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‘पाकिस्तान को आतंकवाद प्रायोजित करने वाले देशों की सूची में लगभग रख दिया गया था’

सीआईए के पूर्व अधिकारी रॉबर्ट एल. ग्रेनियर ने कहा कि पाकिस्तान हितों की अवधारणा को लेकर अडिग रहता है और वह अमेरिकी दंड या लालच की भी परवाह नहीं करता।

Author वॉशिंगटन | Published on: September 9, 2016 5:17 PM
पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच तोरखम सीमा पर तैनात पाक सैनिक। (AP Photo/Mohammad Sajjad)/File)

पाकिस्तान को 1993-94 में आतंकवाद का प्रायोजन करने वाले देशों की सूची में ‘लगभग रख दिया’ गया था। यह जानकारी सीआईए के एक पूर्व अधिकारी ने दी। सीआईए के पूर्व अधिकारी रॉबर्ट एल. ग्रेनियर ने गुरुवार (8 सितंबर) को बताया, ‘बिल क्लिंटन प्रशासन की शुरूआत में 1993 और 1994 में मैं राजनीतिक मामलों का सहायक मंत्री था और वार्षिक आतंकवाद समीक्षा में जुटा हुआ था जिसमें पाकिस्तान को आतंकवाद का प्रायोजन करने वाले देशों की सूची में औपचारिक रूप से लगभग रख दिया गया था।’ वह पाकिस्तान पर कांग्रेस में हो रही सुनवाई के दौरान सीनेट की विदेश संबंधों की समिति के सदस्यों को संबोधित कर रहे थे।

ग्रेनियर ने कहा कि पांच दशक से ज्यादा समय में अमेरिका पाकिस्तानी व्यवहार के विभिन्न पहलुओं को समय-समय पर नजरअंदाज करता रहा है। उन्होंने कहा, ‘इस तरह 1980 के दशक में सोवियत अफगान मुजाहिद्दीन के विरोध में अमेरिका-पाक संयुक्त सहयोग के तहत पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के साक्ष्यों को न केवल नजरअंदाज किया गया बल्कि पाकिस्तान को उदारतापूर्वक आर्थिक और सैन्य सहयोग दिया गया।’ उन्होंने कहा कि 9/11 हमले के तुरंत बाद अफगानिस्तान में अभियान के लिए प्लेटफॉर्म की जरूरत और उस देश से भागने वाले अलकायदा आतंकवादियों को पकड़ने के लिए अमेरिका एक बार फिर कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकवाद और अफगान तालिबान के प्रति पाकिस्तान के दोहरे रुख को नजरअंदाज करना चाह रहा था।

ग्रेनियर ने कहा कि राष्ट्र हित की अपनी अवधारणा पर पाकिस्तान अड़ा हुआ है और इस पर समझौता नहीं करता भले ही अमेरिका की नजर में यह उचित नहीं लगता हो या खुद को परास्त करने वाला महसूस होता है। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों के सिद्धांत, भारत से खतरे के आकलन या विदेशी एवं देशी आतंकवादी समूहों के बारे में इसके गुणा-गणित को लेकर भी ऐसा ही हुआ। ग्रेनियर ने कहा कि पाकिस्तान हितों की अवधारणा को लेकर अडिग रहता है और वह अमेरिकी दंड या लालच की भी परवाह नहीं करता।

बहरहाल इस्लामाबाद में सीआईए प्रमुख रहे अधिकारी ने सांसदों को पाकिस्तान के खिलाफ किसी दंडात्मक कार्रवाई या प्रतिबंध को लेकर चेतावनी भी दी। वास्तव में उन्होंने प्रोत्साहित किया कि अमेरिका को पाकिस्तान के बड़े सशस्त्र बल को बनाए रखने में मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘ऐसे समय में जब कश्मीर सामाजिक और राजनीतिक रूप से विवाद का विषय बना हुआ है तो हमें परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से बचने के लिए पाकिस्तान के परम्परागत सैन्य बल को बनाए रखना होगा और क्षेत्र में भारत-पाकिस्तान युद्ध का खतरा बरकरार है।’

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