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नोबेल विजेता लियू शियावबो का निधन, पत्नी को रिहा करने के लिए चीन पर अंतरराष्ट्रीय दबाव, ट्रंप ने जताया दुख

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेंग शुआंग ने लियू के मौत पर चीन की आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा है कि डॉक्टरों ने उनक इलाज का पूर्ण प्रयास किया।

Author Updated: July 14, 2017 2:09 PM
लियू की मृत्यु के बाद अंतराष्ट्रीय समुदाय बीजिंग से अनुरोध कर रहा है कि उनकी पत्नी को रिहा कर दिया जाए। (Photo Source: REUTERS)

नोबेल पुरस्कार विजेता लियू शियावबो की देश से बाहर जाने की अंतिम इच्छा पूरी नहीं करने को लेकर कम्युनिस्ट देश की बेहद कटु आलोचना हो रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय उनकी विधवा पत्नी को रिहा करने को लेकर बीजिंग पर दबाव बना रहा है। अमेरिका और यूरोपीय संघ ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग सरकार से अनुरोध किया है कि वह अब लियू की पत्नी को देश से बाहर जाने की अनुमति दे दे। लेखिका लियू शिया वर्ष 2010 से ही नजरबंद हैं।

चीनी डॉक्टरों का कहना है कि कैंसर से जूझ रहे लियू के अंतिम क्षणों में उनकी पत्नी साथ में थीं। चीन सरकार ने लियू शिया का बाहरी दुनिया से संपर्क काटा हुआ है और किसी को उनके रहने के स्थान का पता नहीं है। उनके पति की मृत्यु के बाद अंतराष्ट्रीय समुदाय बीजिंग से अनुरोध कर रहा है कि उन्हे रिहा कर दिया जाए।

अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा, ‘‘मैं चीन सरकार से अनुरोध करता हूं कि वह लियू शिया को नजरबंदी से रिहा करे और उनकी इच्छानुसार उन्हें चीन से बाहर जाने की अनुमति दे।’’ यूरोपीय संघ ने अनुरोध किया है कि बीजिंग लियू के परिवार को शांति से उनका अंतिम संस्कार करने की अनुमति दे। लियू शिया के अमेरिकी वकील जेरेड गेन्सर का कहना है कि पिछले 48 घंटों से उनके साथ संपर्क के सभी रास्ते बंद कर दिये गये हैं।

लियू की मौत पर जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने लियू को मानवाधिकार के लिए साहसी योद्धा बताया है, जबकि ब्रिटेन के विदेश मंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि यह गलत है कि बीजिंग ने लियू को विदेश जाने की अनुमति नहीं दी। नोबेल समिति ने एक बयान में कहा कि हमें यह बहुत दुखद लग रहा है कि लियू शियावबो के बहुत ज्यादा बीमार होने तक उन्हें अच्छे इलाज के लिए बड़े अस्पताल में नहीं भेजा गया।

संयुक्त राष्ट्र महासिचव एंटोनियो गुटारेस ने भी लियू के असामयिक निधन पर शोक जताया है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जेंग शुआंग ने लियू के मौत पर चीन की आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा है कि डॉक्टरों ने उनक इलाज का पूर्ण प्रयास किया। शिन्हुआ के अनुसार, शुआंग ने कहा,, ‘‘चीन विधि के शासन के तहत शासित राष्ट्र है। लियू शियावबो की मौत का मामला चीन का आंतरिक मसला है और अन्य देश इस संबंध में अनुचित टिप्पणियां करने की स्थिति में नहीं हैं।’’ गौरतलब है कि 61 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता को एक महीने पहले ही जेल से शेनयांग शहर के अस्पताल लाया गया था।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के नोबेल पुरस्कार विजेता लियू शियाओबो के निधन की खबर सुनकर काफी दुखी हैं। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव सीन स्पाइसर ने कहा, ‘‘राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप शांति के लिए नोबेल पुरस्कार पाने वाले और चीन के प्रतिष्ठित राजनीतिक कैदी लियू शियाओबो के निधन के बारे में जानकर काफी दुखी हैं। राष्ट्रपति की हार्दिक संवेदनाएं लियू शियाओबो की पत्नी लियू शिया और उनके परिवार एवं दोस्तों के साथ हैं।’’

61 वर्षीय शियाओबो को जेल में रहते हुए वर्ष 2010 में शांति के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह पिछले कुछ समय से कैंसर से जूझ रहे थे और उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया था जिसके बाद कल उनका निधन हो गया। स्पाइसर ने एक बयान में कहा, ‘‘एक कवि, विद्धान और साहसी अधिवक्ता लियू शियाओबो ने लोकतंत्र और आजादी के लिए अपना जीवन सर्मिपत कर दिया।’’

टेक्सास से रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज ने कहा कि आज दुनिया ने आजादी का एक नायक खो दिया है। सीनेटर जॉन मैक्केन ने कहा कि चीन की कैद में लियू शियाओबो की मौत मौलिक मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है जिसके लिए लियू ने अपना पूरा जीवन बिता दिया। इसके अलावा सीनेटर मार्को रुबियो और कांग्रेस के सदस्य सैंडर लेविन ने भी शियाओबो के निधन पर शोक जताया है।

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