US-Israel-Iran War News: अमेरिका और इजरायल को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किए एक महीना हो चुका है। इसकी वजह से पश्चिम एशिया अराजकता और हिंसा की चपेट में है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से युद्ध खत्म करने के लिए संभावित वार्ता की बात करने के बावजूद लड़ाई जारी है।

इजरायल ने ईरान के एक प्रमुख स्टील प्लांट पर हमला किया है, जबकि ईरानी सेना ने ओमान तट के पास एक अमेरिकी मिलिट्री पोत को निशाना बनाया है। यमन के हूतियों के संघर्ष में शामिल होने से युद्ध का दायरा बढ़ गया है। इजरायल की सेना ने कहा कि उसने शनिवार (28 मार्च) की सुबह यमन से इजरायल की ओर दागी गई एक मिसाइल को रोक दिया। जैसे-जैसे लड़ाई जारी है, हम आंकड़ों के माध्यम से युद्ध पर एक नजर डालते हैं।

पश्चिम एशिया संघर्ष में कितने लोगों की गई जान

पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध में 4500 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। यह जानकारी इस संघर्ष में शामिल एक दर्जन से ज्यादा देशों से मिल रही रिपोर्टों से सामने आई है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के अलावा, बहरीन, कुवैत, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई खाड़ी देश भी हमलों का सामना कर रहे हैं।

मानवाधिकार समूह एचआरएएनए के अनुसार, अमेरिका-इजरायल युद्ध में ईरान में लगभग 3300 लोग मारे गए हैं। इनमें 1464 नागरिक शामिल हैं, जिनमें कम से कम 217 बच्चे भी हैं। 28 फरवरी को युद्ध के पहले दिन दक्षिणी ईरान के एक प्राइमरी स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में लगभग 175 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर स्कूली छात्राएं थीं।

ईरान के हमलों में इजरायल में कम से कम 19 लोग मारे गए हैं और 5492 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। अमेरिकी सेना ने पुष्टि की है कि ईरान के हमलों के कारण पश्चिम एशिया में 13 लोग हताहत हुए हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच भी झड़पें हुई हैं।

लेबनानी अधिकारियों के अनुसार, 2 मार्च से लेबनान में इजरायल के हमलों में कम से कम 121 बच्चों सहित लगभग 1100 लोग मारे गए हैं। ब्रिटिश रेड क्रॉस के मध्य पूर्व देश क्लस्टर मैनेजर गैब्रियल कार्लसन ने द इंडिपेंडेंट को बताया कि इस संघर्ष के कारण अब तक दस लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों के अनुसार, लेबनान में सिर्फ तीन हफ्तों में 370,000 से अधिक बच्चों को अपने घर छोड़ने पड़े, क्योंकि इजरायली सेना ने पूरे दक्षिण सहित देश के लगभग 15 प्रतिशत हिस्से में लोगों को खाली करने का आदेश दिया था।

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ईरान के साथ युद्ध के एक महीने के दौरान हजारों ठिकानों को निशाना बनाया गया है। अमेरिकी केंद्रीय कमान के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान में 1000 से अधिक ठिकानों पर हमला किया, जबकि इजरायली वायु सेना ने 750 और ठिकानों पर हमला किया। सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के विश्लेषण के अनुसार, युद्ध के दो हफ्ते बाद, अमेरिका और इजरायल ने कुल 15000 ठिकानों पर हमले करने का दावा किया। युद्ध के 10वें दिन के बाद से हमलों की गति घटकर प्रतिदिन 300-500 लक्ष्यों तक आ गई है।

अमेरिका ने एक महीने में दागीं 850 से ज्यादा टोमाहॉक मिसाइलें

वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने महज एक महीने में 850 से अधिक टोमाहॉक मिसाइलें दागी हैं। एक टोमाहॉक मिसाइल को बनाने में दो साल तक का समय लगता है और इसकी कीमत 36 लाख डॉलर (34.2 करोड़ रुपये) प्रति मिसाइल है। युद्ध के पहले 16 दिनों के दौरान, अमेरिका ने 912 एजीएम-158 जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल और जॉइंट एयर-टू-सरफेस स्टैंडऑफ मिसाइल-एक्सटेंडेड रेंज स्टील्थ क्रूज मिसाइलें भी दागीं।

युद्ध के बाद से अब तक एक दर्जन से ज्यादा एमक्यू-9 रीपर ड्रोन नष्ट हो चुके हैं, जिनकी कीमत कम से कम 16 मिलियन डॉलर प्रति ड्रोन है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (डब्ल्यूएसजे) के अनुसार, इनमें से कम से कम आठ ड्रोन ईरानी मिसाइलों द्वारा मार गिराए गए और एक को गलती से फारस की खाड़ी के एक देश ने मार गिराया।

