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…तो लाहौर के सादमान चौक का नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर होगा!

इसी साल फरवरी में पड़ोसी मुल्क की शहीद भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन पाकिस्तान के चेयरमैन एडवोकेट इम्तियाज रशीद कुरैशी ने चौक का नाम भगत सिंह के नाम पर रखने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। लाहौर हाईकोर्ट के जज शाहिद जमील खान ने इम्तियाज रशीद कुरैशी की याचिका पर सुनवाई करते हुए लाहौर के लॉर्ड मेयर को आदेश दिया कि वह कानून के दायरे में शादमान चौक का नाम शहीद-ए-आजम के नाम पर रखने के लिए फैसला लें।

फाइल फोटो। (Image Source: Facebook/Paramjit Singh)

पाकिस्तान के लाहौर की शादमान चौक का नाम बदलकर ‘शहीद भगत सिंह चौक’ रखा जा सकता है। बुधवार (5 सितंबर) को लाहौर हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन को आदेश दिया कि शादमान चौक का नाम बदलकर स्वतंत्रता सेनानी शहीद भगत सिंह के नाम पर रखे जाने पर जल्द फैसला ले। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लाहौर की शादमान चौक वही जगह है जहां 23 मार्च, 1931 को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को फांसी दी गई थी। इसी साल फरवरी में पड़ोसी मुल्क की शहीद भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन पाकिस्तान के चेयरमैन एडवोकेट इम्तियाज रशीद कुरैशी ने चौक का नाम भगत सिंह के नाम पर रखने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। लाहौर हाईकोर्ट के जज शाहिद जमील खान ने इम्तियाज रशीद कुरैशी की याचिका पर सुनवाई करते हुए लाहौर के लॉर्ड मेयर को आदेश दिया कि वह कानून के दायरे में शादमान चौक का नाम शहीद-ए-आजम के नाम पर रखने के लिए फैसला लें। याचिकाकर्ता के मुताबिक पाकिस्तान के कायदे-आजम मोहम्मद अली जिन्ना ने भी भगत सिंह को श्रद्धांजलि दी थी और कहा था कि भगत सिंह जैसा बहादुर शख्स पूरे उपमहाद्वीप में नहीं देखा।

अदालत ने लाहौर के लॉर्ड मेयर को आदेश दिया कि शहीद भगत सिंह मैमोरियल फाउंडेशन पाकिस्तान की तरफ अटके पड़े आवेदन जल्द निपटारा किए जाए। फाऊंडेशन के चेयरमैन इम्तियाज रशीद कुरैशी ने मीडिया से कहा कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद उन्हें पूरी उम्मीद है कि लाहौर के लॉर्ड मेयर अब शादमान चौक का नाम शहीद भगत सिंह के नाम पर रखने की उनकी मांग को जल्द पूरा करेगें।

इम्तियाज रशीद कुरैशी ने कहा कि फाउंडेशन की तरफ से पाकिस्तान सरकार से भगत सिंह को देश का सबसे बड़ा वीरता सम्मान निशान-ए-हैदर देने और शादमान चौक पर शहीद-ए-आजम की प्रतिमा लगाने की मांग भी की गई है। कुरैशी ने कहा कि 87 साल पहले भगत सिंह और उनके दो साथियों राजगुरु और सुखदेव को लाहौर में फांसी दी गई थी। भगत सिंह ने भारतीय उपमहाद्वीप को आजाद कराने के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी, इस बहादुरी के लिए उन्हें निशान-ए-हैदर मिलना चाहिए। कुरैशी ने कहा कि भगत सिंह पाकिस्तान के साथ-साथ हिंदुस्तान के भी हीरो हैं।

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