Pakistan Army Reject Qamar Javed Bajwa Remarks for Read Indian Democracy - Jansatta
ताज़ा खबर
 

बाजवा के बयान ‘भारत के बारे में किताब पढ़ो’ को पाकिस्तानी सेना ने बताया ‘दुष्प्रचार’

सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफ्फूर ने बयान जारी कर खबर से इंकार किया।

Author इस्लामाबाद | February 20, 2017 11:14 PM
पाकिस्‍तानी सेना के नए प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा। (फाइल फोटो)

कई दिनों की चुप्पी के बाद पाकिस्तान की सेना ने मीडिया की उन खबरों को ‘दुष्प्रचार’ बताते हुए खारिज किया है कि सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने अधिकारियों से अपील की थी कि भारत के बारे में किताब पढ़ें कि किस तरह से सेना को राजनीति से अलग रखकर वह सफल हुआ है। ‘द नेशन’ अखबार ने 12 फरवरी को खबर दी थी कि बाजवा ने दिसम्बर में रावलपिंडी गैरीसन स्थित सेना मुख्यालय में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को संबोधित किया और कहा कि वे स्टीवन विलकिंसन की किताब ‘आर्मी एंड नेशन : द मिलिट्री एंड इंडियन डेमोक्रेसी सिन्स इंडिपेंडेंस’ को पढ़ें। किताब में भारतीय सेना के ढांचे और भर्ती प्रक्रिया में बदलाव का ब्यौरा है।

सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफ्फूर ने बयान जारी कर खबर से इंकार किया। उन्होंने फेसबुक पर बयान में कहा, ‘सीओएएस के हवाले से रावलपिंडी में अधिकारियों को ‘आर्मी एंड नेशन’ के बारे में संबोधन संबंधी खबर…बयान गलत है।’ खबर दी गई थी कि बाजवा ने संबोधन में देश में नागरिक…सैन्य समीकरण के जटिल मुद्दे का जिक्र किया जहां 1947 में स्वतंत्रता के बाद से ही सेना ने करीब आधे समय तक शासन किया है।

पाकिस्तानी सेना प्रमुख बाजवा ने सैन्य अधिकारियों से कहा, भारतीय लोकतंत्र से सीखें कैसे सेना को सियासत से अलग रखना है

पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को एक असामान्य सी सलाह देते हुए उनसे कहा कि सरकार चलाना सेना का काम नहीं है और कहा कि वे एक किताब पढ़ें जिनमें बताया गया है कि कैसे भारत सेना को सियासत से अलग रखने में कामयाब रहा। पाकिस्तानी अंग्रेजी दैनिक ‘द नेशन’ के अनुसार बाजवा ने कहा, ‘सरकार चलाने की कोशिश करना फौज का काम नहीं है। फौज को संविधान से परिभाषित अपनी भूमिका तक सीमित रहना चाहिए।’ बाजवा ने अपने अधिकारियों से कहा कि वे आजादी के बाद असैनिक सरकार के साथ भारतीय सेना के रिश्तों के बारे में येल युनिवर्सिटी के राजनीति शास्त्र एवं अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर स्टीवन आई विल्किंसन की लिखी किताब ‘आर्मी ऐंड नेशन’ (सेना एवं राष्ट्र) पढ़ें। बाजवा ने यह टिप्पणी दिसंबर में सैन्य मुख्यालय की रावलपिंडी गैरिसन में वरिष्ठ सैनिक अधिकारियों के एक समूह के बीच की थी और यह पाकिस्तान की असैन्य सरकार के साथ पाकिस्तानी सेना के रिश्तों में तब्दीली का एक संकेत है जो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार के लिए एक शुभ समाचार हो सकता है। बाजवा के पूर्वाधिकारी राहील शरीफ से शरीफ सरकार के तल्खी भरे रिश्ते थे।

बाजवा ने अपने अधिकारियों को साफ साफ कहा है कि पाकिस्तान में सेना और असैनिक सरकार के बीच स्पर्धा नहीं सहयोग होनी चाहिए। पाकिस्तान में सैन्य और असैन्य नेतृत्व के बीच समीकरण हमेशा एक कठिन और जटिल मुद्दा रहा है। आजादी के बाद से पाकिस्तानी इतिहास का आधा काल सैनिक तानाशाहों के राज का रहा है। प्रत्यक्ष सैन्य सरकार का नवीनतम काल 2008 में समाप्त हुआ, लेकिन परदे के पीछे अब भी सेना को बहुत शक्ति और प्रभाव हासिल है। बाजवा ने कहा कि असैनिक नेतृत्व और सैनिक नेतृत्व के बीच प्रतियोगिता की छवि देश के लिए अच्छा नहीं है। विल्किंसन की किताब में स्वातंत्रयोत्तर भारत के तरुण लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए भारतीय सेना की संरचना और नियुक्ति प्रणाली में बदलाव का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। अभी तक सेना या असैन्य सरकार ने जनरल बाजवा की टिप्पणी पर कुछ नहीं कहा है।

पाकिस्तान: सूफी दरगाह में हुए धमाके में 75 से ज्यादा लोगों की मौत, ISIS ने ली हमले की जिम्मेदारी

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ गूगल प्लस पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App