इंग्लैंड के पोर्ट्समाउथ यूनिवर्सिटी में एयर स्टडीज के लेक्चरर मैथ्यू पॉवेल ने अनादोलू एजेंसी को बताया कि अमेरिका के पास एटीएसीएमएस ग्राउंड अटैक मिसाइलों और थाड इंटरसेप्टरों की कमी होने में लगभग एक महीना बाकी है। इजरायल भी अपने शस्त्रागार का तेजी से इस्तेमाल कर रहा है। इजरायल की ब्लू स्पैरो एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइलों के 5 अप्रैल तक समाप्त होने की उम्मीद है, जबकि उसके डेविड्स स्लिंग स्टनर इंटरसेप्टर मिसाइलें संभवतः केवल 6 अप्रैल तक ही चलेंगी।

इजरायल के रैम्पेज सुपरसोनिक मिसाइलों का भंडार 9 अप्रैल तक खत्म हो जाएगा। इजरायल ने अपने 150 एरो 2 और एरो 3 इंटरसेप्टर में से 122 का इस्तेमाल किया है, जो 81 प्रतिशत की गिरावट है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने अभी तक अपने पूरे शस्त्रागार का खुलासा नहीं किया है। अनुमानों के अनुसार, युद्ध के शुरुआती दिनों में ईरान ने 500 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें और 2000 से ज्यादा ड्रोन दागे थे।

2026 की शुरुआत में, ऐसी खबरें थीं कि ईरान के पास लगभग 80000 शाहेद-136 “कामिकेज” ड्रोन का भंडार है और वह प्रतिदिन ड्रोन का उत्पादन कर सकता है। तेहरान ने युद्ध में लक्ष्यों पर हमले करने के लिए इनमें से कई ड्रोन का इस्तेमाल किया है। अनादोलू एजेंसी ने वरिष्ठ शोधकर्ता और नीति सलाहकार इब्राहिम जलाल द्वारा इकट्ठा किए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि ईरान ने इजरायल, खाड़ी देशों, इराक, जॉर्डन और सीरिया में 5693 से ज्यादा हमले किए थे।

इजरायल पर 870 से ज्यादा हमले हो चुके हैं। इनमें से ज्यादातर ड्रोन और कुछ मिसाइलों द्वारा किए गए थे। जलाल के अनुसार, ईरान के पास न तो मिसाइलों और ड्रोनों की कमी हुई है और न ही उसने अपनी सभी क्षमताओं का खुलासा किया है। जलाल ने कहा, “इसने अपने भंडार का 30-40 प्रतिशत से भी कम उपयोग किया है। इसकी वार्षिक उत्पादन क्षमता 1500 मिसाइलों और 2000 ड्रोनों से ज्यादा है।”

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ईरान युद्ध की कीमत

अनुमान है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध पर प्रतिदिन 1 अरब डॉलर (9,486 करोड़ रुपये) तक खर्च कर रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि जहां ईरान लगभग 20000 डॉलर (लगभग 19 लाख रुपये) प्रति ड्रोन की कीमत वाले ड्रोन का उपयोग कर रहा है, वहीं अमेरिका अक्सर 1.3 मिलियन डॉलर (12 करोड़ रुपये) और 4 मिलियन डॉलर (37.9 करोड़ रुपये) के बीच की कीमत वाली मिसाइलों को तैनात कर रहा है।

पेंटागन के अधिकारियों ने सांसदों को बताया कि संघर्ष के पहले छह दिनों में ही अमेरिका को 11.3 अरब डॉलर (11 हजार करोड़ रुपये) का नुकसान हुआ था। व्हाइट हाउस ईरान के साथ युद्ध के लिए 200 अरब डॉलर (19 लाख करोड़ रुपये) और ज्यादा की मांग कर रहा है, राष्ट्रपति ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया है कि यह राशि संघर्ष और यूक्रेन जैसे अन्य देशों को दी गई पिछली सहायता के कारण कम हुए गोला-बारूद और अन्य आपूर्ति की भरपाई के लिए जरूरी है। पेंटागन की पूर्व बजट अधिकारी एलेन मैककुस्कर के अनुसार, युद्ध के पहले तीन हफ्तों में हुए नुकसान की भरपाई और क्षतिपूर्ति के लिए अमेरिका को संभवतः 1.4 अरब डॉलर (13,281 करोड़ रुपये) से लेकर 2.9 अरब डॉलर (27,510 करोड़ रुपये) तक की जरूरत होगी।

वैश्विक तेल और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

अमेरिका और इजरायल के बीच युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को प्रभावी रूप से बंद कर दिया। यह एक बहुत ही अहम जलमार्ग है। ऊर्जा आपूर्ति बाधित रहने के कारण वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। 27 फरवरी को एक बैरल तेल की कीमत 72 डॉलर (6,830 रुपये) थी, जो अब 90 डॉलर (8,538 रुपये) और 100 डॉलर (9486.42 रुपये) के बीच है। 9 मार्च को कीमतें 120 डॉलर (11,384 रुपये) प्रति बैरल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थीं। गोल्डमैन का अनुमान है कि तेल की कीमतों में आए झटके से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को साल के अंत तक प्रति माह 10000 नौकरियों का नुकसान होगा, जिसमें रेस्टोरेंट, होटल और खुदरा स्टोर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

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