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पाक ने ‘कोहिनूर’ पर ठोका दावा, लाहौर हाईकोर्ट में याचिका दायर

याचिका में जाफरी ने तर्क दिया कि ब्रिटेन ने ‘‘जबरन और दबाव में’’ महाराजा रणजीत सिंह के पौत्र दिलीप सिंह से कोहिनूर हीरे को चुरा लिया और अपने देश ले गया।

Author लाहौर | April 18, 2016 8:26 PM
बैरिस्टर जावेद इकबाल की तरफ से दायर याचिका में 105 कैरेट के कोहिनूर हीरे पर पाकिस्तान का दावा इस आधार पर किया गया है कि यह उस स्थान का था जो 1947 में पाकिस्तान बना था। (रॉयटर्स फोटो)

पाकिस्तान की एक अदालत ने एक याचिका को स्वीकार कर लिया है जिसमें ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय से कोहिनूर को वापस लाने का सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है। अदालत ने मशहूर हीरा के लिए याचिका पर आपत्ति को खारिज कर दिया है जिसे ब्रिटेन से वापस लाने के लिए भारत वर्षों से प्रयास कर रहा है। लाहौर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश खालिद महमूद खान ने सोमवार को याचिका पर अदालत के रजिस्ट्रार कार्यालय की आपत्तियों को खारिज कर दिया कि जिसमें महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और पाकिस्तान में ब्रिटेन के उच्चायुक्त को प्रतिवादी बनाया गया है।

बैरिस्टर जावेद इकबाल की तरफ से दायर याचिका में 105 कैरेट के हीरे पर पाकिस्तान का दावा इस आधार पर किया गया है कि यह उस स्थान का था जो 1947 में पाकिस्तान बना था। अदालत ने कार्यालय को निर्देश दिया कि सुनवाई के लिए याचिका को किसी उपयुक्त पीठ के समक्ष भेजा जाए। पिछले वर्ष दिसम्बर में रजिस्ट्रार के कार्यालय ने यह कहते हुए याचिका को खारिज कर दिया था कि यह विचारणीय नहीं है और कहा कि अदालत के पास ब्रिटेन की महारानी के खिलाफ मामले की सुनवाई करने का अधिकार नहीं है।

याचिकाकर्ता ने उच्च न्यायालय में फिर से याचिका दायर कर आग्रह किया कि ब्रिटेन में हर मामले के लिए महारानी जवाबदेह हैं। उन्होंने अदालत से कहा, ‘‘उन्हें पाकिस्तान में क्यों नहीं जवाबदेह बनाया जा सकता?’’

याचिका में जाफरी ने तर्क दिया कि ब्रिटेन ने ‘‘जबरन और दबाव में’’ महाराजा रणजीत सिंह के पौत्र दिलीप सिंह से हीरे को चुरा लिया और अपने देश ले गया। उन्होंने कहा, ‘‘1953 में महारानी एलिजाबेथ द्वितीय की ताजपोशी के दौरान हीरा उनके ताज का हिस्सा बना। महारानी एलिजाबेथ का कोहिनूर हीरा पर कोई अधिकार नहीं है।’’

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