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पाकिस्तान: वीडियो लिंक के माध्यम से मुंबई हमलों की सुनवायी से कोर्ट का इंकार

लाहौर। पाकिस्तान की आतंकवाद-निरोधी अदालत ने 2008 में हुए मुंबई हमलों के सातों आरोपियों के खिलाफ वीडियो लिंक के जरिए सुनवायी करने की याचिका खारिज करते हुए अधिकारियों से गवाहों और अन्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। मुंबई हमलों के सात आरोपियों में लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेशंस कमांडर जकिउर रहमान लख्वी शामिल हैं। इस्लामाबाद की […]

Author November 13, 2014 12:40 AM
कर्नल की बीवी से अवैध संबंध बनाने के आरोप में ब्रिगेडियर की चार साल के लिए पदोन्नति रोक दी गई है। (फाइल फोटो)।

लाहौर। पाकिस्तान की आतंकवाद-निरोधी अदालत ने 2008 में हुए मुंबई हमलों के सातों आरोपियों के खिलाफ वीडियो लिंक के जरिए सुनवायी करने की याचिका खारिज करते हुए अधिकारियों से गवाहों और अन्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा। मुंबई हमलों के सात आरोपियों में लश्कर-ए-तैयबा के ऑपरेशंस कमांडर जकिउर रहमान लख्वी शामिल हैं।

इस्लामाबाद की आतंकवाद-निरोधी अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति कौसर अब्बास जैदी ने सुरक्षा कारणों से गवाहों का रिकॉर्ड किया हुआ बयान अदालत को सौंपने के संबंध में अभियोजन पक्ष के अनुरोध को खारिज कर दिया।

अदालती सूत्रों ने पीटीआई (भाषा) को बताया, ‘‘अदालत ने अभियान की याचिका खारिज कर दी और आदेश दिया कि मामले की सुनवायी रावलपिंडी के अदिआला जेल में ही चलेगी। उसने गवाहों और अन्य लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश भी दिए।’’

अपने तबादले से कुछ महीने पहले न्यायमूर्ति अतिकुर रहमान ने ‘‘खराब सुरक्षा इंतजाम’’ का हवाला देते हुए अदिआला जेल में मामले की सुनवायी रोक दी थी।

अभियोजन पक्ष के वकीलों ने कहा, ‘‘सुरक्षा कारणों को देखते हुए हम अदालत से अनुरोध करते हैं कि वह अपनी और गवाहों की सुरक्षा के लिए सुनवायी वीडियो लिंक के माध्यम से करे।’’

बचाव पक्ष के वकीलों ने अभियोजन पक्ष की याचिका के विरोध में दलील देते हुए कहा कि यह संवेदनशील तथा बंद कमरे में होने वाली सुनवायी है। यदि इसे वीडियो लिंक के माध्यम से करने की अनुमति दी गई तो अदालत की सुनवायी तक कई लोगों की पहुंच बन जाएगी। अदालत सीडी के रूप में गवाहों के बयान को कैसे स्वीकार करेगी ?’’

उन्होंने कहा, ‘‘इसके साथ आसानी से छेड़छाड़ की जा सकती है और किसी प्रकार से यह अदालत में स्वीकार्य नहीं होगा। इसलिए अदालत को अभियोजन पक्ष की याचिका खारिज कर देनी चाहिए।’’

सूत्रों ने बताया कि इस मामले के दो गवाह भी आज अदालत में उपस्थित हुए। उनमें से एक संघीय जांच एजेंसी से था और दूसरा विदेश मंत्रालय से।
विदेश मंत्रालय के अधिकारी ने भारत से अजमल कसाब के बयान की प्रतिलिपि प्राप्त होने और उसे एफआईए को सौंपने की बात अदालत को बतायी। एफआईए के अधिकारी ने प्रतिलिपि प्राप्त होने की पुष्टि की।

इससे पहले अभियोजन पक्ष ने जमात-उद-दावा कार्यकर्ताओं की ओर से उन्हें मिल रही धमकियों के संबंध में अदालत को सूचना दी। न्यायाधीश ने मामले की सुनवायी 19 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी है।

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