पाकिस्तान में इमरान सरकार के सामने नया संकट, प्रतिबंधित पार्टी के चीफ की गिरफ्तारी के बाद हजारों समर्थकों ने इस्लामाबाद को घेरा

बुधवार को पुलिस के जवानों और तहरीक-ए-लब्बैक के कार्यकर्ताओं के बीच खूनी झड़प भी हुई। जिसमें करीब चार पुलिसकर्मी और कई टीएलपी कार्यकर्ता मारे गए। साथ ही करीब 400 से ज्यादा लोग घायल भी हो गए।

बुधवार को इस्लामाबाद कूच के दौरान प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-लब्बैक के कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच जमकर भिड़ंत हुई। (फोटो: एपी)

पड़ोसी देश पाकिस्तान के हालात फिर से बिगड़ते जा रहे हैं और इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार के सामने संकट पैदा हो गया है। गुरुवार को पाकिस्तान की प्रतिबंधित कट्टरपंथी संस्था तहरीक-ए-लब्बैक के कार्यकर्ताओं ने अपने पार्टी चीफ को रिहा करने के लिए राजधानी इस्लामाबाद के तरफ कूच किया। जानकारी प्राप्त होने तक प्रतिबंधित संगठन के कार्यकर्ता इस्लामाबाद से करीब 220 किलोमीटर दूर गुजरांवाला तक पहुंच गए थे। 

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से निकले तहरीक-ए-लब्बैक(टीएलपी) के जत्थे को रोकने के लिए लाहौर से रावलपिंडी और इस्लामाबाद जाने वाले रास्ते को भी काट दिया गया है। साथ ही आसपास के इलाकों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं को भी बंद कर दिया गया है। इसके अलावा इस्लामाबाद की तरफ गुजरने वाली सड़क पर पुलिस और पाकिस्तानी रेंजर्स के जवानों को भी तैनात किया गया है।  

वहीं पाकिस्तानी रेलवे ने भी लाहौर से रावलपिंडी और इस्लामाबाद जाने वाली ट्रेन को तीन दिन के लिए निलंबित कर दिया है। पाकिस्तानी रेलवे ने कहा है कि प्रदर्शन को देखते हुए आगामी तीन दिनों के लिए इस रूट पर चलने वाली ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है। वहीं पाकिस्तान सरकार ने साफ़ कर दिया है किसी भी हाल में प्रतिबंधित संगठन के सदस्यों को इस्लामाबाद में प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। 

दरसल पिछले साल फ्रांसीसी मैगजीन में पैगंबर मुहम्मद का एक कार्टून छापे जाने के बाद पूरे विश्व में हंगामा बरपा था और ईशनिंदा करने के आरोप लगाए गए। बाद में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी अभिव्यक्ति की आजादी बताते हुए कार्टून छापने की वकालत की थी और कहा था कि फ्रांस कार्टून बनाना नहीं छोड़ेगा।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति के इस बयान के बाद ही पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हिंसा भड़क गई थी और इसी साल अप्रैल माह में प्रतिबंधित कट्टरपंथी संस्था तहरीक-ए-लब्बैक के मुखिया साद रिजवी को पुलिस ने कानून व्यवस्था के मद्देनजर हिरासत में ले लिया था।

पिछले दिनों यह आंदोलन फिर से उग्र हो गया जब तहरीक-ए-लब्बैक के कार्यकर्ताओं ने फ्रांसीसी राजदूत को देश से निकाले जाने और साद रिजवी को छोड़े जाने की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। रविवार को प्रतिबंधित संगठन के कार्यकर्ताओं ने मांग पूरी करने के लिए सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम भी दिया था। 

बुधवार को पुलिस के जवानों और तहरीक-ए-लब्बैक के कार्यकर्ताओं के बीच खूनी झड़प भी हुई। जिसमें करीब चार पुलिसकर्मी और कई टीएलपी कार्यकर्ता मारे गए। साथ ही करीब 400 से ज्यादा लोग घायल भी हो गए। पिछले काफी दिनों से चल रहे इस संघर्ष में अबतक करीब 19 लोगों की मौत हो चुकी है. जिसमें 11टीएलपी कार्यकर्ता और 8 पुलिसकर्मी शामिल हैं।

हालांकि कुछ दिनों पहले सरकार ने टीएलपी को मनाने की भी कोशिश की थी और गिरफ्तार किए गए करीब 350 टीएलपी कार्यकर्ताओं को छोड़ दिया था। लेकिन टीएलपी ने आंदोलन ख़त्म करने से साफ़ मना कर दिया। टीएलपी के उग्र रूप को देखते हुए पाकिस्तानी सरकार ने भी अब आंदोलन को बलपूर्वक दबाने का फैसला किया है। 

पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा है कि कैबिनेट ने टीएलपी को एक उग्रवादी संगठन के रूप में मानने का फैसला किया है और इसे बाकी उग्रवादी समूहों की तरह ही कुचल दिया जाएगा। जैसे पाकिस्तानी ने अल-कायदा जैसे प्रमुख आतंकवादी संगठनों को टक्कर दी। सरकार पहले ही एहतियातन तौर पर पंजाब प्रांत में दो महीने के लिए रेंजर्स तैनात करने की घोषणा कर चुकी है। (पीटीआई इनपुट्स के साथ)

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