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लखवी की रिहाई का आदेश

पाकिस्तान की एक अदालत ने मुंबई हमले के मुख्य षड्यंत्रकारी और लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकीउर रहमान लखवी को लोक व्यवस्था बनाए रखने संबंधी कानून के तहत हिरासत में रखने संबंधी पंजाब सरकार के आदेश को गुरुवार को निलंबित कर दिया और उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया। लाहौर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मुहम्मद अनवारुल हक […]

Author April 10, 2015 9:36 AM
पाकिस्तान में मुंबई हमले की सुनवाई 2009 से चल रही है। मुख्य साजिशकर्ता जकीउर रहमान लखवी को दिसंबर, 2014 में जमानत मिली

पाकिस्तान की एक अदालत ने मुंबई हमले के मुख्य षड्यंत्रकारी और लश्कर-ए-तैयबा के कमांडर जकीउर रहमान लखवी को लोक व्यवस्था बनाए रखने संबंधी कानून के तहत हिरासत में रखने संबंधी पंजाब सरकार के आदेश को गुरुवार को निलंबित कर दिया और उसकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया।

लाहौर हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति मुहम्मद अनवारुल हक ने 55 वर्षीय लखवी की हिरासत को निलंबित कर दिया क्योंकि सरकार अदालत में जरूरी रिकॉर्ड पेश करने में नाकाम रही। न्यायाधीश ने लखवी को आदेश दिया कि वह अपनी रिहाई के लिए दो मुचलकों पर 10-10 लाख रुपए जमा करे। लाहौर हाई कोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कि विधि अधिकारी ने लखवी के बारे में जानकारी सौंपी थी लेकिन अदालत ने उसे स्वीकार नहीं किया और सबूतों असंतोषजनक करार दिया।

न्यायमूर्ति हक ने बीते सात अप्रैल को हुई पिछली सुनवाई पर सरकार के वकील को आदेश दिया था कि वे लखवी की गतिविधियों के बारे में गोपनीय दस्तावेजों के रिकॉर्ड गुरुवार को सुनवाई के दौरान अदालत को सौंपे।

लखवी ने पंजाब सरकार के जिला समन्वय अधिकारी (ओकारा) के 14 मार्च के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उसे 30 दिन के लिए हिरासत में रखने की बात की गई थी।

लखवी के वकील राजा रिजवान अब्बासी ने दलील दी कि लाहौर हाई कोर्ट के पहले के निर्देश के मुताबिक उनके मुवक्किल ने पंजाब के गृह सचिव के समक्ष अपनी ‘गैरकानूनी’ हिरासत के बारे में अपना पक्ष रखा था। लेकिन गृह सचिव ने इसे खारिज कर दिया और 30 दिन तक हिरासत में रखने संबंधी जिला समन्वय अधिकारी के आदेश को बरकरार रखा।

अब्बासी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को समीक्षा बोर्ड से आदेश मिले बिना 90 दिन से ज्यादा हिरासत में नहीं रखा जा सकता और उनके मुवक्किल की 90 दिन की हिरासत की मियाद पूरी हो चुकी है। प्रांतीय समीक्षा बोर्ड में हाई कोर्ट के न्यायाधीश होते हैं।

रिजवान ने कहा कि निचली अदालत ने लखवी को दिसंबर, 2014 में जमानत पर रिहा किया था, लेकिन इस्लामाबाद के जिला मजिस्ट्रेट ने उसके खिलाफ हिरासत का आदेश जारी किया। बाद में इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने लखवी की हिरासत के आदेश को रद्द कर दिया और उसकी रिहाई का आदेश दिया। इसके बाद पंजाब के ओकारा के जिला समन्वय अधिकारी की ओर से हिरासत संबंधी आदेश जारी किया गया और उसे रिहा नहीं किया गया।

लखवी ने लाहौर हाई कोर्ट में गुहार लगाई थी कि उसके खिलाफ हिरासत संबंधी आदेश को निरस्त किया जाए और उसकी रिहाई के लिए सरकार को निर्देश दिया जाए। भारत ने बीते 13 मार्च को आए इस्लामाबाद हाई कोर्ट के आदेश पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हुए कहा था कि पाकिस्तानी एजंसियों ने लखवी के खिलाफ पर्याप्त सबूत अदालत के समक्ष पेश नहीं किए।

मुंबई में नवंबर, 2008 के आतंकी हमलों के संदर्भ में लखवी के अलावा छह अन्य अभियुक्तों अब्दुल वाजिद, मजहर इकबाल, हम्माद अमीन सादिक, शाहिद जमील रियाज, जमील अहमद और यूनुस अंजुम के खिलाफ मामला चल रहा है। लखवी को जमात उद दावा के संस्थापक सरगना हाफिज सईद का बेहद करीबी माना जाता है।

पाकिस्तान में मुंबई हमले का मामला 2009 से मामला चल रहा है। इस हमले में 166 लोग मारे गए थे।

न्यायाधीश ने लखवी को आदेश दिया कि वह अपनी रिहाई के लिए दो मुचलकों पर 10-10 लाख रुपए जमा करे। लाहौर हाई कोर्ट के एक अधिकारी ने बताया कि विधि अधिकारी ने लखवी के बारे में जानकारी सौंपी थी लेकिन अदालत ने उसे स्वीकार नहीं किया और सबूतों असंतोषजनक करार दिया।

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