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‘जिहादियों के बलबूते कश्मीर को आजादी दिलाने की पाक नीति पड़ी उल्टी’

हुसैन हक्कानी ने कहा, ‘‘अफगान तालीबान से ही अलग होकर अंतत: पाकिस्तान तालीबान बना और अब उससे टूटकर जमात-उल-अहरार बना।

Author वॉशिंगटन | March 29, 2016 6:20 PM
Husain Haqqani, Pakistan Policy, Jihadi, Kashmir azadi, United Statesपाकिस्तान के पूर्व राजनयिक हुसैन हक्कानी (फाइल फोटो)

लाहौर में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक हुसैन हक्कानी ने मंगलवार (29 मार्च) को कहा कि जम्मू कश्मीर की ‘‘आजादी’’ के मकसद से जिहादी समूहों के साथ पाकिस्तान की उच्चतम स्तर की संलिप्पतता उल्टी पड़ रही है। अमेरिका में अपने देश के पूर्व दूत रहे हक्कानी ने पीबीएस को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि पाकिस्तान की दशकों पुरानी नीति के उल्टा पड़ जाने के बावजूद देश के अधिकारी आतंकवादी समूहों के खिलाफ सम्पूर्ण युद्ध की घोषणा के लिए अनिच्छुक हैं।

हक्कानी ने कहा, ‘‘जिहादी समूहों के साथ पाकिस्तान की भागीदारी शुरू में मुख्यत: एक रणनीति के तहत थी और माना जा रहा था कि इससे अफगानिस्तान में प्रभाव कायम करने और जम्मू कश्मीर को भारत से आजाद कराने में उन्हें फायदा होगा।’’उन्होंने कहा, ‘‘अपनी नीति के उल्टा पड़ जाने के बावजूद पाकिस्तान कुछ गिने चुने जिहादी समूहों के खिलाफ ही कार्रवाई कर रहा है। यही वजह है कि वह ध्रुवीकरण की विभिन्न नीतियों का फायदा उठाकर शियाओं, अहमदियों या ईसाइयों को निशाना बना रहा है और अधिक से अधिक लड़ाकें की भर्ती करके समाज में अपना प्रभुत्व बना रहा है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘वास्तविक समस्या तो देश के उस रवैये पर टिकी है, जिसमें पंजाब के अलावा देश के अन्य हिस्सों में आतंकवादियों को तलाशा जा रहा है और सिर्फ पंजाब में दलों की सुरक्षा की कोशिश की जा रही है और अब यही उन्हें काटने को दौड़ रही है।’’

हक्कानी ने कहा कि तथ्य यह है कि पाकिस्तानी सेना और असैन्य नेता भारत से युद्ध और अफगानिस्तान में अपने प्रभाव के भ्रममात्र से आसानी से उद्विग्न हो जाते हैं और इन उद्देश्यों को पूरा करने के लिए कुछ निश्चित जिहादी समूहों को मंजूरी भी देते हैं। उन्हें यह एहसास भी नहीं होता कि उनसे ही निकलकर अंतत: अन्य संगठन भी पैदा हो सकते हैं जैसा कि अफगान तालीबान से पाकिस्तान तालीबान बना।

उन्होंने कहा, ‘‘अफगान तालीबान से ही अलग होकर अंतत: पाकिस्तान तालीबान बना और अब उससे टूटकर जमात-उल-अहरार बना। पाकिस्तान को सभी आतंकवादी समूहों और उन्हें पनपने देने वाली मानसिकता को खत्म करने का फैसला लेना ही होगा, जो वह कर नहीं पा रहा है।’’

जमात-उल-अहरार ने ही लाहौर में हुए वीभत्स आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ली है, जिसमें 72 लोग मारे गए हैं। हक्कानी ने बताया कि पाकिस्तान के अधिकारी भारत-केंद्रित आतंकवादी समूहों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘इन सभी का (जिहादी समूहों का) सफाया करने के लिए पाकिस्तान ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया है। इसलिए लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे कई समूह भारत में हमला कर रहे हैं। वे बचे हुए हैं और एक बार जब वे बच जाते हैं तो संभव है कि उनके ही कुछ सदस्य उनसे अलग हो चुके समूहों में शामिल हो गए होंगे जो पाकिस्तान पर हमला करेंगे।’’

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