Pakistan Child Marrige Law: पाकिस्तान के प्रमुख मजहबी नेता और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने शहबाज शरीफ सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और हाल ही में पारित पारिवारिक कानून के सुधारों को खुले तौर पर चुनौती देते हुए नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। शहबाज शरीफ सरकार जहां बाल विवाह रोकथाम बिल 2025 और घरेलू हिंसा अधिनियम 2026 लागू करने वाली है और मौलाना इन कानूनों के विरोध में उतर आए हैं।
फजलुर रहमान ने नेशनल असेंबली में खड़े होकर घोषणा की कि वे कानून का उल्लंघन करने के लिए 10 साल तक के बच्चों के विवाह समारोहों में व्यक्तिगत रूप से शामिल होंगे। उन्होंने प्रस्तावित सुधारों को “इस्लाम-विरोधी” करार दिया और सुझाव दिया कि बाल विवाह को समाप्त करने के लिए सरकार के प्रयास शरिया के विपरीत हैं।
क्या हैं बाल विवाह कानून के प्रावधान?
बता दें कि इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने मई 2025 में हस्ताक्षर किए थे, संघीय राजधानी में लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु 18 वर्ष निर्धारित करता है।
सरकार द्वारा प्रस्तावित ये कानून नाबालिगों के विवाह को संपन्न कराने, उसमें सहयोग करने या उसमें भाग लेने को दंडनीय अपराध बनाता है। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे बाल विवाह को समाप्त करने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया है।
यह भी पढ़ें: ढाका से उड़ा बांग्लादेशी विमान, 14 साल बाद पाकिस्तान के जिन्ना एयरपोर्ट पर हुई लैंडिंग
कानून का करेंगे विरोध?
मौलाना रहमान ने कहा है कि 10, 12, 15 और 16 साल के बच्चों की शादी कराकर वह सरकार के कानूनों का विरोध जताएंगे। उनके इस बयान के बाद पाकिस्तान के राजनीतिक और नागरिक समाज में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
मौलाना फजलुर रहमान ने सरकार के दोनों ही कानूनों को ‘असंवैधानिक और गैरकानूनी’ करार देते हुए कहा कि ये इस्लामी सिद्धांतों के खिलाफ हैं। उन्होंने मांग की कि इन बिलों को समीक्षा के लिए इस्लामिक विचारधारा परिषद को भेजा जाए। उनका कहना है कि संसद को ऐसे मामलों में कानून बनाने का अधिकार नहीं है, जिन्हें वे धार्मिक विषय मानते हैं। ‘बांग्लादेश धोखाधड़ी में विश्व चैंपियन’, चुनाव से पहले ऐसा क्यों बोले मोहम्मद यूनुस?
