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पाकिस्‍तान, श्रीलंका, बांग्‍लादेश, लाओस… बहुत लंबी है चीन के कर्ज से बर्बाद हो रहे देशों की लिस्‍ट

बांग्लादेश के वित्त मंत्री ने विकासशील देशों को चीन से कर्ज न लेने की सलाह तक दे डाली है। वो बोले कि किसी भी मुल्क को चीन की बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव स्कीम में शामिल होने से पहले दो मर्तबा सोचना चाहिए।

पाकिस्‍तान, श्रीलंका, बांग्‍लादेश, लाओस… बहुत लंबी है चीन के कर्ज से बर्बाद हो रहे देशों की लिस्‍ट
चीन एलएसी के नजदीक इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के साथ अब तिब्बतियों की रिकॉर्ड संख्या में सेना में भर्ती कर रहा है। (फाइल फोटो)

कुछ समय पहले बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था 416 अरब डॉलर तक हो गई थी। लेकिन अब उस उस पर आर्थिक संकट आ गया है। हालात इस कदर बदतर हो चुके हैं कि यहां तेल की कीमतें 51.7 फीसदी तक बढ़ानी पड़ी हैं। सब्सिडी का बोझ कम करने के लिए सरकार ने ये कदम उठाया है। लेकिन इससे मुद्रास्फीति बढ़ने के आसार हैं। अब चर्चा होना शुरू हो गई है कि कहीं बांग्लादेश का भी हाल श्रीलंका जैसे तो नहीं होने वाला, क्योंकि श्रीलंका की तरह से ये मुल्क भी चीनी कर्ज के बोझ तले बुरी तरह से दबा हुआ है।

एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चीन ने बांग्लादेश को अपने कर्ज के जाल में फंसा लिया है। चीन के मालिकाना हक वाली 4 कंपनियों ने हाल ही में बांग्लादेश के चटगांव में एक जमीन पर स्मार्ट सिटी बनाने और मेट्रो रेल परियोजना लगाने का प्रपोजल दिया। इस पूरे प्रपोजल में अधिक फायदे का हिस्सा चीनी कंपनियों ने अपने पास रखा है। एक्सपर्ट के मुताबिक चीन की स्मार्ट सिटी परियोजना से पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। अब चीन उसे दोहरी मार देने की तैयारी में भी है। वो बांग्लादेश के प्रोडक्ट पर ड्यूटी फीस 99 फीसदी कर रहा है। ये 1 सितम्बर से लागू हो जाएगी।

बांग्लादेश किस कदर हताश है कि वहां के वित्त मंत्री मुस्तफा कमाल ने विकासशील देशों को चीन से कर्ज न लेने की सलाह तक दे डाली है। उनका कहना है कि किसी भी मुल्क को चीन की बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव स्कीम में शामिल होने से पहले दो मर्तबा सोचना चाहिए। उनका कहना है कि हर कोई चीन को ही अपनी बर्बादी के लिए जिम्मेदार ठहरा रहा है। चीन इससे अपना पल्ला नहीं झाड़ सकता। उसे इसके लिए जिम्मेदारी तो लेनी ही होगी। ध्यान रहे कि चीन का BRI प्रोजेक्ट 70 देशों तक फैला है।

हालांकि ऐसा नहीं है कि चीन से कर्ज लेने वाले देशों की फेहरिस्त में केवल बांग्लादेश और श्रीलंका ही शामिल हैं। पाकिस्तान की हालत किसी से छिपी नहीं है। वो उबरने के लिए कैसे बार बार IMF (इंटरनेशनल मोनेटरी फंड) के पास गुहार लगा रहा है, ये सबने देखा है। नेपाल ने विदेशी चीजों को खरीदना बंद कर दिया है, क्योंकि उसे लगता है कि पहले से ही खाली चल रही विदेशी मुद्रा कोष इससे और ज्यादा परेशानी में आ जाएगा। जानकार कहते हैं कि दोनों ही देशों की बदहाली के लिए चीन जिम्मेदार है।

लिस्ट में और भी कई देश शामिल हैं जो चीन के चंगुल में फंसकर कराह रहे हैं। इनमें साउथ ईस्ट एशिया की देश लाओस भी शामिल है। इंफ्रा को मजबूत करने के लिए उसने भी चीन से भारी भरकम कर्ज लिया है। लाओस की हालत इस बात से ही झलक जाती है कि रेटिंग फर्म मूडीज ने उसे Caa3 की रेटिंग दी है। विश्व बैंक की रिपोर्ट कहती है कि लाओस का कर्ज 2021 में उसकी जीडीपी का 88 फीसदी हो चुका है। अमेरिकी मुद्रा में य़े रकम 14.5 अरब डॉलर की है। इनमें आधा चीनी कर्जा है।

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