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महंगाई की मार से पाकिस्‍तानी हलकान, कहा- गरीबों को मिटा रहे इमरान खान

पाकिस्तान में इमरान खान की सरकार आने के बाद भी आम पाकिस्तानी काफी दुखी हैं। पाकिस्तान के लोग इमरान खान की सरकार पर जनता से किए वादे पूरे नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं। देश में महंगाई और गरीबी बढ़ रही है।

पाकिस्तान में महंगाई दर साल 2013 के बाद से सबसे अधिक पहुंच गई है। (फाइल फोटोः रॉयटर्स)

पाकिस्तान में नई सरकार बनने के बाद भी महंगाई, गरीबी समेत आम के लोगों की रोजमर्रा की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पाकिस्तान ने नए प्रधानमंत्री इमरान खान ने लोगों से जो वादा किया था वो उनको पूरा करने में अभी तक नाकामयाब रहे हैं। पाकिस्तान में तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

इमरान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) ने सत्ता में आने से पहले देश से गरीबी दूर करने, नई नौकरियों के अवसर पैदा करने और एक इस्लामिक कल्याणकारी राज्य बनाने का वादा किया था।

पाकिस्तान में कुशल कारीगर प्रतिदिन 1000-1300 रुपये तक कमा रहे हैं जबकि मजदूरों का आय 600-800 रुपये प्रतिदिन है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि बढ़ती कीमतों के कारण जरूरी चीजों के साथ ही अन्य चीजें भी लोगों की पहुंच से दूर हो रही हैं। स्थानीय टैक्सी ड्राइवर 30 वर्षीय यासिर सुल्तान का कहना है कि इमरान ने गरीबी को मिटाने के लिए बड़ी-बड़ी बातें की थी लेकिन वह अब गरीबों को ही मिटाने में लगे हुए हैं।

इमरान के पास 80 के दशक की सूजुकी मेहरान कार है। पेट्रोल की कीमत 98 रुपये प्रति लीटर का हवाला देते हुए यासिर कहते हैं, ‘मैं कभी-कभी सोचता हूं कि टैक्सी को ही आग लगा दूं।’ लाहौर सिटी की रहने वाली सारा सलमान का कहना है, ‘मैंने खान के बदलाव के नारे पर विश्वास कर पीटीआई को वोट दिया था लेकिन अब मैं पछता रही हूं। ‘

लाहौर की स्कूल टीचर मुहम्मद वकास का कहना है, ‘मौजूदा वित्तीय नीतियां और मूल्यों में वृद्धि लोगों के अपमान को दर्शाती है।’ उन्होंने कहा कि यदि पीटीआई सरकार लोगों की इन समस्याओं को दूर नहीं कर सकती तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। सूचना मंत्री फवाद चौधरी का कहना है कि तेल की कीमतों में वृद्धि और मुद्रा का अव्यमूल्यन करने के लिए बाध्य थे।

उन्होंने कहा कि जल्द ही चीजों में सुधार होगा। पाकिस्तान के डॉन न्यूजपेपर के बिजनेस एडिटर खुर्रम हुसैन कहते हैं कि सरकार को आर्थिक रूप से कड़े समझौते करने होंगे।

आईएमएफ से मदद मांग रहा पाकः पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति यह है कि वह अपने चालू घाटे को पाटने के लिए अंतरराष्ट्री मुद्रा कोष से 13वीं बार बेल आउट पैकेज की मांग कर रहा है। पाकिस्तान को नकद अधिशेष का सामना करना पड़ रहा है ऐसे में पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था कभी भी ढह सकती है। कलेक्टिव फॉर सोशल साइंस रिसर्च के अर्थशास्त्री असद सईद कहते हैं कि पाकिस्तान के पास इस साल के शुरू में 8.5 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा का भंडार था।

वर्तमान में उसके पास सिर्फ दो महीने के आयात के लिए ही विदेशी मुद्रा बची हुई है। पाकिस्तान में मांग के स्थिर होने से चालू घाटा और व्यापार घाटा बढ़ गया है। इस साल मार्च में मुद्रास्फीति की दर 9.4 से ऊपर थी। यह मार्च 2013 के बाद से सबसे अधिक है। पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने अगले 12 महीने में 3.5 से 4 फीसदी की विकास दर का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। जबकि सरकार ने 6.4 फीसदी विकास दर का लक्ष्य निर्धारित किया था।

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