Afghan Taliban Targets Pakistan Nur Khan Airbase: अफगानिस्तान में सत्ता संभाल रहे अफगान तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के कई अहम सैन्य ठिकानों पर सफल हवाई हमले किए हैं। इनमें रावलपिंडी में नूर खान एयरबेस, क्वेटा में 12वीं कोर मुख्यालय, खैबर पख्तूनख्वा के मोहम्मंद एजेंसी में खोविजू कैंप और गुलनी मिलिट्री बेस का नाम शामिल है।
अफगानिस्तान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि अफगान वायु सेना ने महत्वपूर्ण पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए प्रभावी हवाई हमले किए। इस पोस्ट में लिखा गया, “वायु सेना ने आज एक बार फिर पाकिस्तान के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर प्रभावी हवाई हमले किए। इन हमलों में रावलपिंडी स्थित नूर खान बेस, बलूचिस्तान के क्वेटा में 12वीं ब्रिगेड बेस, खैबर पख्तूनख्वा के मोहम्मंद एजेंसी में खोइजाई कैंप और पाकिस्तान के कुछ अन्य मिलिट्री बेस शामिल है। यहां पर कई अहम सैन्य सुविधाएं और केंद्र भी स्थित हैं। इन हमलों से इन ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है।”
पाकिस्तानी हमले का दिया जवाब- अफगानिस्तान
इस बयान में आगे कहा गया, “शुरुआती आकलन के आधार पर हमलों से ठिकानों को काफी नुकसान पहुंचा है। ये अभियान पाकिस्तानी सेना द्वारा हाल ही में किए गए हवाई हमलों के जवाब में चलाए गए, जिनमें कल रात और आज सुबह काबुल, बगराम और कई अन्य क्षेत्रों पर हमले शामिल थे। यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पाकिस्तान की तरफ से हमारे एयरस्पेस का कोई भी उल्लंघन का सही जवाब दिया जाएगा।” अफगानिस्तान ने ड्रोन का एक वीडियो और पाकिस्तानी एयरपोर्ट की तस्वीरें भी शेयर की हैं।
गौरतलब है कि पाकिस्तान ने 27 फरवरी को अफगानिस्तान तालिबान के खिलाफ खुली जंग की घोषणा कर दी। पाकिस्तानी सेना ने हवाई हमलों में 270 से ज्यादा तालिबान लड़ाकों को मार गिराने और 400 से ज्यादा को घायल करने का दावा किया है, जबकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबिहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि उनकी सेनाओं ने 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया और पाकिस्तान के अंदर उन ठिकानों को निशाना बनाया जिन्हें उन्होंने अहम टारगेट बताया। इस झड़प से अमेरिका समेत विश्व के नेताओं ने चिंता जाहिर की है।
डूरंड लाइन: आखिर इस बॉर्डर पर झगड़ा क्यों है?
इस पूरे विवाद की जड़ डूरंड लाइन है। यह 2611 किमी लंबी वह सीमा रेखा है जिसे 19वीं सदी में ब्रिटिश शासन के दौरान खींचा गया था। पाकिस्तान इसे अपनी आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, लेकिन अफगानिस्तान की कोई भी सरकार (चाहे वो पिछली हो या अब की तालिबान सरकार) इसे मानने को तैयार नहीं है। अफगानिस्तान का कहना है कि यह रेखा उनके देश को बांटती है। यही वजह है कि यहां अक्सर गोलीबारी और तनाव बना रहता है।
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पाकिस्तान ने शुक्रवार (27 फरवरी) को काबुल और दो दूसरे अफगान प्रांतों पर भीषण बमबारी की। यह हमला अफगानिस्तान के पाकिस्तानी सैनिकों पर बॉर्डर पार से हमला करने के कुछ ही घंटों बाद किया गया। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इस स्थिति को अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के साथ ‘खुली जंग’ बताया। पाक ने पहले ही आरोप लगाया था कि अफगानिस्तान पाकिस्तान के अंदर हमले करने वाले मिलिटेंट्स को पनाह देता है। लेकिन दोनों देशों के बीच के मुद्दे इतिहास में बहुत पुराने हैं। पढ़ें पूरी खबर…
