NSG पर भारत की मजबूत दावेदारी से पाकिस्‍तान चिंतित, कहा- अगर छूट दी तो नतीजा ठीक नहीं होगा

पाकिस्तान की अर्जी को भारत के बराबर ना देखने पर दक्षिण एशिया की सामरिक स्थिरता प्रभावित होगी।

Author December 14, 2016 7:49 PM
bebak bol, column of mukesh bharadwaj, jansatta, india-pakistan, controversies, kashmir, other issuesभारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके समकक्ष नवाज शरीफ। (पीटीआई फाइल फोटो)

पाकिस्तान इस बात को लेकर चिंतित है कि ताकतवर देश एनएसजी में दाखिले की प्रक्रिया से भारत को छूट देने के लिए छोटे देशों पर दबाव डाल सकते हैं। पाकिस्तान को साथ ही लगता है कि एनएसजी की सदस्यता से जुड़ी उसकी अर्जी को भारत के बराबर ना देखे जाने पर दक्षिण एशिया की सामरिक स्थिरता प्रभावित होगी। पाकिस्तानी अधिकारियों को आशंका है कि 48 सदस्यीय परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के लिए मानदंड आधारित रूख को लेकर बढ़ते समर्थन के बावजूद ताकतवर देश इसमें भारत की सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करने के लिए छोटे देशों पर दबाव डाल सकते हैं। पाकिस्तानी विदेश कार्यालय में निरस्त्रीकरण महानिदेशक कामरान अख्तर ने दक्षिण एशिया में ‘‘रक्षा, निवारण एवं स्थिरता’’ विषय पर आयोजित एक कार्यशाला में कहा, ‘‘हमें पूरा यकीन है कि एनएसजी के सदस्य देश इस तरह की छूट नहीं देंगे लेकिन अगर वे अंत में ऐसा करते हैं और भारत को छूट देते हैं तो इसके ना केवल पाकिस्तान बल्कि दूसरे गैर परमाणु शक्ति संपन्न देशों के लिए गंभीर परिणाम होंगे।’’ उन्होंने कहा कि ऐसे देशों को लग सकता है कि परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल के उनके अधिकार से उन्हें अनुचित रूप से वंचित रखा जा रहा है।

डॉन की खबर के अनुसार पाकिस्तानी अधिकारी इस बात को लेकर उत्साहित हैं कि एनएसजी में गैर एनपीटी (परमाणु अप्रसार संधि) देशों की सदस्यता के लिए मानदंड तय करने को काफी समर्थन मिल रहा है। इस्लामाबाद स्थित थिंक टैंक ‘सेंटर फार इंटरनेशनल स्ट्रैटजिक स्टडीज’ (सीआईएसएस) और लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फार स्ट्रैटजिक स्टडीज (आईआईएसएस) ने मिलकर कार्यशाला आयोजित की थी।

अख्तर ने कहा कि एनएसजी के सदस्य देशों को अब यह तय करना है कि क्या वे यह चाहते हैं कि एनएसजी राजनीतिक एवं व्यावसायिक हितों से प्रेरित एक समूह के तौर पर दिखे या वे यह चाहते हैं कि अप्रसार लक्ष्य मजबूत हों। उन्होंने आगाह किया कि पाकिस्तान की अर्जी को भारत के बराबर ना देखने पर दक्षिण एशिया की सामरिक स्थिरता प्रभावित होगी।

विदेश कार्यालय की अतिरिक्त सचिव तसनीम असलम ने कहा कि गैर एनपीटी देशों की सदस्यता का मुद्दा दक्षिण एशिया की सामरिक स्थिरता से गहराई से जुड़ा है।

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