ताज़ा खबर
 

‘अच्छे’ व ‘बुरे’ आतंकवादियों में फर्क बंद नहीं करेगा पाकिस्तान

विवेक सक्सेना तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का घोर विरोधी होने के बावजूद लश्कर ए तैयबा (अब जमात उद दावा) प्रमुख हाफिज सईद अगर पेशावर स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल में हुए हमले के पीछे भारत का हाथ होने का आरोेप लगा रहा है तो इसकी वजह यही है कि पाकिस्तान के अंदरूनी जेहादी खतरे से […]
Author December 21, 2014 14:16 pm
पाकिस्तान में कोयला खदान में विस्फोट, छह की मौत

विवेक सक्सेना

तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) का घोर विरोधी होने के बावजूद लश्कर ए तैयबा (अब जमात उद दावा) प्रमुख हाफिज सईद अगर पेशावर स्थित आर्मी पब्लिक स्कूल में हुए हमले के पीछे भारत का हाथ होने का आरोेप लगा रहा है तो इसकी वजह यही है कि पाकिस्तान के अंदरूनी जेहादी खतरे से लोगों का ध्यान हटाकर उनके गुस्से को अपने ‘सबसे बड़े दुश्मन’ भारत की तरफ मोड़ना चाहता है। लश्कर पाकिस्तान का सरकारी आतंकवादी संगठन है। पाबंदी लगने के बाद इसने अपना नाम बदलकर जमात उद दावा कर लिया और अब इसे पाकिस्तान की पंजाब सरकार से तरह तरह की मदों में मोटी रकम मिलती है। मुंबई हमले की साजिश रचने वाला लश्कर के जेहादी अभियानों का कमांडर जकी उर रहमान लखवी जेल में रहता हुए भी वह सभी सुविधाएं भोग रहा है जो कि उसे अपने घर में मिलती। वह जेल में न सिर्फ अपने परिवार के साथ रह रहा है बल्कि वहां परिवार बढ़ा भी रहा है।

पेशावर में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान का इस समस्या को लेकर दोहरे रुख का खुलासा हो गया है। इस हमले के तुरंत बाद हाफिज सईद ने इसके पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगा दिया जबकि खुद कुछ घंटों के अंदर ही टीटीपी ने इसकी जिम्मेदारी लेते हुए इसमें शाामिल आतंकवादियों की तस्वीरें भी जारी कर दी थीं। उसने यह भी कहा था कि वजीरिस्तान में सैन्य कार्रवाई का बदला लेने के लिए यह हमला किया है।

सुरक्षा जानकार बताते हैं कि पाकिस्तान अपने ही जाल में बुरी तरह से फंसता जा रहा है। उसने आतंकवाद के जिस सांप को पाला था, वही अब उसे डसने पर उतारू है। बताते हैं कि नवंबर, 2011 में अमेरिकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन जब इस्लामाबाद गईं थीं तो उन्होंने कहा था कि आपको यह नहीं भूलना चाहिए कि जो लोग यह सोच कर अपने घर के पिछवाड़े सांप पालते हैं कि वे उनके पड़ोसी को डसने के काम आएंगे, वे बहुत गलती कर रहे हैं। एक दिन सांप उनको भी डसेंगे। अब पाकिस्तान में यही हो रहा है। पाक ने जो तरह-तरह के आतंकी सांप पाले थे वे किसी न किसी रूप में उसे ही निशाना बना रहे हैं।

कभी पाकिस्तान व अमेरिका ने अफगानिस्तान में रूसी सेना से लड़ने के लिए मुजाहिदीन को खड़ा किया था। सोवियत सेनाओं की अफगानिस्तान से वापसी व नजीबुल्ला सरकार के पतन के बाद वहां अव्यवस्था व अराजकता फैल गई और मौके का फायदा उठाकर बेनजीर भुट्टो ने एक आंख वाले मुल्ला उमर की अगुआई में जिस तालिबान का गठन किया उसने पाकिस्तान व उसामा बिन लादेन के अल कायदा लड़ाकों की मदद से देखते ही देखते पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया। अल कायदा के 2001 में न्यूयार्क में वर्ल्ड ट्रेड टावरों पर हमले के बाद अमेरिका के तत्कालीन विदेश मंत्री कोलिन पावेल ने जब पाकिस्तान को मिनटों में पाषाण युग में पहुंचा देने की धमकी दी तो तत्कालीन पाकिस्तानी सैन्य तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ के पास पलटी मारने के अलावा कोई चारा नहीं रह गया। इसके बाद अल कायदा व तालिबान भी पाकिस्तान के खिलाफ हो गए। इस संगठन के आतंकवादी पाकिस्तानी सेना के खिलाफ हो गए। उनका मानना है कि आइएसआइ व पाक सेना मिलकर अमेरिका की मदद कर रहे हैं। इसीलिए उन्होंने हाल ही में पेशावर में पाक सेना के स्कूल में पढ़ने वाले निर्दोष बच्चों को अपना निशाना बना डाला।

