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भारत के लिए आसमान पर बैन से पाकिस्तान को हो चुका है 10 करोड़ डॉलर का नुकसान, जानें कैसे होती थी कमाई

बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद से पाकिस्तान ने अपना हवाई क्षेत्र भारतीय विमानों के लिए प्रतिबंधित कर रखा है। पाकिस्तान को इस प्रतिबंध लगाने से अब तक 10 करोड़ डॉलर तक का नुकसान हो चुका है।

पाकिस्तान ने फॉरवर्ड बेस से भारतीय वायुसेना के विमानों को हटाने तक भारत के लिए अपना एयरस्पेस खोलने से इनकार किया है। (फाइल फोटो/रॉयटर्स)

अपने एयरस्पेस में भारतीय विमानों के प्रवेश पर प्रतिबंध से पाकिस्तान को अब तक 10 करोड़ डॉलर का नुकसान हो चुका है। पाकिस्तान करीब 6 महीने बाद भी भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस खोलने को तैयार नहीं है।

पाकिस्तानी विमानन सचिव शाहरुख नुसरत ने कहा कि भारत जब तक फॉरवर्ड पोस्ट से जब तक अपने वायुसेना के विमानों को नहीं हटाता है तब तक पाकिस्तानी हवाई सीमा को उनके विमानों के लिए नहीं खोला जाएगा।

मालूम हो कि पाकिस्तान ने बालाकोट में आंतकी शिविर पर भारत की तरफ से एयर स्ट्राइक के बाद फरवरी में अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया था। भारत ने पुलवामा हमले के बाद 26 फरवरी को जैश के आतंकी शिविर एयर स्ट्राइक की थी। नुसरत का कहना था कि भारत ने पाकिस्तान से एयरस्पेस खोलने का आग्रह किया था।

इसके बाद हमने भारत को अपनी चिंताओं से अवगत कराया। एयरस्पेस पर प्रतिबंध से जहां भारतीय विमानन कंपनियों को अधिक ईंधन और उड़ान पर पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं वहीं पाकिस्तान को भी करोड़ों डॉलर का नुकसान हो चुका है। औसत 400 अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट रोजाना पाकिस्तान के एयरस्पेस से गुजरने से परहेज कर रही हैं। कोई भी देश अपने हवाईक्षेत्र से गुजरने वालों विमानों से एक निश्चित राशि फीस के रूप में लेता है।

यह फीस उस देश के संबंधित विमानन प्राधिकरण को देनी होती है। हर देश के एयर स्पेस का प्रयोग करने के शुल्क के लिए अपने नियम होते हैं। यह फीस एयरक्राफ्ट के प्रकार और उसके द्वारा तय की गई दूरी के आधार पर तय होता है।

बोइंग 737 के लिए 40 हजार रुपयेः पाकिस्तान अपने एयरस्पेस से गुजरने वाले एक बोइंग 737 विमान से करीब 40 हजार रुपये (580 अमेरिकी डॉलर) रुपये फीस के रूप में वसूलता है। अमेरिका समुद्र के ऊपर से उड़ान के लिए प्रति 100 नॉटिकल माइल करीब 1800 रुपये वसूलता है। वहीं जमीन के ऊपर उड़ान के लिए 4200 रुपये वसूलता है।

भारत में डीजीसीए तय करता है फीसः भारत के लिए डीजीसीए विमानों के उड़ान की फीस तय करता है। अंतरराष्ट्रीय विमानों के लिए घरेलू उड़ानों की तुलना में अधिक फीस वसूली जाती है। भारत में एयरलाइन की फीस विमानों की दूरी, वजन और भारत में लैंड करने के आधार पर तय होती है। कनाडा भी भारत की तर्ज पर ही एयरस्पेस के लिए फीस वसूल करता है।

अमेरिका को होता है बड़ा फायदाः प्रशांत क्षेत्र और अटलांटिक महासागर का अधिकांश हिस्सा अमेरिका के हवाई क्षेत्र में आता है। ऐसे में यदि कोई फ्लाइट न्यूजीलैंड से कनाडा जाती है तो भी अमेरिका इस फ्लाइट से एयरस्पेस फीस वसूलता है। ऐसे में अमेरिका को अधिक फायदा होता है।

एयरस्पेस बना राजनीतिक हथियारः हालांकि, एयरस्पेस का मुद्दा राजनीतिक हथियार भी बन रहा है। इसका उदाहरण मिडिल ईस्ट में देखने को मिला। कतर और अन्य अरब देशों के बीच गतिरोध के दौरान देखने को मिला। इसका परिणाम हुआ कि इन देशों ने एक दूसरे के लिए अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया।

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