मीद है, जिसके तुरंत बाद पाकिस्तान शांति समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से हस्ताक्षर करवाने की तैयारी कर रहा है और उसके बाद अगले सप्ताह टेक्निकल लेवल पर बातचीत होगी।”
आगे कहा, “हम बातचीत के दौरान लगातार सहयोग के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान का धन्यवाद करना चाहते हैं। साथ ही इस क्षेत्र में अपने भाइयों के समर्थन के लिए हम उनका दिल से आभार व्यक्त करते हैं। हमें पूरा भरोसा है कि यह ऐतिहासिक शांति समझौता स्थायी शांति के लिए एक मजबूत आधार बनेगा।”
हालांकि, इससे पहले भी जल्द ही कोई बड़ी कामयाबी मिलने की घोषणाएं की गई थीं, लेकिन वे सच नहीं हो पाईं। साथ ही, न तो व्हाइट हाउस और न ही ईरान के नेताओं ने पाकिस्तानी पीएम की बताई समय-सीमा की पुष्टि की है।
क्या-क्या शामिल प्रस्तावित समझौते में है?
शुक्रवार को पत्रकारों को जानकारी देते हुए अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह प्रस्तावित समझौता सबसे पहले दुश्मनी खत्म करने और होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) को फिर से खोलगा और उसके बाद ही अन्य विवादित मुद्दों पर बात की जाएगी।
अधिकारी ने बताया कि समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद के 60 दिनों में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के तकनीकी पहलुओं पर बातचीत की जाएगी। इसमें ईरान के पास मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम (highly enriched uranium) के भंडार को हटाने या नष्ट करने का मुद्दा भी शामिल होगा।
इसे लेकर ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने भी संकेत दिए थे कि परमाणु मुद्दों को बातचीत के अगले चरण में अंतिम रूप दिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इसकी समय-सीमा बढ़ाई जा सकती है।
होर्मुज जलमार्ग मुख्य मुद्दा
इस संघर्ष ने होमुर्ज जलमार्ग से होने वाले शिपिंग को बुरी तरह बाधित किया है, जिससे तेल और गैस की कीमतें बढ़ी हैं और दुनिया में महंगाई को लेकर चिंताएं भी बढ़ गई हैं। ऐसे में प्रस्तावित समझौते का एक मुख्य हिस्सा होर्मुज जलमार्ग से सामान्य आवाजाही को बहाल करना है, जहाँ से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति गुजरती है।
अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि समझौते में होमुर्ज को फिर से खोलने के प्रावधान शामिल हैं, जबकि सैयद अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान ऐसी व्यवस्था चाहता है जिससे ईरान इस रास्ते से गुज़रने वाले जहाजों को दी जाने वाली “सेवाओं” के लिए फीस ले सके। हालांकि यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे अमेरिका और कई अन्य देश अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन मानते हैं।
प्रतिबंधों में ढील की संभावना
बातचीत से जुड़े क्षेत्रीय अधिकारियों ने पत्रकारों को बताया कि समझौते में चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधों में ढील और ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति को जारी करना भी शामिल होने की उम्मीद है।
नाम न बताने की शर्त पर बात की अधिकारियों ने कहा कि दोनों सरकारों की ओर अंतिम मसौदे को मंजूरी मिलने के बाद आने वाले दिनों में औपचारिक हस्ताक्षर का आयोजन हो सकता है।
हालाँकि, अमेरिका और ईरान के अलग-अलग बयानों से पता चलता है कि कुछ सबसे अधिक राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दे अभी भी अनसुलझे हैं।
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