भारत ने बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की वापसी को लेकर कोई समयसीमा देने से इनकार किया है। बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि हसीना के प्रत्यर्पण के अनुरोध की कानूनी प्रक्रिया के तहत जांच की जा रही है। इसलिए उनकी वापसी की कोई समयसीमा तय नहीं की जा सकती।

ढाका में एक निजी थिंक टैंक की ओर से आयोजित चर्चा में त्रिवेदी ने कहा, “कोई भी आपको हसीना की वापसी की समयसीमा नहीं बता सकता।” उन्होंने कहा कि भारत सरकार पहले भी स्पष्ट कर चुकी है कि बांग्लादेश की ओर से हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर भेजे गए अनुरोध पर एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत विचार किया जा रहा है।

शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में बड़े सरकार विरोधी आंदोलन के बाद देश छोड़कर भारत आ गई थीं। उनकी सरकार गिरने के बाद से वह भारत में रह रही हैं।

त्रिवेदी ने यह भी स्पष्ट किया कि हसीना को भारतीय वायुसेना या सेना भारत नहीं लेकर आई थी। उन्होंने बताया कि 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश वायुसेना का एक विमान हसीना को भारत लेकर आया था। बांग्लादेश में यह आंदोलन सरकारी नौकरियों में आरक्षण व्यवस्था के खिलाफ शुरू हुआ था। बाद में यह व्यापक सरकार विरोधी आंदोलन में बदल गया, जिसे जुलाई विद्रोह कहा गया।

शेख हसीना के भारत में रहने पर बोले भारतीय उच्चायुक्त- हमारे पास ज्यादा विकल्प नहीं थे

बांग्लादेश में विरोध प्रदर्शन के दौरान जब प्रदर्शनकारी शेख हसीना के सरकारी आवास की ओर बढ़ रहे थे, तब बांग्लादेश सेना के नेतृत्व वाली सुरक्षा टीम उन्हें वहां से लेकर गई थी।

भारत में हसीना को स्वीकार करने के फैसले पर बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने कहा कि उस समय हसीना बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं। ऐसे हालात में पड़ोसी देश होने के नाते भारत के सामने उन्हें स्वीकार करने के अलावा ज्यादा विकल्प नहीं था।

उन्होंने कहा कि उस समय वह बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं। हमारे पास मुश्किल से कोई विकल्प था। पड़ोसी होने के नाते यह हमारा कर्तव्य था कि हम वास्तविकता को स्वीकार करें।

त्रिवेदी ने कहा कि अगर भारत यह कहता कि वह हसीना को स्वीकार नहीं करेगा और विमान को उतरने की अनुमति नहीं देगा, तो स्थिति और भी गंभीर हो सकती थी। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जो कुछ हुआ, वह दुखद परिस्थितियों का परिणाम था और ऐसी स्थिति दुनिया में कहीं दोबारा नहीं होनी चाहिए।

ये टिप्पणियां उन्होंने शनिवार को ढाका में आयोजित Bay of Bengal Conversation 2026 के एक पैनल चर्चा के दौरान कीं। कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान मौजूद थे, लेकिन त्रिवेदी की टिप्पणी के समय वह पैनल में मौजूद नहीं थे।

हसीना के प्रत्यर्पण पर पहली स्पष्ट टिप्पणी

हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे पर त्रिवेदी की यह अब तक की सबसे स्पष्ट टिप्पणी मानी जा रही है। इससे पहले वह राजनीतिक मामलों पर टिप्पणी करने से बचते रहे हैं।

शेख हसीना की सरकार अगस्त 2024 में गिर गई थी। इसके बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी, जिसने करीब डेढ़ साल तक शासन किया। इस दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में काफी तनाव आया। हसीना के प्रत्यर्पण की मांग, अल्पसंख्यकों पर हमलों की चिंता और चीन के साथ बांग्लादेश के बढ़ते संबंध इसके प्रमुख कारण रहे।

2025 में बांग्लादेश के एक विशेष न्यायाधिकरण ने हसीना की अनुपस्थिति में सुनवाई करते हुए उन्हें मौत की सजा सुनाई। अंतरिम सरकार ने उनकी पार्टी अवामी लीग को भी भंग कर दिया और भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की।

इसके बाद 12 फरवरी के चुनाव में अवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया और तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी की सरकार बनी। नई सरकार ने भी हसीना के प्रत्यर्पण की मांग जारी रखी।

हसीना ने कहा था- दिसंबर में लौटूंगी

5 अगस्त को नई दिल्ली से एक वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में हसीना ने कहा था कि वह दिसंबर में बांग्लादेश लौटने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा था कि उन्हें जेल या मौत की सजा का डर नहीं है और वह अपने लोगों के साथ रहने के लिए वापस जाएंगी।

इस बयान के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव और बढ़ गया। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने कहा कि हसीना की वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस से भारत यात्रा को लेकर चल रही प्रक्रिया प्रभावित हुई है। वहीं भारत ने कहा कि इस कार्यक्रम में उसकी कोई भूमिका नहीं थी।

बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा है कि हसीना के आत्मसमर्पण की कोई गुंजाइश नहीं है। उनके मुताबिक, बांग्लादेश लौटते ही हसीना को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और अदालत के फैसले को कानून के अनुसार लागू किया जाएगा।

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दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 के कॉकपिट में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार ने को-पायलट द्वारा उन किए गए हमले को विवरण विस्तार से इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दिया है। उन्होंने बताया कि वो ओमानी को-पायलट प्रार्थना के लिए उठा था लेकिन फिर उसने अचानक हमला शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि हमले इतनी तीव्रता से किए गए कि उन्हें धुंधला दिखने लगा था। पढ़ें पूरी खबर।