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‘चीन बॉर्डर से आने वालों को गोली मारने के आदेश, ताकि उत्तर कोरिया न पहुंच पाए कोरोना’, अमेरिकी कमांडर का दावा

यूएस फोर्स कोरिया (USFK) के कमांडर रॉबर्ट अब्राम्स ने बताया कि उत्तर कोरिया में सीमाएं बंद होने की वजह से आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे स्मग्लिंग बढ़ी है।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र वॉशिंगटन | Updated: September 11, 2020 3:51 PM
उत्तर कोरिया के तनाशाह किम जोंग-उन। (एजेंसी फोटो)

उत्तर कोरिया में कोरोनावायरस महामारी के केस न मिलने के बाद दुनियाभर के कई विशेषज्ञ चौंके हैं। हालांकि, ज्यादातर का मानना है कि या तो कम्युनिस्ट देश अपने मामलों को छिपा रहा है या फिर उसने संक्रमितों को मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया है। इस बीच दक्षिण कोरिया में तैनात एक अमेरिकी कमांडर ने दावा किया है कि उत्तर कोरिया में शुरुआती महीनों में ही अधिकारियों ने चीन बॉर्डर से घुसने वाले लोगों को गोली मारने के आदेश दे दिए थे, ताकि कोरोनावायरस देश में न घुस पाए।

बता दें कि उत्तर कोरिया ने अब तक कोरोना के एक भी केस की पुष्टि नहीं की है। अमेरिका और यूएन के प्रतिबंधों की वजह से उत्तर कोरिया की स्वास्थ्य व्यवस्था भी बुरी तरह चरमराई है। ऐसे में कहा जा रहा है कि अगर वहां कोरोना फैला तो हालात संभालने मुश्किल हो जाएंगे। बता दें कि उत्तर कोरिया शासन ने जनवरी में ही चीन से लगती अपनी सीमाएं बंद करने का फैसला किया था। इसी साल जुलाई में वहां की सरकारी मीडिया ने कहा कि देश में कड़ी इमरजेंसी लागू कर दी गई है।

वॉशिंगटन में सेंटर फॉर स्ट्रैटिजिक एंड इंटरनेशनल स्टडी (CSIS) में एक कॉन्फ्रेंस के दौरान यूएस फोर्स कोरिया (USFK) के कमांडर रॉबर्ट अब्राम्स ने बताया कि उत्तर कोरिया ने चीन से लगते अपने बॉर्डर पर एक से दो किलोमीटर का बफर जोन भी बना दिया है, जहां से कोई घुसपैठ भी न कर सके। इसके अलावा इस इलाके में स्पेशल ऑपरेशन फोर्स को तैनात किया गया है, जिन्हें देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए हैं।

अब्राम्स ने आगे बताया कि उत्तर कोरिया में सीमाएं बंद होने की वजह से वहां स्मग्लिंग बढ़ी है, जिससे अफसरों को आपूर्ति के लिए दखल देना पड़ा। बॉर्डर बंद होने की वजह से चीन से आयात में भी 85 फीसदी की कमी आई है। इसके अलावा उत्तर कोरिया पर हाल ही में मायसाक तूफान की भी मार पड़ी है। सरकारी मीडिया ने बताया था कि देशभर में तूफान से दो हजार घरों को नुकसान पहुंचा है। लेकिन इसके बावजूद किम शासन का ध्यान कोरोना को देश में आने से रोकने पर ही है। इसके चलते वहां सरकार के खिलाफ कोई आवाज भी नहीं उठ रही।

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