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परवेज मुशर्रफ सजा मामले में नया पेंच, कोर्ट ने कहा- पूर्व तानाशाह की गैर मौजूदगी में केस चलाना इस्लाम के खिलाफ

इस्लामाबाद की एक विशेष अदालत ने पिछले साल 17 दिसंबर को 74 वर्षीय सेवानिवृत जनरल को मृत्युदंड सुनाया था।

Author Edited By Sanjay Dubey लाहौर | Published on: January 28, 2020 5:18 PM
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ (फाइल फोटो)

पाकिस्तान की एक अदालत ने कहा है कि किसी की गैरमौजूदगी में उस पर मुकदमा चलाना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के साथ-साथ इस्लामी न्याय के भी खिलाफ है। अदालत ने स्वनिर्वासित पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ की याचिका पर विस्तार से फैसला जारी किया। इस याचिका में मुशर्रफ ने देशद्रोह के गंभीर मामले के दोष में उन्हें मौत की सजा सुनाए जाने के खिलाफ चुनौती दी है।

इस्लामाबाद की एक विशेष अदालत ने पिछले साल 17 दिसंबर को 74 वर्षीय सेवानिवृत जनरल को मृत्युदंड सुनाया था। देशद्रोह के हाई प्रोफाइल मामले में उनके खिलाफ छह साल तक मुकदमा चला था। लाहौर उच्च न्यायालय ने 13 जनवरी को संक्षिप्त आदेश के जरिए उनके मुकदमे को “असंवैधानिक” बताया था, जिससे पाकिस्तान के पूर्व सैन्य प्रमुख को सुनाई गई मौत की सजा रद्द हो गई।

‘डॉन’ समाचारपत्र ने खबर दी कि लाहौर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति सैयद मजहर अली अकबर नकवी द्वारा लिखे गए विस्तृत आदेश में पाया गया कि पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश और पांच उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों के साथ विचार-विमर्श कर गठित की गई विशेष अदालत का संविधान में कोई प्रावधान नहीं है।

पीठ ने सोमवार को कहा, “यह बेशक साबित होता है कि विशेष अदालत का गठन पूरी तरह अवैध/अनुचित और बिना अधिकार के था।” खबर के मुताबिक पीठ ने कहा कि गैर मौजूदगी में मुकदमा चलाने का सिद्धांत न सिर्फ पाक कुरान और सुन्नत में स्थापित इस्लामी न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध है बल्कि नैर्सिगक न्याय के सुनहरे सिद्धांतों के भी विपरीत है।

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