अब हाफिज सईद तालिबान को कितना भी क्लीन चिट दे ले पर सच्चाई यह है कि दोनों संगठन एक दूसरे के कट्टर विरोधी हैं। सईद पूरी तरह से सेना व आइएसआइ के इशारों पर चलता है जबकि तालिबान का कहना है कि उनका जेहाद आइएसआइ के लिए नहीं बल्कि अल्ला, इस्लाम व शरिया के लिए है। उसके प्रमुख मुल्ला फजलुल्ला को लगता है कि लश्कर के जरिए ही सेना उस पर हमले करवा रही है। पाकिस्तानी सेना ने इसी तालिबान पर बेनजीर भुट्टो की हत्या करने का आरोप लगाया था। इस संगठन का प्रमुख मौलाना फजलुल्ला भी खतरनाक आतंकवादी है। उसने सात नवंबर, 2013 को ड्रोन हमले में तत्कालीन टीटीपी प्रमुख हकीमुल्ला महसूद की हत्या के बाद इसकी कमान संभाली थी। फजलुल्ला का उत्तर पश्चिम स्वात घाटी के सभी कबीलाई इलाकों में बहुत गहरा प्रभाव है। उसे रेडियो मुल्ला के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि एक समय ऐसा भी था जब वह इस इलाके में अपने रेडियो स्टेशन से प्रचार किया करता था। हर समय उसके भाषण ही गूंजते रहते थे। लेकिन पाकिस्तान विरोधी होने का यह मतलब नहीं है कि फजलुल्ला भारत समर्थक है। बताते चलें कि कुछ महीने पहले वाघा सीमा पर हुए आतंकवादी हमले में भी इसी संगठन का हाथ था।

वहीं दूसरी ओर पेशावर हमले के महज एक दिन बाद जिस तरह से मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य साजिशकर्ता जकी उर रहमान लखवी को जमानत दे दी गई, उससे साफ है कि पाकिस्तान ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ आतंकवादियों में फर्क करना बंद नहीं करने जा रहा है चाहे वह दावे भले ही कितने कर ले। जाहिर है कि लश्कर की गिनती ‘अच्छे आतंकवादियों’ में की जाती है और लखवी अभी भी भरोसेमंद आतंकवादी है जो पाक फौज के खिलाफ नहीं जाएगा। इस आतंकवादी ने मुंबई हमले की न सिर्फ साजिश रची थी बल्कि टीवी पर हमले को देखते हुए उसका संचालन भी किया था। अजमल कसाब, अबू जुंदाल और पाकिस्तानी मूल के अमेरिकी आतंकवादी दाऊद गिलानी ऊर्फ डेविड हेडली ने भी इसका खुलासा किया था कि उसने किस तरह से इस हमले के लिए हथियारों से लेकर पैसा तक मुहैया करवाया था। अमेरिका के दबाव के कारण लखवी को फरवरी, 2009 में गिरफ्तार किया गया था। पहले उसके खिलाफ रावलपिंडी की आतंकवाद विरोधी आदालत में कार्रवाई शुरू हुई। बाद में उसका मुकदमा इस्लामाबाद की अदालत में चलने लगा। उसके खिलाफ साल भर से सुनवाई बंद चल रही थी।

लखवी दुनिया का अकेला ऐसा आतंकवादी है जिसे जेल मेंं अपना परिवार रखने की इजाजत मिली हुई है। उसकी छोटी पत्नी जेल में उसके साथ रहती है और कुछ समय पहले उसे एक बच्चा भी हुआ था। वह अपना मोबाइल फोन भी साथ ही रखता है। अमेरिका ने इस मामले में पाकिस्तान से आपत्ति भी जताई थी पर तत्कालीन पाक सेना प्रमुख जनरल परवेज कयानी उसे दी जाने वाली किसी भी तरह की सुविधा में कोई कमी करने के लिए तैयार नहीं हुए थे।

 

 

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

  1. No Comments.