पाकिस्तान के वरिष्ठ नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम (F) के चीफ मौलाना फजलुर रहमान फिर चर्चा में हैं। उन्होंने देश की मिलिट्री लीडरशिप की कड़ी आलोचना की है। मौलाना फजलुर रहमान पाकिस्तान की राजनीति में बड़ा नाम हैं और उनके एक इशारे पर लाखों की भीड़ इकठ्ठा हो जाती है। हाल ही में पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने पाकिस्तानी नागरिकों से मिलिटेंट ग्रुप्स के खिलाफ लड़ाई में मिलिट्री का साथ देने की अपील की थी। इसका मौलाना ने विरोध किया है।

कौन हैं फजलुर रहमान?

मौलाना फजलुर रहमान पाकिस्तान की सियासत में काफी बड़ा नाम है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सत्ता से बाहर फेंकने का श्रेय भी मौलाना को ही जाता है। 2022 में इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट ने ही लाया था, जिसके उसे समय अध्यक्ष मौलाना फजलुर रहमान ही थे।

मौलाना फजलुर रहमान अभी जमीयत उलेमा ए इस्लाम के अध्यक्ष हैं। मौलाना फजलुर रहमान 1988 से 2018 तक लगातार पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में सांसद रहे और उसके बाद 2024 में फिर से चुने गए। मौलाना 2004 से 2007 तक पाकिस्तान की संसद में विपक्ष के नेता भी रह चुके हैं। मौलाना फजल को तालिबान का समर्थक माना जाता है और वह बार-बार उसके समर्थन में आवाज उठाते रहते हैं।

मौलाना ने पाकिस्तान में शरिया लागू करने की भी मांग कर डाली है। मौलाना फजल की पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा समेत कई इलाकों में अच्छी पकड़ मानी जाती है।

आसिम मुनीर को दी चुनौती

मौलाना ने आर्मी लीडरशिप को चुनौती दी कि अगर वे राजनीतिक असर डालना चाहते हैं तो चुनावी राजनीति में आएं। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में रहमान ने कहा कि देश की रक्षा की जिम्मेदारी सरकारी संस्थाओं की है, आम नागरिकों की नहीं।

उन्होंने कहा, “आप अपने खून का एहसान मुझ पर क्यों लुटाते हैं? आप हमारे खून-पसीने से कमाए गए टैक्स से अपनी सैलरी ले रहे हैं, और फिर हमसे मिलिशिया बनाने और हथियारबंद ग्रुप से लड़ने के लिए कहते हैं। मैंने कोई सैलरी नहीं ली है। मैं कोई लश्कर नहीं बनाऊंगा। आप चले जाएंगे, लेकिन आप मेरे देश को आने वाली पीढ़ियों के लिए बदले की भावना की ओर धकेल रहे हैं, इसे हमेशा के लिए हत्या और लूट की ओर धकेल रहे हैं।”

वर्दी उतारो और मैदान में आओ- फजलुर रहमान

आसिम मुनीर पर तंज कसते हुए मौलाना ने उन्हें वर्दी उतारकर चुनाव लड़ने की चुनौती दी। पाकिस्तान की राजनीति में सैन्य दखल का जिक्र करते हुए मौलाना ने कहा, “अगर आप राजनीति करना चाहते हैं, तो वर्दी उतारकर आइए, चुनाव में हिस्सा लीजिए, और यह साफ हो जाएगा कि लोग वर्दी वालों को क्या वोट देते हैं। अभी तो आपका अधिकार है कि आप जिसे चाहें सरकार दें और जिससे चाहें छीन लें।”

मौलाना ने कहा कि अकेले आर्म्ड फोर्सेस बिना बड़े पब्लिक सपोर्ट के आतंकवाद को खत्म नहीं कर सकतीं। रहमान ने जोर देकर कहा कि नागरिकों से मिलिशिया बनाने के लिए कहने से हिंसा और पर्सनल बदले की भावना के लंबे समय तक चलने वाले चक्र को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने तर्क दिया कि काउंटरटेररिज्म सरकार की जिम्मेदारी है।

भारत के हमले को ठहराया सही?

रहमान पहले भी पाक के सैन्य नेतृत्व को घेर चुके हैं। कुछ दिन पहले ही उन्होंने कहा था, “अगर आप यह कहकर अफ़गानिस्तान पर हमला करने को सही ठहराते हैं कि आप वहां अपने दुश्मन को टारगेट कर रहे हैं, तो जब भारत बहावलपुर और मुरीदके (पाकिस्तान के अंदर) में अपने दुश्मन को टारगेट करता है तो आपको एतराज़ क्यों होता है?”

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पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से अब देश के जनसंख्या नियंत्रण प्रयासों का नेतृत्व करने में भूमिका निभाने की उम्मीद है। इससे उनके पोर्टफोलियो में एक और जिम्मेदारी जुड़ जाएगी। पढ़ें पूरी खबर