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शरीफ ने उठाया कश्मीर का मुद्दा, 4 सूत्री ‘शांति पहल’ का दिया फार्मूला

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे का समाधान न होने से संयुक्त राष्ट्र की असफलता प्रतिबिंबित होती..

Author संयुक्त राष्ट्र | Published on: October 1, 2015 9:09 AM
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस मुद्दे का समाधान न होने से संयुक्त राष्ट्र की असफलता प्रतिबिंबित होती है।(फोटो-रॉयटर्स)

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए बुधवार को कहा कि इस मुद्दे का हल नहीं निकलने से संयुक्त राष्ट्र की नाकामी ही झलकती है। शरीफ ने चार सूत्री ‘शांति पहल’ का भी प्रस्ताव दिया जिसमें कश्मीर का विसैन्यीकरण और सियाचिन से बलों की बिना शर्त वापसी शामिल है।

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में शरीफ ने इस फार्मूले के तहत प्रस्ताव दिया कि दोनों देशों को किसी भी सूरत में बलों का इस्तेमाल करने में संयंम बरतना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 2003 में हुए सीमा संघर्षविराम को औपचारिक रूप देने का प्रस्ताव भी दिया, ताकि परमाणु क्षमता संपन्न दोनों पड़ोसी देशोंं के बीच शांतिपूर्ण संबंध सुनिश्चित हो सकें।


शरीफ ने कश्मीर मुद्दे के समाधान और भारत-पाकिस्तान के बीच शांति व सुरक्षा के मुद्दे को जरूरी बताते हुए कहा-‘हमारे रिश्ते टकराव से नहीं, बल्कि सहयोग से परिभाषित होने चाहिए।’ प्रस्ताव की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा-‘हमारा प्रस्ताव है कि पाकिस्तान और भारत वर्ष 2003 में कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर पूरी तरह संघर्षविराम के लिए हुई सहमति को पूरा सम्मान दें और उसे औपचारिक रूप दें। इसके लिए हम संघर्षवराम की निगरानी के लिए यूएनएम ओजीआइपी के विस्तार का आह्वान करते हैं।’

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने दूसरे प्रस्ताव के बारे में कहा- हम प्रस्ताव करते हैं कि पाकिस्तान और भारत फिर से इसकी पुष्टि करें कि वे किसी भी सूरत में बलों के उपयोग का सहारा नहीं लेंगे या उनके उपयोग की धमकी का इस्तेमाल नहीं करेंगे। यह यूएन चार्टर का केंद्रीय तत्व है। उन्होंने कहा ‘तीसरा प्रस्ताव है कि कश्मीर के विसैन्यीकरण के लिए कदम उठाए जाएं। और चौथा- दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र सियाचिन ग्लेशियर से सैनिकों की बिना शर्त परस्पर वापसी पर सहमति हो।

शरीफ ने कहा कि समृद्धि के लिए शांति जरूरी है और यह शांति वार्ता से ही हासिल की जा सकती है न कि संवादहीनता से।
कश्मीर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 1947 से विवाद बना हुआ है और अनसुलझा है और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव पर अमल भी नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि कश्मीरियों की तीन पीढ़ियों ने केवल टूटे वादे और दमन ही देखा है। आत्मनिर्णय के लिए संघर्ष में एक लाख से अधिक लोगों ने जान गंवाई। इससे संयुक्त राष्ट्र की लगातार असफलता जाहिर होती है।

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