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उत्‍तर कोरिया में जमीन से 328 फीट नीचे चलती हैं मेट्रो ट्रेनें, देखने लायक है स्‍टेशनों की सजावट, गिने-चुने पर्यटक ही कर पाते हैं सफर, जानिए और तथ्‍य

हॉन्ग कॉन्ग की 25 वर्षीय फोटोग्राफर इलिने ली को पिछल साल अक्टूबर में उत्तर कोरिया घूमने का मौका मिला और उन्होंने उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग की मिथकीय भूमिगत मेट्रो के बारे में अनोखी जानकारियां और तस्वीरें साझा कीं।

प्योंगयांग मेट्रो के अंदर की तस्वीर (Photo- Elaine Li Instagram)

उत्तर कोरिया के दुनिया के सबसे ज्यादा रहस्यमयी देशों में एक है। उत्तर कोरिया के बारे में ज्यादातर वही खबरें दुनिया तक पहुंचती हैं जो वहां का सरकारी मीडिया देता है। बाहरी देशों के चुनिंदा सैलानियों को ही उत्तर कोरिया में घूमने का मौका मिलता है। जिन लोगों को उत्तर कोरिया घूमने का मौका मिलता है उन पर कई तरह के प्रतिबंध होते हैं और उन प्रतिबंधों को तोड़ने वालो को कड़ी सजा का दिए जाने का प्रावधान है। ऐसे में वहां की कोई भी जानकारी बाहरी दुनिया को चौंकाने वाली होती है।  हॉन्ग कॉन्ग की 25 वर्षीय फोटोग्राफर इलिने ली को पिछल साल अक्टूबर में उत्तर कोरिया घूमने का मौका मिला और उन्होंने उत्तर कोरिया की राजधानी प्योंगयांग की मिथकीय भूमिगत मेट्रो के बारे में अनोखी जानकारियां और तस्वीरें साझा कीं।

इस भूमिगत मेट्रो ट्रेन की सबसे खास बात ये है कि सतह से 328 फीट नीचे है। मेट्रो स्टेशन पर रोशनी थोड़ी मद्धिम होती है। उसकी भीतरी छत पर बड़े बड़े फानूस, संगमरमर के खंभे और किम जोंग-इल के चित्र लगे होते हैं। किम जोंग-इल उत्तर कोरिया के पूर्व तानाशाह और मौजूदा तानाशाह किम जोंग-उन के पिता थे।

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मेट्रो स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर लोगों को पढ़ने के लिए समाचार पत्र रखे हुए होते हैं। ये अखबार सरकारी होते हैं इसलिए उनमें ज्यादातर वहीं खबरें होती हैं जो सरकार जनता तक पहुंचाना चाहती है। आम छवि को उलट इलिने को स्टेशन या ट्रेनों की तस्वीर लेने के लिए किसी की इजाजत नहीं लेनी पड़ी। हालांकि वो जहां भी जाती थीं उनके संग सरकार द्वारा तैनात टूरिस्ट गाइड साथ रहता था। उन्हें प्लेटफॉर्म पर कहीं भी टहलने की आजादी थी लेकिन मेट्रो ट्रेन में वो कुछ स्टेशनों तक ही सफर कर सकती थीं। उन्हें केवल चुनिंदा मेट्रो स्टेशनों पर उतरने की इजाजत दी गई थी। उन्होंने मेट्रो की सुरंग के अंदर तस्वीर लेने की अनुमति नहीं थी।

इलिने के सीएनएन को दिए इंटरव्यू में कहा कि मेट्रो ट्रेन में सफर करने वाले लोग बेजान नजर आ रहे थे। ज्यादातर लोग चुपचाप सफर कर रहे थे। वो आपस में बहुत ही कम बात कर रहे थे। उत्तर कोरिया के मेट्रो ट्रेन में बहुत कम लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल कर रहे थे। उत्तर कोरिया के ट्रेन में महिला कंडक्टर भी काम करती हैं। इलिने के अनुसार उन्होंने अपने उत्तर कोरिया भ्रमण के दौरान पाया कि वहां के लोग भी एशिया के दूसरे देशों के लोगों जैसे ही हैं।

प्योंगयांग के अंदर बने भूमिगत मेट्रो की तस्वीरें-

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