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हैपिनेस रैंकिंग: चार साल से लगातार पिछड़ रहा है भारत, पाकिस्तानी हैं ज्यादा खुश

खुशहाली के मामले में अफगानिस्तान को छोड़ कर सभी सार्क देश भारत से आगे हैं। हर बार की तरह इस बार भी यूरोपीय देश को पहला स्थान प्राप्त हुआ है। फिनलैंड को पहला और नॉर्वे को दूसरा स्थान हासिल हुआ है। अमेरिका का नाम पहले 10 देशों में नहीं है।

खुशहाली में लगातार पिछड़ रहा भारत। (PHoto-Flickr)

हैपिनेस की ताजा रैंकिंग जारी हो गई है। पिछले साल की तरह इस बार भी भारत की रैंकिंग में गिरावट दर्ज की गई है। भारत वर्ष 2014 से लगातार पिछड़ रहा है। नरेंद्र मोदी ने इसी साल देश की सत्ता संभाली थी। वर्ल्ड हैपिनेस रिपोर्ट- 2018 में भारत 11 पायदान फिसल कर 122 से 133वें नंबर पर पहुंच गया है। इस बार इसमें कुल 156 देशों को शामिल किया गया। वर्ष 2015 में भारत 158 देशों में 117वें नंबर पर था। दिलचस्प है कि इसमें पाकिस्तानी लोग भारतीय से ज्यादा खुश पाए गए हैं। हालांकि, पाकिस्तान पड़ोसी देश अफगानिस्तान के साथ दुनिया के सबसे अस्वीकार्य देशों में शुमार है।

खुशहाली को मापने के लिए कई मापदंड तय किए जाते हैं। इनमें प्रति व्यक्ति जीडीपी, सामाजिक समर्थन, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, जिंदगी में चयन का अधिकार, उदारता, भ्रष्टाचार और आतंक या डर का माहौल आदि को शामिल किया जाता है। दुनिया के सबसे खुशहाल देशों में अधिकांश यूरोपीय राष्ट्र शामिल हैं। इस सूची में फिनलैंड पहले और नॉर्वे दूसरे स्थान पर है। पहले 10 देशों में डेनमार्क और स्विट्जरलैंड भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी रैंकिंग में शीर्ष 20 देशों में से एक भी एशियाई नहीं है। बुरुंडी आखिरी पायदान पर है।

सार्क देशों में भी पिछड़ा भारत: खुशहाली के मामले में सार्क के सदस्य देशों में भारत सिर्फ अफगानिस्तान से ही आगे है। पाकिस्तान (75), भूटान (97), नेपाल (101), बांग्लादेश (115) और श्रीलंका (116) भी हमसे आगे है। आतंकी हमलों से त्रस्त पाकिस्तान पिछले साल इस सूची में 80वें स्थान पर था, लिहाजा उसकी स्थिति में पांच पायदान का सुधार हुआ है। मालदीव को इस बार भी रैंकिंग में जगह नहीं दी गई। चीन का स्थान भी पाकिस्तान से पीछे है। वहीं, अमेरिका (18) को शुरुआती 10 देशों में स्थान नहीं मिल सका है। म्यांमार की रैंकिंग में भी गिरावट आई है और यह देश 130वें स्थान पर पहुंच गया है।

बता दें कि संयुक्त राष्ट्र की ओर से हर साल हैपिनेस रैंकिंग जारी की जाती है, ताकि सदस्य राष्ट्रों में खुशहाली की स्थिति का पता लगाया जाता है। इसके आधार पर ही किसी देश में विकास का लाभ लोगों तक पहुंचने के बारे में भी जानकारी मिलती है। इससे तय होता है कि संबंधित देशों के लोगों को लोक कल्याणकारी योजनाओं का कितना लाभ मिल रहा है।

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