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पाकिस्तान ने ICJ कोर्ट से की कुलभूषण जाधव मामले पर सुनवाई तेज करने की मांग

पाकिस्तान ने आज अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण (आईसीजे) से मांग की कि वह कुलभूषण जाधव मामले में जल्द स्वतंत्र सुनवाई के लिए त्वरित समय तालिका अपनाए क्योंकि भारत और पाकिस्तान के ‘प्रतिनिधि’ अदालत के अध्यक्ष से प्रक्रियागत मामलों पर चर्चा कर चुके हैं।

भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव (File Photo)

पाकिस्तान ने आज अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण (आईसीजे) से मांग की कि वह कुलभूषण जाधव मामले में जल्द स्वतंत्र सुनवाई के लिए त्वरित समय तालिका अपनाए क्योंकि भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधि अदालत के अध्यक्ष से प्रक्रियागत मामलों पर चर्चा कर चुके हैं। पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय की ओर से जारी एक वक्तव्य के मुताबिक जाधव मामले पर समयसीमा पर चर्चा के लिए भारत और पाकिस्तान के प्रतिनिधिमंडलों की आईसीजे के अध्यक्ष रॉनी अब्राहम के साथ बैठक हो चुकी है। इसमें कहा गया, ‘‘यह सुनवाई नहीं थी इसलिए मामले के गुण-दोष पर पर कोई चर्चा नहीं हुई। मुलाकात का उद्देश्य प्रक्रियागत मामलों पर चर्चा करना भर था।

गौरतलब है कि 15 दिन पहले आए पाकिस्तान ने कहा था कि कथित भारतीय जासूस कुलभूषण जाधव तब तक जीवित रहेगा, जब तक दया याचिका दाखिल करने का उसका अधिकार खत्म नहीं हो जाता। विदेश विभाग के प्रवक्ता नफीस जकारिया ने कहा, “अंतर्राष्ट्रीय अदालत (आसीजे) द्वारा उसकी फांसी पर रोक का कोई फर्क नहीं पड़ता। जाधव तब तक जीवित रहेगा, जबतक दया याचिका दाखिल करने का उसका अधिकार खत्म नहीं हो जाता।” उन्होंने कहा कि आईसीजे में भारत की याचिका जाधव को राजनयिक संपर्क प्रदान करने के अधिकार को लेकर है। प्रवक्ता ने कहा, “यह इसलिए नहीं है कि आईसीजे पाकिस्तानी कानूनी प्रक्रिया को लेकर अपीलीय अदालत के रूप में काम कर सकता है।

यही कारण है कि वकील खवार कुरैशी ने अदालत को सूचित किया था कि भारत जो चाह रहा है, वह इस अदालत से उसे नहीं मिल सकता। उन्होंने अदालत से यह भी कहा कि भारत मीडिया का इस्तेमाल मामले के बारे में खराब छवि बनाने के लिए कर रहा है।” उन्होंने कहा कि जाधव द्वारा जासूसी तथा पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता के कबूलनामे के आधार पर 23 जनवरी को इस्लामाबाद ने भारत से जानकारी मुहैया कराने की मांग की थी, जिसके बारे में उसे बार-बार याद दिलाया गया, लेकिन वह इसमें नाकाम रहा। प्रवक्ता ने जाधव की फांसी पर रोक को कुछ नहीं बल्कि ‘सामान्य’ करार दिया।

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