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कश्मीर पर मध्यस्थता की भूमिका निभाने से अमेरिका का इंकार

अमेरिका ने पाकिस्तान को नसीहत डे डाली कि उसे बिना किसी भेदभाव के लश्कर ए तैयबा और हक्कानी नेटवर्क जैसे सभी आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए...

Author वॉशिंगटन | Updated: October 24, 2015 6:36 PM
Barack Obama, Nawaz Sharif, Lashkar-e-Taiba, Haqqani network, Pakistan, United States, Pakistan News, बराक ओबामा, नवाज शरीफ, लश्कर ए तैयबा, हक्कानी नेटवर्क, पाकिस्तानअमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात करते पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ। (एपी फोटो)

राष्ट्रपति बराक ओबामा से मुलाकात में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने कश्मीर का राग तो छेड़ा पर अमेरिका ने इसे बेसुरा मानते हुए साफ कर दिया कि वह इस मामले में मध्यस्थता को तभी तैयार होगा जब भारत उससे इस बाबत कहेगा।

उल्टे अमेरिका ने पाकिस्तान को नसीहत डे डाली कि उसे बिना किसी भेदभाव के लश्कर ए तैयबा और हक्कानी नेटवर्क जैसे सभी आतंकवादी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। अमेरिका ने पाकस्तिान के साथ असैन्य परमाणु करार संबंधी खबरों को भी बेतुकी करार दिया और शरीफ से अपने परमाणु हथियारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा।

अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के बीच गुरुवार को बैठक हुई थी। अमेरिका ने भारत जैसा परमाणु समझौता किए जाने के संबंध में पाकिस्तान के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता करने से ‘स्पष्ट रूप से इनकार’ करते हुए अमेरिकी मीडिया की रिपोर्टों को ‘पूरी तरह गलत’ करार दिया है। वाइट हाउस के प्रेस उप सचिव एरिक शुल्ज ने वार्ता के बाद पाकिस्तान की आतंकवादी संगठनों के बीच भेदभाव नहीं करने की राष्ट्रीय कार्य नीति संबंधी प्रतिबद्धता का स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि हम इस बात को लेकर पाकिस्तान सरकार के सामने बहुत स्पष्ट रहे हैं कि इस प्रतिबद्धता के क्रियान्वयन के लिए पाकिस्तान को सभी आतंकवादी समूहों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने बताया कि हालांकि दोनों देशों के नेताओं ने पाकिस्तान की परमाणु सुरक्षा पर बात की जिस पर चर्चा चल रही है।

अमेरिका और भारत के बीच किए गए 123 समझौते को भारत-अमेरिका परमाणु करार के रूप में जाना जाता है। इस समझौते की रूपरेखा 2005 में तैयार की गई थी।

अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम और इस कार्यक्रम के संबंध में विभिन्न गतिविधियों को लेकर हम लंबे समय से उससे वार्ता कर रहे हैं। हम विशेष रूप से चिंतित हैं। हमने पाकिस्तान को अपनी चिंताओं के बारे में बताया है कि परमाणु हथियार संपन्न सभी देशों के लिए इन हथियारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है और सामरिक स्थिरता को प्रोत्साहित करने के लिए हर वो काम करना जरूरी है, जो वह कर सकता है। इसलिए हम पाकिस्तान के साथ इस प्रकार की वार्ता जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका यह समझता है कि पाकिस्तान को उसके परमाणु शस्त्रागार को संभावित खतरे के बारे में अच्छी तरह जानकारी है। इनमें उसकी जमीन से काम कर रहे आतंकवादी समूहों से खतरा भी शामिल है।

अधिकारी ने कहा कि वे (पाकिस्तान) आतंकवादी खतरों को लेकर भली भांति परिचित है जिनमें उनके सैन्य प्रतिष्ठानों के सभी पहलुओं को खतरा भी शामिल है और हम यह समझते हैं कि उनके पास एक समर्पित सुरक्षा तंत्र है तो परमाणु सुरक्षा की अहमियत को समझता है।

इससे पहले वाइट हाउस के ओवल कार्यालय में वार्ता के बाद दोनों नेताओं द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में बताया गया कि शरीफ ने ओबामा को लश्कर ए तैयबा और उसके सहयोगी संगठनों समेत संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित लोगों और संगठनों के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के तहत अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई करने के पाकिस्तान के संकल्प से अवगत कराया।

शरीफ ने 90 मिनट से ज्यादा समय तक चली बैठक के बाद कहा कि उनकी सरकार आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह पूछे जाने पर कि क्या वे लश्कर ए तैयबा के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अपनी प्रतिबद्धता पूरी करेंगे, शरीफ ने कहा कि हम जानते हैं कि हमारे राष्ट्रीय हित क्या हैं। आतंकवाद के सभी तत्वों के खिलाफ कार्रवाई करना हमारी राष्ट्रीय जिम्मेदारी है। यह हमारी राष्ट्रीय कार्य योजना का हिस्सा है।

कश्मीर को भारत और पाकिस्तान के बीच ‘तनाव का मुख्य कारण’ बताते हुए शरीफ ने कहा कि इसके समाधान के लिए और भारत पाक वार्ता प्रक्रिया में गतिरोध दूर करने के लिए तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की आवश्यकता है। अगर भारत तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार नहीं करता, अगर कोई द्विपक्षीय वार्ता नहीं होती तो गतिरोध बना रहेगा।

बहरहाल, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच मसलों को सुलझाने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि वे सीधे बातचीत करें। ओबामा प्रशासन के अधिकारी ने भारतीय संवाददाताओं से कहा कि राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके वार्ताकारों ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनकी टीम के साथ नियंत्रण रेखा की स्थिति पर विचार विमर्श किया। इस दौरान हमने अमेरिका की इस प्रतिबद्धता की पुष्टि की कि हम तभी शामिल होंगे जब भारत और पाकिस्तान चाहेंगे। अमेरिका की किसी नीति में कोई बदलाव नहीं है।

उर्दू में बोल रहे शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों में भारत की कथित गतिविधियों के बारे में विदेश मंत्री जॉन केरी को तीन डोजियर सौंपे गए। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नेताओं के साथ बातचीत में नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि संघर्ष विराम का न केवल नियंत्रण रेखा पर क्रूरतापूर्वक उल्लंघन किया जा रहा है बल्कि वास्तविक सीमा पर भी ऐसा हो रहा है।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने यह तय करने के लिए एक व्यवस्था स्थापित करने पर जोर दिया कि कौन पहले संघर्षविराम उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि संघर्षविराम उल्लंघन करने वाले को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

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