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पाक के प्रति अमेरिका का धैर्य दे रहा है जवाब: अमेरिकी मीडिया

न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में अमेरिका के पूर्व अधिकारियों के हवाले से कहा गया, ‘बलूचिस्तान में हमले को भी इस संकेत के रूप में देखा गया कि ओबामा प्रशासन तालिबान उग्रवाद के खिलाफ कड़ा रूख अख्तियार करने में पाकिस्तान की विफलता के प्रति अपना धैर्य खोता जा रहा है।

Author न्यू यार्क | May 23, 2016 11:54 PM
अफगान तालिबान के प्रमुख मुल्ला अख्तर मंसूर को पाकिस्तान में मार गिराने वाले अमेरिकी ड्रोन हमले के बारे में अमेरिकी मीडिया ने कहा कि यह हमला इस बात का संकेत है कि ओबामा प्रशासन तालिबान उग्रवाद से निपटने में पाकिस्तान की विफलता के प्रति धैर्य खोता जा रहा है।

अफगान तालिबान के प्रमुख मुल्ला अख्तर मंसूर को पाकिस्तान में मार गिराने वाले अमेरिकी ड्रोन हमले के बारे में अमेरिकी मीडिया ने कहा कि यह हमला इस बात का संकेत है कि ओबामा प्रशासन तालिबान उग्रवाद से निपटने में पाकिस्तान की विफलता के प्रति धैर्य खोता जा रहा है। न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में अमेरिका के पूर्व अधिकारियों के हवाले से कहा गया, ‘बलूचिस्तान में हमले को भी इस संकेत के रूप में देखा गया कि ओबामा प्रशासन तालिबान उग्रवाद के खिलाफ कड़ा रूख अख्तियार करने में पाकिस्तान की विफलता के प्रति अपना धैर्य खोता जा रहा है।

पाकिस्तान के शक्तिशाली सैन्य प्रतिष्ठान ने अलकायदा और उत्तरपश्चिमी कबायली इलाकों में पाकिस्तानी तालिबान के खिलाफ ड्रोन हमलों के सीआइए के अभियान में चुपचाप साथ दिया था लेकिन पिछले कुछ समय में उसने बलूचिस्तान में ड्रोन हमलों को विस्तार देने के खुफिया एजंसी के अनुरोधों को नकार दिया है।’ रिपोर्ट में अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि शनिवार को अफगानी आतंकियों के नेता के खिलाफ किया गया हमला एक मिसाल कायम करने वाली बड़ी उपलब्धि है क्योंकि अमेरिका ने पाकिस्तान की जानकारी के बिना वहां उग्रवाद को मजबूत होने से रोकने की कोशिश की है।

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रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका और अफगानिस्तान की सरकार ने बहुत पहले ही कह दिया था कि उग्रवादियों के खिलाफ कड़ा वैश्विक अभियान चलने के बावजूद उनके पनपने की मुख्य वजह पाकिस्तान की सीमा पर और विशेषकर बलूचिस्तान में तालिबान के सुरक्षित ठिकाने हैं। एक समय पर उग्रवादियों के खिलाफ अभियान में लगभग डेढ़ लाख अंतरराष्ट्रीय सैनिक शामिल थे। एक अन्य खबर में, द वाशिंगटन पोस्ट ने कहा कि ‘पाकिस्तानी धरती पर चार साल से शरण पाए हुए उग्रवादी समूह को उखाड़ फेंकने के प्रयास के तहत किया गया यह ड्रोन हमला अफगानिस्तान में चल रहे युद्ध में अमेरिकी भागीदारी में बढ़ोतरी को दर्शाता है।’ द पोस्ट ने ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन में दक्षिण एशिया विशेषज्ञ ब्रूस रीडेल के हवाले से कहा, ‘तालिबान की अगुआई को उसके पाकिस्तान स्थित सुरक्षित ठिकाने में जाकर मारने का यह अभूतपूर्व कदम है।’ उन्होंने कहा ‘यह तालिबान को बढ़ावा और संरक्षण देने की पाकिस्तान की भूमिका को उजागर करता है और इससे अमेरिका और पाकिस्तान के संबंधों में संकट को बढ़ावा मिलता है।’ अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी के हवाले से न्यूयार्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका द्वारा बलूचिस्तान में ड्रोन हमलों को विस्तार दिया जाना दिखाता है कि ‘अमेरिका पाकिस्तान के वादों के प्रति अपना धैर्य खोता जा रहा है।’

हक्कानी ने कहा, ‘तालिबान उग्रवाद संभवत: जारी रहेगा लेकिन पाकिस्तान के पास एक और मौका है कि वह अफगान स्थिरता पर मंडराने वाले सबसे बड़े खतरे को अपना समर्थन देना बंद कर दे।’ मंसूर के खिलाफ राष्ट्रपति बराक ओबामा की अनुमति वाला हमला बोले जाने से पहले तक वाशिंगटन में एक के बाद एक आए प्रशासक पाकिस्तान को गुस्सा दिलाने के डर से तालिबानी ठिकानों पर कार्रवाई करने से बचते रहे। रिपोर्ट में कहा गया, ‘इसके बजाय अमेरिकी अधिकारियों ने अपना ध्यान पाकिस्तानी सेना पर यह दबाव बनाने पर केंद्रित रखा कि वह तालिबान नेतृत्व को अफगान सरकार के साथ शांति वार्ताओं में शामिल होने के लिए राजी करवाए।’ अमेरिका के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तानी अधिकारियों को मंसूर के खिलाफ हमले के बारे में तभी जानकारी दी गई, जब हमला हो चुका था। मंसूर की जगह कौन लेगा, इसके बारे में रिपोर्ट में कहा गया कि एक प्रमुख उम्मीदवार सिराजुद्दीन हक्कानी होगा, जो मंसूर के सबसे ज्यादा खूंखार सहायकों में से एक है। वह हालिया महीनों में युद्धक अभियान चलाता रहा है।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘पाकिस्तानी खुफिया एजंसी से करीबी संबंध होने के कारण सिराजुद्दीन हक्कानी व्यापक तौर पर तालिबान का समर्थन हासिल करने के लिए संघर्ष कर सकता है। क्योंकि उसका छोटा लेकिन घातक नेटवर्क हाल के महीनों में ही पूरी तरह से व्यापक उग्रवादी समूहों से जुड़ा है।

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