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एनएसजी सदस्यता के लिए भारत को मिला मेक्सिको का समर्थन

भारत पिछले कई वर्षों से इस गुट का सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है और उसने 12 मई को इस संबंध में औपचारिक आवेदन दिया था।

Author मेक्सिको सिटी | June 9, 2016 12:46 PM
मैक्सिकों सिटी में एक संयुक्ता संवाददाता सम्मेलन के दौरान मेक्सिको के राष्ट्रपति एनरिक पेना नीतो और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। (रॉयटर्स फोटो)

एनएसजी के लिए भारत की दावेदारी को मेक्सिको के रूप में एक और अहम देश का समर्थन मिला है। मेक्सिको ने 48 देशों के इस समूह में भारत को ‘सकारात्मक’ एवं ‘रचनात्मक’ रूप से समर्थन देने की घोषणा की और दोनों देशों ने द्विपक्षीय संबंधों को एक रणनीति साझेदारी में बदलने के लिए एक रोडमैप विकसित करने पर सहमति व्यक्त की। मेक्सिको के राष्ट्रपति एनरिक पेना नीतो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘मेक्सिको एनएसजी में भारत की सदस्यता का सकारात्मक एवं रचनात्मक रूप से समर्थन करता है।’ मोदी वाशिंगटन में कांग्रेस की एक संयुक्त बैठक को संबोधित करने के बाद यहां पहुंचे।

प्रधानमंत्री ने इस समर्थन के लिए एनएसजी के एक अहम सदस्य मेक्सिको को धन्यवाद दिया और उसे भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक अहम साझीदार बताया। अपनी पांच दिवसीय यात्रा के अंतिम पड़ाव के तहत वाशिंगटन से गुरुवार (9 जून) को यहां पहुंचे मोदी ने कहा, ‘हम क्रेता-विक्रेता के संबंध से आगे बढ़ना चाहते हैं और एक दीर्घकालिक साझीदारी करना चाहते हैं। हमने हमारे संबंधों को एक रणनीतिक साझीदारी में बदलने के लिए ठोस परिणामों का एक रोडमैप विकसित करने पर सहमति जताई है।’

एनएसजी में प्रवेश के मामले में भारत की दावेदारी के लिए मेक्सिको के समर्थन को महत्वपूर्ण समझा जा रहा है। एनएसजी के सदस्यों को परमाणु प्रौद्योगिकी के निर्यात और इससे संबंधित व्यापार करने की अनुमति है। मोदी ने गत सोमवार (6 जून) को एनएसजी के एक अन्य अहम सदस्य स्विट्जरलैंड की यात्रा की थी। परमाणु प्रसार को लेकर गहरी चिंता व्यक्त करने के तौर पर जाने जाने वाले यूरोपीय देश स्विट्जरलैंड ने परमाणु व्यापार क्लब में शामिल होने के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन करने की घोषणा की थी।

पांच देशों की अपनी यात्रा के अंतिम पड़ाव में यहां आए प्रधानमंत्री मोदी के साथ नीतो ने कई द्विपक्षीय एवं वैश्विक मामलों पर व्यापक वार्ता के बाद परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी को अपने देश के समर्थन की घोषणा की। मोदी और नीतो ने इस वार्ता के दौरान व्यापार एवं निवेश, सूचना प्रौद्योगिकी, जलवायु परिवर्तन एवं उर्जा समेत कई मामलों में द्विपक्षीय सहयोग गहरा करने के तरीकों पर बात की।

मेक्सिको और स्विट्जरलैंड के समर्थन को ऐसे समय में महत्वपूर्ण समझा जा रहा है जब चीन यह तर्क देकर एनएसजी में भारत की सदस्यता का विरोध कर रहा है कि उसने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ मंगलवार (7 जून) को वॉशिंगटन में हुई वार्ता में भी इस मुद्दे पर मुख्य रूप से चर्चा हुई। अमेरिका और एनएसजी के कई अन्य सदस्यों ने परमाणु अप्रसार के पिछले रिकॉर्ड के आधार पर भारत को समूह में शामिल किए जाने का समर्थन किया है। एनएसजी सर्वसम्मति के सिद्धांत के तहत काम करता है और यदि एक भी देश इसके खिलाफ मतदान करता है तो इसकी दावेदारी समाप्त हो जाएगी।

भारत पिछले कई वर्षों से इस गुट का सदस्य बनने की कोशिश कर रहा है और उसने 12 मई को इस संबंध में औपचारिक आवेदन दिया था। एनएसजी परमाणु क्षेत्र संबंधी अहम मामलों को देखता है और उसके सदस्यों को परमाणु प्रौद्योगिकी का निर्यात करने और इसमें व्यापार करने की अनुमति है। इसकी सदस्यता से भारत को परमाणु ऊर्जा क्षेत्र का विस्तार करने में मदद मिलेगी। भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के आधार पर चीन की ओर से न चाहते हुए भारत के मामले का समर्थन करने के बाद एनएसजी ने असैन्य परमाणु प्रौद्योगिकी तक पहुंच के लिए वर्ष 2008 में भारत को विशेष छूट दी थी।

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