भारत की निगरानी से बचने के लिए पाकिस्‍तान बिछा सकता है 135 किलोमीटर लंबा ऑप्टिक फाइबर केबल?

लॉन्ग टर्म प्लान से जुड़ी 21 पन्नों की विस्तृत परियोजना के हवाले से डॉन ने लिखा है कि पाकिस्तान और चीन उन्नत किस्म के कम्यूनिकेशन फ्रेमवर्क स्थापना की दिशा में काम कर रहे हैं।

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक तौर पर। (Source: Agency)

पाकिस्तान और चीन सीमा पार 135 किलोमीटर लंबा ऑप्टिकल फाइबर बिछाने के लॉन्ग टर्म प्लान पर काम कर रहा है। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक फाइबर केबल पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर प्रोजेक्ट का हिस्सा है जिस पर करीब 4.4 करोड़ डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इस प्रोजेक्ट को भारतीय संचार कंपनियों की निगरानी से बचने के तौर पर देखा जा रहा है क्योंकि पाकिस्तान में ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क बिछाने के काम में ज्यादातर भारतीय कंपनियां शामिल हैं।

लॉन्ग टर्म प्लान से जुड़ी 21 पन्नों की विस्तृत परियोजना के हवाले से डॉन ने लिखा है कि पाकिस्तान और चीन उन्नत किस्म के कम्यूनिकेशन फ्रेमवर्क स्थापना की दिशा में काम कर रहे हैं। इस क्रम में दोनों देशों के बीच ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिए डायरेक्ट कम्यूनिकेशन होगा। इसके अलावा इससे लोगों को तेज इंटरनेट स्पीड, डिजिटल टीवी की सुविधाएं भी मुहैया कराई जा सकेंगी। दोनों देशों को उम्मीद है कि साल 2030 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा कर लियाा जाएगा। प्रोजेक्ट की डिटेल्ड रिपोर्ट के मुताबिक इससे बलूचिस्तान और गिलगिट बालिस्तान तक भी कनेक्टिविटी में सुधार आएगा।

हालांकि, पाकिस्तान ने ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाने के प्रति विकासात्मक वजह बताए हैं लेकिन उसकी मूल चिंता इंटरनेट ट्रैफिक की स्पीड और भारतीय कंपनियों को इसकी जानकारी होना है। मौजूदा समय में पाकिस्तान में इंटरनेट कनेक्टिविटी फाइबर ऑप्टिक केबल पर ही निर्भर है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्तमान फाइबर ऑप्टिकल नेटवर्क की डेवलपर्स कंपनियां हैं, जो या तो पार्टनर हैं या शेयरधारक।

चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का मानचित्र प्रारूप।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इस साल जनवरी में पाकिस्तान के स्पेशल कम्यूनिकेशन ऑर्गनाइजेशन के डीजी मेजर जनरल अमीर अजीम बाजवा ने पाकिस्तानी संसद की इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी की स्टैंडिंग कमेटी के समक्ष एक रिपोर्ट पेश किया है जिसमें कहा गया है कि पाकिस्तानी इंटरनेट ट्रैफिक के इनकमिंग और आउटगोइंग के कुछ हिस्से भारत से कनेक्टेड हैं। उसके बाद वो अलग-अलग जगहों को जाते हैं।

इतना ही नहीं वहां निगरानी का पूरा बंदोबस्त करने की भी चीन की योजना है। इसके तहत पेशावर से लेकर कराची तक शहरों में चौबीसों घंटे वीडियो रिकॉर्डिंग होने वाला सर्विलांस सिस्टम लगाया जाएगा। इसके तहत सड़कों और प्रमुख बाजारों की निगरानी की जा सकेगी। इस इलाके में नेशनल फाइबर केवल बिछाकर न केवल इंटरनेट बल्कि चीनी टीवी ब्रॉडकास्टिंग को भी पाकिस्तान के घर-घर तक पहुंचाने की चीन सरकार की योजना है ताकि चीनी संस्कृति का प्रसार पाकिस्तान के हरेक हिस्से में हो सके।

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