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एनएसजी की दो टूक- भारत के मामले में नहीं बरती जाएगी कोई रियायत, पूरी करनी होगी शर्त

48 देशों के समूह द्वारा जारी एक बयान में हालांकि कहा गया है कि वह उन देशों की भागीदारी पर विचार करना जारी रखेगा जिन्होंने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं ।

Author सोल | June 24, 2016 5:11 PM
परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में 48 देश हैं।

अपनी दो दिवसीय बैठक की समाप्ति पर एनएसजी ने शुक्रवार (24 जून) को यहां ‘परमाणु अप्रसार संधि’ को अंतरराष्ट्रीय अप्रसार व्यवस्था की धुरी बताते हुए इसके ‘पूर्ण और प्रभावी’ क्रियान्वयन के प्रति अपना ‘पूर्ण समर्थन’ घोषित किया जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत के मामले में कोई रियायत नहीं बरती जाएगी। 48 देशों के समूह द्वारा जारी एक बयान में हालांकि कहा गया है कि वह उन देशों की भागीदारी पर विचार करना जारी रखेगा जिन्होंने एनपीटी पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं ।

दो दिवसीय बैठक के दौरान भारत के आवेदन पर विचार विमर्श की पुष्टि करते हुए बयान में कहा गया है कि समूह ने भारत के साथ असैन्य परमाणु सहयोग संबंधी बयान 2008 के सभी पहलुओं पर सूचना को साझा किया तथा भारत के साथ एनएसजी के रिश्तों पर विचार विमर्श किया। बयान में कहा गया है, ‘बैठक में भाग लेने वाली सरकारों ने एनपीटी को अंतरराष्ट्रीय अप्रसार व्यवस्था की धुरी बताते हुए इसके पूर्ण और प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति अपना दृढ़ समर्थन दोहराया।’

बयान कहता है, ‘एनएसजी ने गैर हस्ताक्षरकर्ता देशों की भागीदारी के सभी तकनीकी, कानूनी और राजनीतिक पहलुओं पर विचार विमर्श किया और इस चर्चा को जारी रखने का फैसला किया गया।’ एक विशेष बैठक में गुरुवार (23 जून) रात भारत के आवेदन पर चर्चा हुई जहां चीन और कई अन्य देशों ने एनएसजी में इसके प्रवेश का विरोध करते हुए कहा कि वह एनपीटी का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है।

दक्षिण कोरिया के राजदूत सोंग युंग वान की अध्यक्षता में हुई एनएसजी की समापन बैठक में भाग लेने वाली सरकारों ने सभी देशों से एनएसजी के काम और उद्देश्य से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए चौकसी बरतने का भी आह्वान किया। एनएसजी में यह भी फैसला किया गया कि वर्ष 2017 से 2018 के लिए एनएसजी की कमान स्विटजरलैंड के हाथों में रहेगी और वह अगली बैठक की मेजबानी करेगा। एनएसजी ने ऐसे देशों की संख्या में इजाफे का भी स्वागत किया जिन्होंने अपनी राष्ट्रीय निर्यात नियंत्रण व्यवस्था को एनएसजी के दिशा निर्देशों और नियंत्रण सूची के समरूप बनाया है।

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